राजभाषा सम्मेलन: सीएम योगी बोले- भक्ति काल से आधुनिक काल तक हिंदी का प्रसार काशी से प्रेरित, मॉरिशस यात्रा का किया जिक्र
गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि रामचरितमानस सदियों से लोगों को जोड़ने का माध्यम रहा है।
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वाराणसी में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में बतौर विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भक्ति काल से लेकर आधुनिक काल तक हिंदी का प्रसार काशी से प्रेरित है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने यहीं से उद्घोष किया था, निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामचरितमानस सदियों से लोगों को जोड़ने का माध्यम रहा है। उन्होंने मॉरिशस यात्रा का जिक्र किया और कहा, वर्षों पहले भारत से गए श्रमिक रामचरितमानस को अपने साथ लेकर गए थे। वे उसे पढ़ नहीं पाते लेकिन उसकी पूजा करते हैं। चौपाइयों का वाचन करते हैं। यह उदाहरण है कि हमारी श्रवण परंपरा किस तरह से बढ़ती गई।
उन्होंने कहा कि जिस हिंदी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में आवाज दी और पीएम नरेंद्र मोदी ने आत्म अभिव्यक्ति की, उस राजभाषा का पहला सम्मेलन काशी में आयोजित होने से इसका महत्व और बढ़ जाता है। प्रदेश सरकार हिंदी में कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करती है। साहित्य के लिए विभिन्न पुरस्कार और सम्मान देती है।
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संयुक्त राष्ट्र संघ ने हिंदी को दी प्राथमिकता
अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्र ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी काफी काम हिंदी में आरंभ कर दिया है। उनके समाचार, ट्विटर और सोशल मीडिया एकाउंट हिंदी में हैं। सात वर्षों में हिंदी बोलने, लिखने और पढ़ने वालों की संख्या में व्यापक वृद्धि हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी को सरल कर रोजमर्रा के शब्दों को प्रयोग करने पर भी जोर दिया है। प्रत्येक भाषा के प्रचलित शब्दों को भी हिंदी में शामिल किया गया है। हिंदी का शब्द भंडार वैसे भी बहुत विशाल है, इसी कारण यह विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषाओं में से एक है।
भाषा के दम पर हुई क्रांति और आर्थिक विकास
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि आधुनिक काल में भाषा के जरिए ही क्रांति और आर्थिक विकास हुआ है। महात्मा गांधी से पहले देश एक डोर में नहीं जुड़ा था, लेकिन महात्मा गांधी ने हिंदी और लोक भाषा को चुना और इस माध्यम से जन आंदोलन किया।
उसी प्रकार 2014 के बाद इस देश के मनीषियों ने जो सपना देखा उस पर अपनी भाषा के माध्यम से काम अब हो रहा है। मॉडल टेक्नोलॉजी और नई शिक्षा नीति से देश में बदलाव आएगा। उन्होंने कहा, अपनी भाषा के विकास के बिना भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह नहीं बना सकता है।