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रामनगर की रामलीला: राम के इंतजार में दरवाजों पर बैठे मुस्लिम परिवार, देखने पहुंचे ताड़का वध; प्रभु के जयकारे

Wed, 30 Sep 2026 09:07 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 30 Sep 2026 09:07 PM IST
सार

रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में ताड़का वध प्रसंग देखने के लिए मुस्लिम परिवार भी घरों के दरवाजों पर बैठे नजर आए। श्रद्धालुओं ने प्रभु राम के पहुंचने पर जयकारे लगाए। रामलीला की झांकी और पात्रों को देखने के लिए सड़क किनारे बड़ी संख्या में लोग जुटे। क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा।

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Ramnagar Ramlila Muslim families doorsteps awaiting Ram arrive watch slaying of Tadaka chants of praise
राम के इंतजार में दरवाजों पर बैठे मुस्लिम परिवार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान श्रीराम की सवारी आने वाली थी। बारीगढ़ई में घरों के दरवाजों पर लोग इंतजार में बैठे थे। इनमें हिंदू परिवार के साथ मुस्लिम परिवारों के बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। किसी को भगवान की सवारी के दर्शन का इंतजार था तो कोई उनके स्वागत के लिए दरवाजे पर बैठा था। 

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सवारी पहुंची तो लोगों ने हाथ जोड़कर अभिवादन किया और फिर ताड़का वध की लीला देखने मैदान की ओर चल पड़े। मोहल्ले के लोगों के मुताबिक, रामलीला के दौरान हर साल यही परंपरा निभाई जाती है। बीएचयू न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर वीएन मिश्रा ने भी लोगों से बातचीत के बाद कहा कि यही भावना भारत की रीढ़ है और कौमी एकता को बनाए रखती है।

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रामनगर की रामलीला के तीसरे दिन रविवार को भगवान श्रीराम के जनकल्याणकारी स्वरूप और राक्षसी शक्तियों के दलन के प्रसंगों का सजीव मंचन हुआ। अयोध्या से लेकर जनकपुर तक के सफर में मुनि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, ताड़का वध, सुबाहु संहार और अहिल्या उद्धार के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्तिभाव से सराबोर कर दिया। भगवान की सवारी की अगवानी के बाद बारीगढ़ई के लोगों ने भी मैदान में पहुंचकर ताड़का वध की लीला देखी।

लीला में विश्वामित्र दोनों भाइयों को लेकर वन पथ की ओर प्रस्थान करते हैं। बक्सर स्थित सिद्धाश्रम में यज्ञ आरंभ होते ही निशाचरों का उपद्रव शुरू हो जाता है। यज्ञ की पवित्रता की रक्षा करते हुए प्रभु श्रीराम अपने अचूक बाणों से राक्षसी ताड़का और सुबाहु का वध कर देते हैं, जबकि मारीच को बाण मारकर सागर पार फेंक देते हैं। राक्षसी आतंक समाप्त होने से आश्रम में निर्विघ्न अनुष्ठान संपन्न होता है और देवलोक से पुष्प वर्षा के बीच देवता प्रभु की जय-जयकार करते हैं।

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कुंवर अनंत नारायण ने भी देखी रामलीला। - फोटो : संवाद

यज्ञ संपन्न होने के बाद विश्वामित्र के साथ दोनों भाई मिथिला की ओर बढ़ते हैं। रास्ते में एक सुनसान और उपेक्षित आश्रम में पड़ी शिला को देखकर प्रभु श्रीराम मुनि से उसका रहस्य पूछते हैं। मुनि विश्वामित्र बताते हैं कि यह शिला ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या हैं, जो एक भूलवश मिले श्राप के कारण पाषाण रूप में तब्दील हो गई हैं। मुनि के आदेश पर प्रभु श्रीराम जैसे ही अपने चरणकमल का स्पर्श उस शिला से कराते हैं, वह एक दिव्य नारी के रूप में प्रकट हो जाती हैं। अहिल्या प्रभु के चरणों में नतमस्तक होकर स्तुति करती हैं और श्रापमुक्त होकर पतिलोक चली जाती हैं।

गंगा के दर्शन व पूजन के उपरांत विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण जनकपुर के सीमावर्ती उपवन में विश्राम करते हैं। महर्षि के आगमन का समाचार पाते ही विदेहराज राजा जनक मंत्रियों और पुरोहितों के साथ उनके स्वागत के लिए पहुंचते हैं। वहां दोनों तेजस्वी राजकुमारों के दिव्य रूप को देखकर राजा जनक विस्मित हो जाते हैं और मुनि से उनका परिचय पूछते हैं। 

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बारीगढ़ई मोहल्ले में निकाली गई श्रीराम की सवारी
बारीगढ़ई मोहल्ले में रविवार को भगवान श्रीराम की सवारी निकलने से पहले अलग ही दृश्य नजर आया। अपने-अपने दरवाजों पर हिंदू परिवारों के साथ मुस्लिम परिवार भी सवारी का इंतजार कर रहे थे। इम्तियाज अली और वारिश खान ने बताया कि वे हर साल भगवान की सवारी की अगवानी के लिए इसी तरह बैठते हैं। पहले यहां उनका स्वागत करेंगे, फिर सभी लोग मैदान में जाकर ताड़का वध की लीला देखेंगे। शब्बीर खान, वसीम खान और फराज अहमद ने बताया कि जिस स्थान पर ताड़का वध की लीला होती है, वह उनके मोहल्ले में काशीराज की जगह रही है। 

Ramnagar Ramlila Muslim families doorsteps awaiting Ram arrive watch slaying of Tadaka chants of praise
औरंगाबाद हाउस में मुकुट पूजा से रामलीला का शुभारंभ। - फोटो : अमर उजाला

ऐसी भावना ही भारत की रीढ़ है और कौमी एकता को बनाए रखती है
बीएचयू न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर वीएन मिश्रा ने बताया कि वह कई वर्षों से रामलीला में जाते रहे हैं। रविवार को उन्होंने बारीगढ़ई के लोगों से बातचीत की। सभी अपने-अपने दरवाजों पर बैठे भगवान की सवारी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऐसी भावना ही भारत की रीढ़ है और कौमी एकता को बनाए रखती है। लीला के शुभारंभ में संत समाज और यज्ञ की सुरक्षा को लेकर चिंतित महर्षि विश्वामित्र अयोध्या नरेश राजा दशरथ के दरबार में पहुंचते हैं। 

जनकपुर में श्रीराम-लक्ष्मण का अलौकिक सौंदर्य देख मंत्रमुग्ध हुए नगरवासी
जाल्हूपुर की रामलीला में रविवार को श्रीराम और लक्ष्मण ने जनकपुर में प्रवेश किया। उनके अलौकिक सौंदर्य को देखकर नगरवासी मंत्रमुग्ध हो गए। रामलीला के तीसरे दिन महर्षि विश्वामित्र अयोध्या पहुंचे। उन्होंने राजा दशरथ से राक्षसों के उपद्रव से यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम और लक्ष्मण को मांगा। श्रीराम ने ताड़का और सुबाहु का वध कर यज्ञ को पूरी तरह सुरक्षित किया। यज्ञ रक्षा के बाद श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ आगे बढ़े। रास्ते में उन्होंने शापित अहिल्या का उद्धार किया और गंगा पार की। 

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