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वाराणसी में बोले कथावाचक प्रदीप मिश्र : निंदक, नकली और नास्तिक से दूरी बनाएं, कथा में पहुंचे 3.5 लाख श्रद्धालु

Sat, 23 Nov 2024 08:37 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 23 Nov 2024 08:37 PM IST
सार

Varanasi News : वाराणसी के डोमरी में आयोजित शिवमहापुराण कथा में लाखों भक्तों का जमावड़ा प्रतिदिन हो रहा है। भक्तों ने कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्र का जयघोष किया। कथा के दाैरान सनातन परंपरा की विशेषताएं भी बताई गईं।

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Pradeep Mishra said in Varanasi Keep distance from slanderers atheists 4 lakh devotees reached
कथावाचक प्रदीप मिश्र ने सुनाई कथा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्र ने कहा कि केवल हृदय से शिवतत्व को जो भज लेता है वह उनका हो जाता है। निंदक, नकली और नास्तिक इन तीनों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। शिवमहापुराण की कथा कहती है कि निंदक, नास्तिक और नकली भगवान शिव को प्रिय नहीं हैं। भगवान शिव को असली ही प्रिय हैं। असलियत का जीवन जीना कठिन, नकली जीवन जीना सरल। 

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वह श्री सतुआ बाबा गोशाला डोमरी में शिवमहापुराण की कथा के तीसरे दिन भगवान शिव की महिमा का वर्णन कर रहे थे। पं. प्रदीप मिश्र ने कहा कि शिवमहापुराण के अनुसार मंदिर के शिखर दर्शन से समस्त पापों का नाश हो जाता है। आज तक किसी ने नहीं कहा कि ताजमहल के दर्शन करो तो पाप मिट जाएंगे क्योंकि दुनिया के लोग ताजमहल देखने जाते हैं। देखने और दर्शन में अंतर होता है। देखने के लिए ताजमहल जाते हैं और दर्शन के लिए विश्वनाथ आते हैं। विश्वनाथ की धरा पर शिखर के दर्शन, मणिकर्णिका के दर्शन करने से आसिक्त, तृष्णा सब दूर हो जाती है। 

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भक्तों ने लगाए जयकारे
उन्होंने कहा कि निंदा करने वाला पापी होता है और निंदा सुनने वाला महापापी। शिव की निंदा करने के कारण नारद का बंदर मुख हुआ और निंदा सुनने के कारण भगवान विष्णु को हयग्रीव अवतार लेना पड़ा। शिव की निंदा करने वाला और सुनने वाला एक बार नहीं कई बार पशुओं का जन्म लेता है और जब थक जाता है तो किसी शिवालय में श्वान का जन्म लेकर रहता है। अगर कोई शिव की, राम की, कृष्ण की और शिवमहापुराण की निंदा करे, शिवभक्त की निंदा करे तो वहां से चल दें। निंदा नहीं सुननी है।

पं. मिश्र ने कहा कि महादेव ऋषि मुनि, साधक और तपस्वी का सम्मान करना सिखाते हैं। शिव महापुराण में किसी देवी देवता की निंदा नहीं है। कहा कि दूर कहीं बड़े मंदिर में जाने की आवश्यकता नहीं है। यदि आपके आसपास भी कोई छोटा मंदिर हो तो वहां भी आप जाकर एक लोटा जल चढ़ाना प्रारंभ कर सकते हैं। इस दौरान महामंडलेश्वर संतोष दास, संजय केसरी, संदीप केसरी, नीरज केसरी, संजय माहेश्वरी उपस्थित रहे।

Pradeep Mishra said in Varanasi Keep distance from slanderers atheists 4 lakh devotees reached
श्री सतुआ बाबा गोशाला डोमरी में जुटे लोग। - फोटो : अमर उजाला

कमजोर व्यक्ति पर ध्यान देना असली शिव तत्व
पं. मिश्र ने कहा कि भगवान शिव ने प्रेरणा दी है कि छोटे काे लेकर ऊपर बढ़ना, छोटे से छोटे व्यक्ति को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। छोटों को साथ लेकर आगे बढ़ो यह हमेशा काम आएगा। बड़े एक दिन छूट जाएंगे। कमजोर से कमजोर व्यक्ति पर ध्यान देना ही असली शिव तत्व है।

पं. मिश्र ने कहा कि सबसे ज्यादा अक्ल क्रोध में होती है। क्रोध हमेशा कमजोर व्यक्ति पर आता है, कभी दमदार व्यक्ति पर नहीं आएगा। इसलिए क्रोध में अक्ल बहुत होती है। वह कभी बलवान से नहीं भिड़ता। परिवार में यदि कोई ऐसा है जो भजन नहीं करता, भगवान को नहीं मानता तो उसे भी साथ लेकर चलिए। 

बेलपत्र को सदैव सम्मान दें, यह भगवान भोले को अति प्रिय है
पं. मिश्र ने लोगों से अनुरोध किया कि आप जब विश्वनाथजी के दर्शन के लिए मंदिर जाएं और बीच रास्ते में मंदिर में कहीं बेलपत्र गिरा हो तो उसके ऊपर पैर कभी ना रखें। उसे उठाकर कहीं किनारे रख दें। वापस पूजा करके आने के बाद उसको उचित स्थान पर प्रवाह करें क्योंकि बेलपत्र भगवान शिव को अति प्रिय है। ऐसा करने से आपको शिवलिंग पर चढ़ाए गए बेलपत्र से अधिक पुण्य मिलेगा। कहा कि बेलपत्र, रुद्राक्ष और तुलसीदल व माला कभी अशुद्ध नहीं होते हैं। 

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संतोष दास ने श्रद्धालुओं से मांगी माफी
कथा के आयोजक महामंडलेश्वर सतोष दास ने शिवमहापुराण की कथा शुरू होने से पहले सभी कथा सुनने वालों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि कथा स्थल पर होने वाली सारी असुविधा के लिए वह दोषी हैं। मैं आपकी भक्ति को प्रणाम करता हूं और आप सभी से हाथ जोड़कर क्षमा भी मांगता हूं।

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