{"_id":"5bbf44e8bdec224fca54c83c","slug":"purvanchal-people-escape-continue-from-gujrat-after-violence","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गुजरात से उत्तर भारतीयों का पलायन जारी, वाराणसी स्टेशन पर आंखें नम, जुबां से निकला दर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुजरात से उत्तर भारतीयों का पलायन जारी, वाराणसी स्टेशन पर आंखें नम, जुबां से निकला दर्द
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 11 Oct 2018 06:11 PM IST
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कांग्रेसियों ने साझा किया गुजरात से लौटे उत्तर भारतीयों का दर्द
- फोटो : amar ujala
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गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हमलों के बाद उधना एक्सप्रेस से लौटे पूर्वांचल और बिहार के लोगों से कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने कैंट रेलवे स्टेशन पर मुलाकात की। राय ने लोगों से वहां के हालात के बारे में जानकारी ली और ढाढस बंधाया। लौटने वालों ने बताया कि परिवार की सुरक्षा की चिंता ने उन्हें गुजरात छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
अहमदाबाद-पटना एक्सप्रेस से गुजरात से लौट रहे बिहार के मजदूरों से वहां के हालात पूछते ही उनकी आंखें छलक पड़ीं। जुबां दर्द बयां करने लगी। सीतामढ़ी के राजू ने बताया कि वह घरों में ही सुरक्षित थे। न तो उन्हें काम पर जाने दिया जा रहा था और न ही किसी और काम को करने दिया जा रहा था। रीना ने बताया कि घर की जरूरत का सामान भी बाजार से लेने नहीं जा पा रहे थे। खाने-पीने के लाले पड़ गए तब लौटे। राम मोहन और नीलम का कहना है कि जिनके साथ रोज का उठना बैठना था। अचानक उनके लिए हम पराए हो गए।
मधुबनी के निर्भय पासवान, आजमगढ़ के संजय राम व सीमा देवी, आरा के पप्पू पाल, मऊ के जयप्रकाश, गाजीपुर के देवेश पांडेय, आरा के एक परिवार की ही मुन्नी देवी, सारो देवी, चुनमुन साहब के अलावा दूसरे परिवार के सर्वेश तिवारी, रागिनी तिवारी और उनकी आठ साल की बच्ची सौम्या आदि ने पूर्व विधायक को अपनी व्यथा सुनाई। मुलाकात के बाद पूर्व विधायक ने कहा कि गुजरात से लौट रहे लोग काफी डरे हुए हैं।
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लोगों ने उन्हें बताया कि उत्तर भारतीयों को धमकियां मिल रही हैं कि वापस भागो, नहीं तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो। उधर, महानगर युवा कांग्रेस की ओर से दशाश्वमेध घाट पर आयोजित आचमन संकल्प सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घटना के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
अहमदाबाद-पटना एक्सप्रेस से गुजरात से लौट रहे बिहार के मजदूरों से वहां के हालात पूछते ही उनकी आंखें छलक पड़ीं। जुबां दर्द बयां करने लगी। सीतामढ़ी के राजू ने बताया कि वह घरों में ही सुरक्षित थे। न तो उन्हें काम पर जाने दिया जा रहा था और न ही किसी और काम को करने दिया जा रहा था। रीना ने बताया कि घर की जरूरत का सामान भी बाजार से लेने नहीं जा पा रहे थे। खाने-पीने के लाले पड़ गए तब लौटे। राम मोहन और नीलम का कहना है कि जिनके साथ रोज का उठना बैठना था। अचानक उनके लिए हम पराए हो गए।
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मधुबनी के निर्भय पासवान, आजमगढ़ के संजय राम व सीमा देवी, आरा के पप्पू पाल, मऊ के जयप्रकाश, गाजीपुर के देवेश पांडेय, आरा के एक परिवार की ही मुन्नी देवी, सारो देवी, चुनमुन साहब के अलावा दूसरे परिवार के सर्वेश तिवारी, रागिनी तिवारी और उनकी आठ साल की बच्ची सौम्या आदि ने पूर्व विधायक को अपनी व्यथा सुनाई। मुलाकात के बाद पूर्व विधायक ने कहा कि गुजरात से लौट रहे लोग काफी डरे हुए हैं।
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लोगों ने उन्हें बताया कि उत्तर भारतीयों को धमकियां मिल रही हैं कि वापस भागो, नहीं तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो। उधर, महानगर युवा कांग्रेस की ओर से दशाश्वमेध घाट पर आयोजित आचमन संकल्प सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घटना के लिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
बनारस के गुजराती समाज में बढ़ी चिंता
गुजरात में उत्तर भारतीयों के साथ हो रही घटनाओं से शहर में रहने वाले गुजराती समाज के लोग चिंतित हैं। उनका कहना है, वहां के हालात पर नियंत्रण के बावजूद सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई जा रही है। कहते हैं, गुजरात में लोग धर्म, वर्ग या नाम से नहीं, बल्कि अपने काम से जाने जाते हैं। हम जिस समाज में रहते हैं वहां एक-दूसरे के सहयोग से ही आगे बढ़ा जा सकता है। इस बीच काशी गुजराती समाज के अध्यक्ष अनिल शास्त्री ने मंगलवार को गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप भाई जडेजा से बातचीत कर वहां के हालात पर चर्चा की। उन्होंने गुजरात से उत्तर भारतीयों का पलायन रोकने का निवेदन भी किया।
शहर के चौखंभा, महमूरगंज, कर्णघंटा, श्रीनगर कॉलोनी (लक्सा), चंवर गलिया और नाटी इमली मुहल्लों में गुजराती समाज के लोग सैकड़ों साल से रह रहे हैं। 30 हजार से ज्यादा गुजराती यहां रहते हैं। 75 प्रतिशत लोग साड़ी व्यवसाय से जुड़े हैं। आभूषण, रियल इस्टेट और अन्य उत्पादन की इकाइयों में उनकी खासी हिस्सेदारी है। इनमें से कुछ लोगों से जब उत्तर भारतीयों पर हमले के मामले में बात की गई तो सभी ने विरोध में पोस्टर लगाने की निंदा करते हुए कहा कि हमें आशंका है कि ऐसे कृत्य से माहौल न बिगड़ जाए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अफवाहों पर नियंत्रण लगाया जाए। कहा, मजदूर तबका अफवाहों से डरकर ही गुजरात से पलायन कर रहा है।
बैजनत्था निवासी आलोक पारिख कहते हैं कि गुजरात में भी लोग वैसे ही रहते हैं जैसे हम काशी में। हर कोई मिल जुलकर काम करता है। वहीं सिगरा निवासी गोविंद नागर ने कहा, भारत का संविधान जब किसी को नहीं बांटता तो फिर इंसान यह कैसे कर सकता है। काशी गुजराती समाज के अध्यक्ष अनिल शास्त्री ने गुजरात में परिस्थितियां पहले जैसी हैं। केवल सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार किया जा रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए। काशी गुजराती समाज के सांस्कृतिक मंत्री नीरज पारिख ने कहा कि गुजरात में लोगों को काम से पहचाना जाता है। इस मुद्दे पर राजनीति करने वालों पर केंद्र और राज्य सरकार पैनी नजर रखे।
शहर के चौखंभा, महमूरगंज, कर्णघंटा, श्रीनगर कॉलोनी (लक्सा), चंवर गलिया और नाटी इमली मुहल्लों में गुजराती समाज के लोग सैकड़ों साल से रह रहे हैं। 30 हजार से ज्यादा गुजराती यहां रहते हैं। 75 प्रतिशत लोग साड़ी व्यवसाय से जुड़े हैं। आभूषण, रियल इस्टेट और अन्य उत्पादन की इकाइयों में उनकी खासी हिस्सेदारी है। इनमें से कुछ लोगों से जब उत्तर भारतीयों पर हमले के मामले में बात की गई तो सभी ने विरोध में पोस्टर लगाने की निंदा करते हुए कहा कि हमें आशंका है कि ऐसे कृत्य से माहौल न बिगड़ जाए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि अफवाहों पर नियंत्रण लगाया जाए। कहा, मजदूर तबका अफवाहों से डरकर ही गुजरात से पलायन कर रहा है।
बैजनत्था निवासी आलोक पारिख कहते हैं कि गुजरात में भी लोग वैसे ही रहते हैं जैसे हम काशी में। हर कोई मिल जुलकर काम करता है। वहीं सिगरा निवासी गोविंद नागर ने कहा, भारत का संविधान जब किसी को नहीं बांटता तो फिर इंसान यह कैसे कर सकता है। काशी गुजराती समाज के अध्यक्ष अनिल शास्त्री ने गुजरात में परिस्थितियां पहले जैसी हैं। केवल सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार किया जा रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए। काशी गुजराती समाज के सांस्कृतिक मंत्री नीरज पारिख ने कहा कि गुजरात में लोगों को काम से पहचाना जाता है। इस मुद्दे पर राजनीति करने वालों पर केंद्र और राज्य सरकार पैनी नजर रखे।
नरेन्द्र मोदी काशी छोड़ो अभियान चलाएगी कांग्रेस
गुजरात में उत्तर भारतीयों के विरूद्ध हिंसा और उनके पलायन की घटनाओं को लेकर कांग्रेसजनों ने लहुरावीर स्थित आजाद प्रतिमा पार्क में मंगलवार को धरना दिया । कांग्रेसियों ने कहा कि जिस उत्तर भारतियों ने नरेन्द्र मोदी को सांसद चुना वहां के लोगों के साथ इस तरह का बर्ताव हो रहा है। लेकिन काशी इस क्षेत्रवादी आक्रामकता को सहन नहीं करेगी और यदि भाजपा शासित गुजरात में उत्तर भारतीय विरोधी हिंसा पर तत्काल अंकुश नहीं लगा तो तो कांग्रेस नरेन्द्र मोदी काशी छोड़ो सत्याग्रह चलायेगी।
धरना स्थल पर सभा में पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि काशी के गुजराती हमारे हैं, लेकिन पीएम का कांग्रेसी काशी में खुला विरोध करेंगे। इसमें संप्रदायवाद के बाद क्षेत्रवाद पर बांटने की इस राजनीति का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
पूर्व विधायक अजय राय ने कहाकि भाजपा राज में गुजरात की ताजा शर्मनाक घटनाओं ने बाध्य किया है कि हम नरेंद्र मोदी काशी छोड़ो सत्याग्रह चलाएुंगे। गुजरात की हिंसा देश को बांटने और आर्थिक क्षेत्रवाद पर लोगों को लड़ाने के लिए है।
धरना स्थल पर सभा में पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि काशी के गुजराती हमारे हैं, लेकिन पीएम का कांग्रेसी काशी में खुला विरोध करेंगे। इसमें संप्रदायवाद के बाद क्षेत्रवाद पर बांटने की इस राजनीति का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
पूर्व विधायक अजय राय ने कहाकि भाजपा राज में गुजरात की ताजा शर्मनाक घटनाओं ने बाध्य किया है कि हम नरेंद्र मोदी काशी छोड़ो सत्याग्रह चलाएुंगे। गुजरात की हिंसा देश को बांटने और आर्थिक क्षेत्रवाद पर लोगों को लड़ाने के लिए है।
भड़काऊ चेतावनी वाले पोस्टर लगाए
गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हमले से बिगड़े माहौल के बीच बीते मंगलवार को शहर में भड़काऊ पोस्टर लगाए गए। अचानक सामने आए यूपी बिहार एकता मंच के हवाले से लगे सिगरा क्षेत्र में पोस्टर पर गुजरात और महाराष्ट्र के लोगों को चेतावनी दी गई है। माहौल बिगाड़ने की कोशिश में जुटे लोगों की शिनाख्त में खुफिया इकाइयां सक्रिय हो गई हैं। एसपी सिटी दिनेश सिंह का कहना है कि पोस्टर लगाने वालों की पहचान कर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। वैसे बताया जा रहा है कि संस्था में काशी विद्यापीठ से जुडे़ पूर्व छात्रनेता और अधिवक्ता शामिल हैं।