{"_id":"5e0f72508ebc3e880072a2e9","slug":"prevented-interviewing-of-hindi-speaking-candidates-for-assistant-professor-at-bhu","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए हिन्दी भाषी अभ्यर्थियों को इंटरव्यू देने से रोका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए हिन्दी भाषी अभ्यर्थियों को इंटरव्यू देने से रोका
Fri, 03 Jan 2020 10:26 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 03 Jan 2020 10:26 PM IST
विज्ञापन
बीएचयू
- फोटो : bhu student varanasi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शुक्रवार को साक्षात्कार के दौरान हिंदी भाषी प्रतिभागियों ने भेदभाव का आरोप लगाया। अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कुलपति पर मौलिक अधिकार और मानवाधिकार हनन का भी आरोप लगाया।
विज्ञापन
अभ्यर्थियों का कहना था कि कुलपति ने हिंदी भाषी अभ्यर्थियों को अधिकतम तीन से चार मिनट में साक्षात्कार कक्ष से बाहर निकाल दिया। कुलपति के इस व्यवहार से हिंदी भाषी अभ्यर्थियों में न सिर्फ गुस्सा है, बल्कि वह स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
विज्ञापन
शुक्रवार को होलकर भवन में प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर साक्षात्कार का आयोजन किया गया था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुलपति ने उनको हिंदी भाषा में साक्षात्कार देने से रोक दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में साक्षात्कार की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि कला संकाय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में लगभग 95 फीसदी छात्र हिंदी भाषी हैं।
विज्ञापन
अभ्यर्थी डॉ. कर्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने कुलपति से इस पर आपित्त दर्ज कराई। बावजूद इसके कुलपति ने सिर्फ अंग्रेजी में साक्षात्कार का दबाव बनाया बल्कि मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। डॉ. कर्ण कुमार ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 अभिव्यक्ति की आजादी के तहत यह अधिकार देता है कि वो किसी भी भाषा में अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत कर सकते हैं।
इतना ही नहीं यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट के आर्टिकल-2 में स्पष्ट उल्लेख है कि किसी भी व्यक्ति को भाषा, धर्म, लिंग इत्यादि के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता है। इस संदर्भ में जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि बीएचयू के अभ्यर्थियों को अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी है। साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के आरोप के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।