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Ramnagar Ki Ramlila: 14वें दिन अयोध्या कांड के प्रसंग का हुआ मंचन, रामजी की खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटे भरत

Thu, 22 Sep 2022 11:56 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 22 Sep 2022 11:56 PM IST
सार

श्रीरामलीला के 14वें दिन भरतजी का चित्रकूट से विदा होकर अयोध्या के लिए प्रस्थान और नंदीग्राम में कुटी बनाकर भरत का रहना दिखाया गया। गुरुवार को अयोध्या कांड के 306 से 326 तक का प्रसंग मंचित किया गया।

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Ramnagar Ki Ramlila episode of Ayodhya incident On 14th day Bharat returned to Ayodhya
रामनगर की रामलीला का 14वां दिन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीरामलीला के 14वें दिन भरतजी का चित्रकूट से विदा होकर अयोध्या के लिए प्रस्थान और नंदीग्राम में कुटी बनाकर भरत का रहना दिखाया गया। गुरुवार को अयोध्या कांड के 306 से 326 तक का प्रसंग मंचित किया गया। रामलीला में दिखाया कि श्रीराम को मनाने वन में गए भरत राम को मनाने की जगह खुद ही उनकी बात मान गए। वे उनकी खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौट आए। श्रीराम की खड़ाऊं अयोध्या के राज सिंहासन पर रखकर उसकी जिम्मेदारी शत्रुघ्न को सौंपकर नंदीग्राम में निवास करने चले गए। राम ने भरत को सब प्रकार से समझाया तो भरत अयोध्या लौटने के लिए तैयार हो गए।

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उन्होंने जाने से पूर्व चित्रकूट के पावन स्थलों को देखने की इच्छा व्यक्त की, जिस पर राम ने अत्रि मुनि की आज्ञा से उन्हें भेजा। अत्रि मुनि के कहने परन भरत ने पहाड़ के समीप स्थित एक कूप में सभी तीर्थों के जल को रख दिया। मुनि ने उसको भरत कूप नाम दिया। जिसकी महिमा राम ने सब को बताई। भरत ने राम से कहा कि हमारी इच्छा पूरी हुई अब आप आज्ञा दीजिए। सभी को विदा करके राम अपनी कुटिया में गए और वहां चित्रकूट में राम सीता और लक्ष्मण की आरती हुई।
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इस रामलीला में दो बार होती आरती
रामनगर। रामलीला के दौरान बृहस्पतिवार को दो बार पात्रों की आरती हुई। पहली आरती चित्रकूट में, दूसरी बार आरती नंदीग्राम में हुई। यही एक ऐसी लीला है जिसमें दो बार पात्रों की आरती की जाती है। अन्य किसी भी लीला में 2 बार आरती नहीं की जाती। दूसरी आरती के बाद ही लीला को विराम दिया जाता है।

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शिव का धनुष राम ने तोड़ा, सीता ने पहनाई वरमाला

Ramnagar Ki Ramlila episode of Ayodhya incident On 14th day Bharat returned to Ayodhya
रामनगर की रामलीला - फोटो : अमर उजाला

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा स्थापित तुलसी घाट की रामलीला में बृहस्पतिवार को धनुष यज्ञ लीला का मंचन हुआ। भदैनी स्थित रामलीला मैदान में धनुष यज्ञ की लीला में राजा जनक द्वारा आयोजित स्वयंवर में देश विदेश के राजा महाराजा आए थे, लेकिन भगवान शिव का धनुष तोड़ना तो दूर उसे कोई हिला नहीं पाया। अंत में गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान राम ने तिनके के समान धनुष उठा कर तोड़ दिया। 

रामलीला में आज
रामनगर-जयंत नेत्रभंग, अत्रि मुनि मिलन, विराध वध, इंद्र दर्शन, इंद्र दर्शन, शरभंग-सुतीक्षण, अग्रस्त्य समागम, पंचवटी में निवास और गीता उपदेश।
जाल्हूपुर-भरतजी की चित्रकूट से विदाई, अयोध्या आगमन, नंदी ग्राम निवास।
शिवपुर-भरत मनावन।
लाटभैरव-राम घंडइल पार, चित्रकूट पयान, कोल-भील मिलन, दशरथ मरण।
चित्रकूट- राम घंडइल पार, भारद्वाज आश्रम में आतिथ्य, पथिक की झांकी, चित्रकूट में निवास।
लोहता-श्रीराम चंद्र की बारात एवं राम कलेवा।
तुलसी घाट-राज्याभिषेक की तैयार एवं कोप भवन।
भोजूबीर-भरत पयान, निषाद भेंट, भाद्वाज भेंट, चित्रकूट गमन, सीता स्वप्न एवं लक्ष्मण विचार।

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