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Varanasi News: दिखने में आकर्षक और अत्यंत सस्ते होते हैं प्रिंटेड कालीन
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भदोही। साड़ी की तरह अब छपाई से कालीन तैयार किए जा रहे हैं।। यह तकनीक पानीपत (हरियाणा) में तीन वर्ष से इस्तेमाल हो रही है लेकिन भदोही में अब जाकर इसकी शुरुआत हो रही है। दुनिया में सस्ते कालीन मांग के चलते इस तकनीक से ज्यादा गलीचे बनाए जा रहे हैं। प्रिंटेड कालीन हैंडनॉटेड गलीचों की तुलना में 60 प्रतिशत तक सस्ते होते हैं।
भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के प्रयोगशाला प्रभारी दिपांकर जना ने बताया कि भदोही अधिकतर हाथ से कालीन पर प्रिंटिंग की जा रही है। पालीएस्टर, सूती, ऊनी, जूट, विस्कोस आदि धागों से बनने वाले कालीन पर प्रिंटिंग आसानी से हो जाती है। जिस प्रकार से साड़ियों में अथवा कपड़ों पर प्रिंटिंग का दौर पहले से चल रहा वही प्रयोग अब कालीन में भी देखने को मिल रहा है। कालीनों की केलिम, लीची और छोटी-छोटी अन्य डिजाइन प्रिंट के माध्यम से बहुत सुंदर ढंग से बनाई जा सकती हैं। भदोही में भी उच्च स्तरीय प्रिंटिंग मशीन से काम शुरू हो चुका है। प्रिंट में अभी बहुत सुधार किया जाना है लेकिन इतना जरूर है कि आने वाले दिन ऐसे कालीनों के हैं।
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प्रिंटेड कालीन आकर्षक होते हैं। प्रिंटिंग का कमाल है कि कालीनों पर महात्मा गांधी, सरदार पटेल जैसे महापुरुषों के चित्र वाले कालीन बनने लगे हैं। यह स्क्रीन प्रिंटिंग जितना आसान भी है। जिनके पास प्रिंटिंग विधा है वे बिना निवेश के यह काम आसानी से कर सकते हैं। डा.राजीव कुमार वार्ष्णेय, निदेशक आईआईसीटी
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हैंडनाटेड, टफ्टेड, इंडो-नेपाली हो या दरी ये एकदम से खत्म नहीं हो सकते। यह कहा जा सकता है कि प्रिंटेड कालीन झट से तैयार हो जाते हैं। सस्ते और आकर्षक भी होते हैं। जिन्हें सस्ते कालीन चाहिए वे प्रिंटेड कालीन अपना सकते हैं। वैभव बरनवाल, कारोबारी (फोटो-16)
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मैने बहुत पहले प्रिंटेड कालीनों का कारोबार शुरू किया था। लेकिन प्रिंटेड कालीन हैंडनाटेड के मुकाबले कहीं नहीं ठहरते। इतना जरूर है कि प्रिंटेड कालीन भी दूसरे कालीनों की तरह बाजार में रहेंगे। ये सस्ते होने के चलते पसंद किए जा सकते हैं। अरशद वजीरी, कारोबारी (फोटो-17)
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भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के प्रयोगशाला प्रभारी दिपांकर जना ने बताया कि भदोही अधिकतर हाथ से कालीन पर प्रिंटिंग की जा रही है। पालीएस्टर, सूती, ऊनी, जूट, विस्कोस आदि धागों से बनने वाले कालीन पर प्रिंटिंग आसानी से हो जाती है। जिस प्रकार से साड़ियों में अथवा कपड़ों पर प्रिंटिंग का दौर पहले से चल रहा वही प्रयोग अब कालीन में भी देखने को मिल रहा है। कालीनों की केलिम, लीची और छोटी-छोटी अन्य डिजाइन प्रिंट के माध्यम से बहुत सुंदर ढंग से बनाई जा सकती हैं। भदोही में भी उच्च स्तरीय प्रिंटिंग मशीन से काम शुरू हो चुका है। प्रिंट में अभी बहुत सुधार किया जाना है लेकिन इतना जरूर है कि आने वाले दिन ऐसे कालीनों के हैं।
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प्रिंटेड कालीन आकर्षक होते हैं। प्रिंटिंग का कमाल है कि कालीनों पर महात्मा गांधी, सरदार पटेल जैसे महापुरुषों के चित्र वाले कालीन बनने लगे हैं। यह स्क्रीन प्रिंटिंग जितना आसान भी है। जिनके पास प्रिंटिंग विधा है वे बिना निवेश के यह काम आसानी से कर सकते हैं। डा.राजीव कुमार वार्ष्णेय, निदेशक आईआईसीटी
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हैंडनाटेड, टफ्टेड, इंडो-नेपाली हो या दरी ये एकदम से खत्म नहीं हो सकते। यह कहा जा सकता है कि प्रिंटेड कालीन झट से तैयार हो जाते हैं। सस्ते और आकर्षक भी होते हैं। जिन्हें सस्ते कालीन चाहिए वे प्रिंटेड कालीन अपना सकते हैं। वैभव बरनवाल, कारोबारी (फोटो-16)
मैने बहुत पहले प्रिंटेड कालीनों का कारोबार शुरू किया था। लेकिन प्रिंटेड कालीन हैंडनाटेड के मुकाबले कहीं नहीं ठहरते। इतना जरूर है कि प्रिंटेड कालीन भी दूसरे कालीनों की तरह बाजार में रहेंगे। ये सस्ते होने के चलते पसंद किए जा सकते हैं। अरशद वजीरी, कारोबारी (फोटो-17)