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Ramadan 2024: आज नजर आया चांद तो कल होगा पहला रोजा, पहला सबसे छोटा और आखिरी होगा सबसे लंबा
Mon, 11 Mar 2024 09:28 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 11 Mar 2024 09:28 AM IST
सार
Ramadan 2024: आज नजर आया चांद तो कल पहला रोजा होगा। पहला रोजा सबसे छोटा और आखिरी सबसे लंबा होगा। चांद के दीदार के साथ रमजान के रूहानी सफर का आगाज होगा।
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रमजान 2024
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
अल्लाह की इबादत का मुकद्दस महीना रमजान चांद के दीदार के साथ शुरू होगा। सोमवार को चांद नजर आने की संभावना है अगर चांद का दीदार हुआ तो 12 मार्च को मुसलमान पहला रोजा रखेंगे। इस साल का पहला रोजा सबसे छोटा और आखिरी सबसे लंबा होगा।
उधर, हाफिज इस मुकद्दस माह की रातों में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज तरावीह के लिए कुरआन-ए-पाक दोहराने में जुटे हैं। इस साल पहला रोजा सबसे छोटा करीब 13 घंटे 20 मिनट और आखिरी रोजा सबसे लंबा 14 घंटा 08 मिनट का होगा। रमजान को लेकर मुस्लिम समुदाय में खुशी का माहौल है।
मुस्लिम बहुल इलाकों सरैया, बजरडीहा, मदनपुरा, पीलीकोठी, नई सड़क, दालमंडी, लल्लापुरा, पठानीटोला, सराय हड़हा में चांद को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल रहा। खास कर बच्चे इसे लेकर उत्साहित रहे।
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जहां पुरुष विशेष नमाज तरावीह को लेकर चर्चा करते रहे तो वहीं घरों में महिलाएं भी इबादत के साथ ही सहरी और इफ्तार को लेकर चर्चाओं में मशगूल रहीं। इलाकों में लोग नमाज की तैयारियों के तहत कुर्ता पाजामा, लुंगी और टोपी की खरीदारी भी की। जबकि मस्जिदों में भी तरावीह की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता रहा।
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उधर, हाफिज इस मुकद्दस माह की रातों में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज तरावीह के लिए कुरआन-ए-पाक दोहराने में जुटे हैं। इस साल पहला रोजा सबसे छोटा करीब 13 घंटे 20 मिनट और आखिरी रोजा सबसे लंबा 14 घंटा 08 मिनट का होगा। रमजान को लेकर मुस्लिम समुदाय में खुशी का माहौल है।
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मुस्लिम बहुल इलाकों सरैया, बजरडीहा, मदनपुरा, पीलीकोठी, नई सड़क, दालमंडी, लल्लापुरा, पठानीटोला, सराय हड़हा में चांद को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल रहा। खास कर बच्चे इसे लेकर उत्साहित रहे।
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जहां पुरुष विशेष नमाज तरावीह को लेकर चर्चा करते रहे तो वहीं घरों में महिलाएं भी इबादत के साथ ही सहरी और इफ्तार को लेकर चर्चाओं में मशगूल रहीं। इलाकों में लोग नमाज की तैयारियों के तहत कुर्ता पाजामा, लुंगी और टोपी की खरीदारी भी की। जबकि मस्जिदों में भी तरावीह की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाता रहा।
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रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया इस्लाम में रमजान का रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज किया गया है। इसे बेवजह नहीं छोड़ा जा सकता। बताया कि रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला 10 दिन रहमत का, दूसरा दस दिन मगफिरत का और आखिरी 10 दिन जहन्नम से आजादी का है। इस माह में अल्लाह तआला बंदों का खास रहमत फरमाता है। यही वजह है कि इस माह में एक फर्ज का सवाब सत्तर फर्ज के बराबर और एक नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया इस्लाम में रमजान का रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज किया गया है। इसे बेवजह नहीं छोड़ा जा सकता। बताया कि रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला 10 दिन रहमत का, दूसरा दस दिन मगफिरत का और आखिरी 10 दिन जहन्नम से आजादी का है। इस माह में अल्लाह तआला बंदों का खास रहमत फरमाता है। यही वजह है कि इस माह में एक फर्ज का सवाब सत्तर फर्ज के बराबर और एक नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है।
11 मार्च को रमजान के चांद के नजर आने की संभावना है। चांद नजर आया तो मस्जिदों में तरावीह शुरू हो जाएगी और पहला रोजा 12 मार्च से शुरू होगा। - मुफ्ती हारून रशीन नक्शबंदी
सबसे कम तीन दिन की होगी तरावीह
रमजान का चांद दिखते ही रात से विशेष नमाज तरावीह की शुरुआत होगी। यह नमाज हर मस्जिदों में हाफिजे कुरान अदा कराएंगे। सबसे कम दिन तीन दिन की तरावीह होगी। इसके अलावा पांच दिन, सात दिन, 10 दिन और 15 दिनों में भी तरावीह में कुरान मुकम्मल होगा। कई मस्जिदों में पूरे माह भी तरावीह मुकम्मल होती है। जहां तरावीह मुकम्मल हो जाएगी वहां सूरह तरावीह जारी रहेगी।
रमजान का चांद दिखते ही रात से विशेष नमाज तरावीह की शुरुआत होगी। यह नमाज हर मस्जिदों में हाफिजे कुरान अदा कराएंगे। सबसे कम दिन तीन दिन की तरावीह होगी। इसके अलावा पांच दिन, सात दिन, 10 दिन और 15 दिनों में भी तरावीह में कुरान मुकम्मल होगा। कई मस्जिदों में पूरे माह भी तरावीह मुकम्मल होती है। जहां तरावीह मुकम्मल हो जाएगी वहां सूरह तरावीह जारी रहेगी।