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बाइक की बुकिंग से बढ़ा रेलवे का खजाना
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रेलवे स्टेशन स्थित पार्सल कार्यालय, बाहर रखा पार्सल।
- फोटो : MAU
मऊ। कोरोना संक्रमण के दौर में अपने तथा परिवार को सुरक्षित करने के लिए दोपहिया वाहनों से घर आए लोगों में से अधिकांश अब स्थिति सामान्य होने पर महानगरों की ओर रुख कर चुके है। ऐसी प्रवासियों ने ले जाने के लिए चार माह में 300 बाइकों की बुकिंग कराई है। इसके अलावा अपने परिजनों के साथ पूरा सामान लेकर आए लोगों ने भी वापस सामान भेजने के लिए रेलवे की इस सुविधा का लाभ उठाया है। इससे सुस्त पड़े रेलवे की पार्सल बुकिंग में अब तेजी दिखने लगी है और काफी हद तक राजस्व नुकसान की भरपाई हो रही है। बीते पांच माह में रेलवे को लगातार पार्सल बुकिंग से लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। यह स्थिति उस समय है जब 80 फीसदी ट्रेनों का संचालन बंद चल रहा है।
बीते अप्रैल माह में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए घोषित लॉकडाउन से महानगरों में काम करने वाले जिले के प्रवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। रोजगार छिन जाने, परिवार पर मंडरा रहे संक्रमण के खतरे को देख वह अपने खुद और परिवार को सुरक्षित करने के लिए बस, ट्रक, ऑटो, बाइक से अपने गृहनगर के लिए निकल पड़े थे। हजारों प्रवासी तो कोई साधन न मिलने पर पैदल ही अपनों के साथ रेलवे ट्रैक को रास्ता बनाकर निकले और कई दिनों की यात्रा कर अपने घर पर लौट आए। पिछले चार महीने से स्थिति सामान्य होने पर वह फिर गृहनगर से कर्मभूमि के लिए निकल पड़े हैं।
जनवरी तक जिले में आए 80 हजार के करीब प्रवासियों में अधिकांश सूरत, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद सहित अन्य महानगरों को लौट चुके है। इनमें से करीब 300 प्रवासी जो कोरोना काल में बाइक व स्कूटी से मऊ आ गए थे। उन्होंने वापस जाने के लिए अपना आरक्षण कराने के बाद बाइक को भी ले जाने के लिए बुकिंग कराई है। इसके अलावा अन्य घरेलू सामान की भी बुकिंग कराई है। इसके अलावा हैंडलूम साड़ियों की भी कई राज्यों के लिए काफी पार्सल बुक हुए हैं।
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लॉकडाउन के दौरान अप्रैल-मई में माल की बुकिंग शून्य रही। जून माह में ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद मुंबई, दिल्ली और सूरत के लिए बाइकें बुक होने लगीं। बीते चार माह में करीब 300 बाइकों को मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत आदि महानगरों को जानी वाली ट्रेनों में बुक कराया गया। इसके अलावा बड़ी मात्रा में यात्रियों ने अपने सामानों को भी बुकिंग से भेजा।
- शंकर प्रसाद, वाणिज्य अधीक्षक, रेलवे पार्सल, मऊ जंक्शन
संकट के दौर में भी आय में बीते वर्ष का तोड़ा रिकार्ड
मऊ जंक्शन से कोरोना संक्रमण से पूर्व 23 जोड़ी ट्रेनें चलती थी, इसमें प्रतिदिन दस हजार यात्री सफर करते थे। इससे रेलवे को प्रतिदिन दस लाख रुपये तक की आय होती थी। वर्तमान में कोरोना संक्रमण के चलते लिच्छवी, साबरमती, ताप्ती गंगा, सरयू-यमुना, चौरीचौरा, दादर, गोदान सहित केवल दस एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। जिससे रेलवे को एक से डेढ़ लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। हालांकि पार्सल बुकिंग सेवा रेलवे के लिए मुफीद साबित हो रही है।
बीते जनवरी माह में 1837 क्विंटल सामान दिल्ली, मुंबई, सूरत आदि महानगरों को भेजा गया। वहीं दिसंबर में 2315 क्विंटल सामान की बुकिंग हुई थी, जो बीते वर्ष के दिसंबर माह में हुई दो हजार क्विंटल बुकिंग से ज्यादा है। इसी तरह नवंबर माह में 1898 क्विंटल, अक्तूबर में 1002 क्विंटल बुकिंग हुई थी। रेलवे को इससे अक्तूबर में 3 लाख 99 हजार 671 रुपये, नवंबर में 8 लाख 3 हजार 160 रुपये, दिसंबर में 9 लाख 30 हजार 229 रुपये जबकि जनवरी में 7 लाख 39 हजार 79 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। रेलवे को पिछले तीन माह में हुई आय बीते वर्ष की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा है।
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बीते अप्रैल माह में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए घोषित लॉकडाउन से महानगरों में काम करने वाले जिले के प्रवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। रोजगार छिन जाने, परिवार पर मंडरा रहे संक्रमण के खतरे को देख वह अपने खुद और परिवार को सुरक्षित करने के लिए बस, ट्रक, ऑटो, बाइक से अपने गृहनगर के लिए निकल पड़े थे। हजारों प्रवासी तो कोई साधन न मिलने पर पैदल ही अपनों के साथ रेलवे ट्रैक को रास्ता बनाकर निकले और कई दिनों की यात्रा कर अपने घर पर लौट आए। पिछले चार महीने से स्थिति सामान्य होने पर वह फिर गृहनगर से कर्मभूमि के लिए निकल पड़े हैं।
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जनवरी तक जिले में आए 80 हजार के करीब प्रवासियों में अधिकांश सूरत, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद सहित अन्य महानगरों को लौट चुके है। इनमें से करीब 300 प्रवासी जो कोरोना काल में बाइक व स्कूटी से मऊ आ गए थे। उन्होंने वापस जाने के लिए अपना आरक्षण कराने के बाद बाइक को भी ले जाने के लिए बुकिंग कराई है। इसके अलावा अन्य घरेलू सामान की भी बुकिंग कराई है। इसके अलावा हैंडलूम साड़ियों की भी कई राज्यों के लिए काफी पार्सल बुक हुए हैं।
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लॉकडाउन के दौरान अप्रैल-मई में माल की बुकिंग शून्य रही। जून माह में ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद मुंबई, दिल्ली और सूरत के लिए बाइकें बुक होने लगीं। बीते चार माह में करीब 300 बाइकों को मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत आदि महानगरों को जानी वाली ट्रेनों में बुक कराया गया। इसके अलावा बड़ी मात्रा में यात्रियों ने अपने सामानों को भी बुकिंग से भेजा।
- शंकर प्रसाद, वाणिज्य अधीक्षक, रेलवे पार्सल, मऊ जंक्शन
संकट के दौर में भी आय में बीते वर्ष का तोड़ा रिकार्ड
मऊ जंक्शन से कोरोना संक्रमण से पूर्व 23 जोड़ी ट्रेनें चलती थी, इसमें प्रतिदिन दस हजार यात्री सफर करते थे। इससे रेलवे को प्रतिदिन दस लाख रुपये तक की आय होती थी। वर्तमान में कोरोना संक्रमण के चलते लिच्छवी, साबरमती, ताप्ती गंगा, सरयू-यमुना, चौरीचौरा, दादर, गोदान सहित केवल दस एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। जिससे रेलवे को एक से डेढ़ लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। हालांकि पार्सल बुकिंग सेवा रेलवे के लिए मुफीद साबित हो रही है।
बीते जनवरी माह में 1837 क्विंटल सामान दिल्ली, मुंबई, सूरत आदि महानगरों को भेजा गया। वहीं दिसंबर में 2315 क्विंटल सामान की बुकिंग हुई थी, जो बीते वर्ष के दिसंबर माह में हुई दो हजार क्विंटल बुकिंग से ज्यादा है। इसी तरह नवंबर माह में 1898 क्विंटल, अक्तूबर में 1002 क्विंटल बुकिंग हुई थी। रेलवे को इससे अक्तूबर में 3 लाख 99 हजार 671 रुपये, नवंबर में 8 लाख 3 हजार 160 रुपये, दिसंबर में 9 लाख 30 हजार 229 रुपये जबकि जनवरी में 7 लाख 39 हजार 79 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। रेलवे को पिछले तीन माह में हुई आय बीते वर्ष की तुलना में 40 फीसदी ज्यादा है।