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राजवैद्य पं. शिवकुमार शास्त्री का निधन, मुलायम सिंह सहित कई नामचीन हस्तियां करातीं थी इलाज
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 09 Dec 2018 10:50 AM IST
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राजवैद्य पं. शिवकुमार शास्त्री
- फोटो : amar ujala
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समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के राजवैद्य पंडित शिव कुमार शास्त्री का 86 वर्ष की उम्र में शनिवार की शाम को वाराणसी में निधन हो गया। उनके निधन का समाचार सुनते ही पूरे वाराणसी में शोक की लहर दौड़ गई। उनके धन्वंतरि निवास पर शहर के गणमान्य लोग उनके अंतिम दर्शन हेतु एकत्रित हुए।
पंडित शिव कुमार शास्त्री एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे। वह पंडित मदन मोहन मालवीय के नाती थे। उनकी मुलायम सिंह के परिवार से बहुत घनिष्ठ मित्रता थी। मुलायम सिंह सहित उनके परिवार का घरेलू इलाज शिव कुमार की बनाई हुई आयुर्वेदिक दवाइयों से होता था।
बताते हैं कि स्वतंत्रता की लड़ाई के समय महात्मा गांधी सहित बहुत से क्रांतिकारी इनके घर आते जाते थे और स्वतंत्रता आंदोलन में इनका भी बहुत योगदान था। उनके निवास पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भी आ चुके हैं।
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साथ ही विभिन्न देशों के राजदूत इनके ख्याति को जानकर संगीत एवं आयुर्वेदिक इलाज के लिए हमेशा से आते थे। वात व्याधि एवं अमृतमहोत्सव उनकी लिखी दो पुस्तकें थी। शिव कुमार के पुत्र रामकुमार शास्त्री, नंदकुमार शास्त्री और समीर कुमार शास्त्री हैं। उनके घर मे स्थापित भगवान धन्वंतरि के दर्शन के लिए देश विदेश के श्रद्धालु आते हैं।
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पंडित शिव कुमार शास्त्री एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे। वह पंडित मदन मोहन मालवीय के नाती थे। उनकी मुलायम सिंह के परिवार से बहुत घनिष्ठ मित्रता थी। मुलायम सिंह सहित उनके परिवार का घरेलू इलाज शिव कुमार की बनाई हुई आयुर्वेदिक दवाइयों से होता था।
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बताते हैं कि स्वतंत्रता की लड़ाई के समय महात्मा गांधी सहित बहुत से क्रांतिकारी इनके घर आते जाते थे और स्वतंत्रता आंदोलन में इनका भी बहुत योगदान था। उनके निवास पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भी आ चुके हैं।
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साथ ही विभिन्न देशों के राजदूत इनके ख्याति को जानकर संगीत एवं आयुर्वेदिक इलाज के लिए हमेशा से आते थे। वात व्याधि एवं अमृतमहोत्सव उनकी लिखी दो पुस्तकें थी। शिव कुमार के पुत्र रामकुमार शास्त्री, नंदकुमार शास्त्री और समीर कुमार शास्त्री हैं। उनके घर मे स्थापित भगवान धन्वंतरि के दर्शन के लिए देश विदेश के श्रद्धालु आते हैं।
250 वर्षों से चली आ रही परंपरा
राजवैद्य पं. शिवकुमार शास्त्री आयुर्वेद के बड़े जानकारों में से एक थे। उन्होंने बीएचयू से अपनी शिक्षा-दीक्षा पूरी की। अंतरराष्ट्रीय स्तर के सितार वादक रहे पंडित शास्त्री वर्ष 1934 में ड्रामा की रिहर्सल किया करते थे। उन्होंने वर्ष 1952 में पहली बार ड्रामा प्ले किया था और फिर दो दर्जन से भी ज्यादा शो किए।
काशी के इस वैद्य का परिवार बीते 250 सालों से ज्यादा आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा को कायम रखे हुए है। 80 के दशक में चौधरी चरण सिंह के लिए मुलायम औषधि लेने राजवैद्य के पास आया करते थे। इसके बाद से उन्होंने पं. शास्त्री को अपना राजवैद्य मान लिया और किसी भी प्रकार की शारीरिक तकलीफ होने पर उनसे सलाह जरूर लेते थे।
काशी के इस वैद्य का परिवार बीते 250 सालों से ज्यादा आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा को कायम रखे हुए है। 80 के दशक में चौधरी चरण सिंह के लिए मुलायम औषधि लेने राजवैद्य के पास आया करते थे। इसके बाद से उन्होंने पं. शास्त्री को अपना राजवैद्य मान लिया और किसी भी प्रकार की शारीरिक तकलीफ होने पर उनसे सलाह जरूर लेते थे।