रक्षाबंधन आज, इस बार चीन की नहीं भारतीय महिला समूहों की बनाई राखियां सजेंगी भाइयों की कलाई पर
बहन-भाई के पवित्र संबंध का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन आज पूरे देश में मनाया जाएगा। वाराणसी में यह पर्व इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार भाइयों की कलाई पर स्थानीय महिला समूहों की बनाई राखी सजेगी। कोरोना काल में चीन के सामान को मात देने के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाएं राखी बनाने का कार्य कर रही थीं। उनकी आमदनी में वृद्धि करने के लिए एक अच्छा अवसर रहा। दीनदयाल अंत्योदय योजना के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना में महिलाएं हस्त निर्मित राखियां तैयार कर रही थीं।
राखियों का मूल्य 10, 15 , 20 और 30 रुपए रखा गया है। खादी मास्क 10 रुपये में दो पीस बेचा जा रहा है। इस कार्य में 1800 से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। अब तक 110000 से अधिक राखी और मास्क समूह की महिलाओं ने बनाकर बेचा है। महिलाएं रक्षाबंधन पर्व के लिए राखी बनाने को आगे आई हैं।
विकास खंडों में राखी बनाने का कार्य किया। विकास खंड आराजी लाइन के ग्राम शहंशाहपुर में दुर्गावती, हरपुर में 3 महिला, विकासखंड काशी विद्यापीठ के ग्राम सूजाबाद व करौंदी में स्वयं सहायता समूह की 10-10 महिलाएं, विकासखंड पिण्डरा में पहलवान बाबा महिला ग्राम संगठन की 12 महिलाओं के समूह ने राखी बनाई।
इन्होंने कच्चा माल वाराणसी के बाजार से लाकर अपने गांव में राखियां बनाईं। समूह की महिलाएं राखियां को अपने ग्राम संगठन समूह व संकुल स्तर पर बेच रही हैं। कुछ महिलाओं ने दीदी समूह से ऋण लेकर परचून या जनरल स्टोर की दुकान खोली है। जिस महिला के पास अपनी स्वयं की दुकान है, वहीं पर राखी बेच रही हैं।