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Banaras Lit Fest: उसकी मर्जी के बिना पेड़ का पत्ता भी नहीं हिलता तो मैं किसकी मर्जी से स्मगलिंग कर रहा हूं...

Mon, 12 Feb 2024 12:33 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी
माई सिटी रिपोर्टर, वाराणसी Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Mon, 12 Feb 2024 12:33 PM IST
सार

बनारस लिट फेस्ट के दूसरे दिन कविता पाठ के साथ ही परिचर्चा का आयोजन हुआ।  

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Poetry recitation as well as discussion organized on the second day of Banaras Lit Fest
प्रख्यात कार्टूनिस्ट आबिद सुरती ढब्बूजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रख्यात कार्टूनिस्ट आबिद सुरती ढब्बूजी ने कहा कि बड़ा सिंपल स्लोगन है मेरा कि जानकर चलो, मानकर मत चलो। सूफी लिखने की कई वजह थी। इसमें जिस गैंगेस्टर की कहानी वह मेरा क्लासमेट था। वह मेरी तरह ही खोली में रहता था। पढ़ाई के बाद हम लोगों के रास्ते अलग हो गए। जब मैं डोंगरी से बांद्रा रहने गया तो वह भी वहां रहने के लिए आया। सूफी की थीम है कि वह गैंगेस्टर खुदा को मानता था।

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बनारस लिट फेस्ट में अपने संस्मरण को साझा करते हुए ढब्बूजी ने कहा कि सूफी में मैं भी मुसलमान और पात्र इकबाल भी मुसलमान है। हालांकि वो उपन्यास नहीं है, लेकिन उपन्यास की शैली में लिखा गया है। उसमें जो दो पात्र हैं, एक तो मेरे नाम से ही है और दूसरा जो है, इकबाल उसका भी वही असली नाम है। मैं भी फुटपाथ पर सोने जाता था रात में और वह भी क्योंकि हम दोनों के पास एक छोटी सी खोली थी। यह 1947 के आस- पास का समय था जब हम लोग माइग्रेट करके पाकिस्तान जाने के लिए बंबई आए थे। वो फुटपाथ पर खट्टी- मीठी गोलियां बेचता था। मैं भी उसी तरह का कुछ बेचता था। वो जिस स्कूल में जाता था मैं भी उसी स्कूल में जाता था। वो जिस मस्जिद में नमाज पढ़ने जाता था मैं भी उसी मस्जिद में जाता था। 
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जब हम लोगों की राहें अलग हुईं तो वो अंडरवर्ल्ड में चला गया और मैं लिटरेचर में, आर्ट में आगे बढ़ गया तो उसकी वजह क्या थी? अच्छा वो , इकबाल पक्का मुसलमान था, कट्टर नहीं! तो वो पांच वक्त की नमाज पढ़ना, कुरान की मीनिंग वो पूरी जानता था। यूँ कह सकते हैं कि अथॉरिटी था । ओशो को भी कोट करता था। वो दूसरी दिशा में जा रहा था और मैं दूसरी। वो जा रहा था इस्लाम की दिशा में और मैं कह रहा था कि जो कुछ मैं कर रहा हूं उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं और वो कहता था कि जो कुछ मैं कर रहा हूं उसके लिए ऊपरवाला जिम्मेदार है। फिर वो कुरान का हवाला देता है। जिसने दाऊद इब्राहिम को ट्रेंड किया था, वो कहता है कि कुरान शरीफ में लिखा है कि उसकी मर्जी के बिना पेड़ का पत्ता भी नहीं हिलता है तो मैं किसकी मर्जी से कर रहा हूं सारा, सब उसी की मर्जी है। वो चाहता तो मुझे भी तुम्हारे रास्ते पर आगे बढ़ा देता। मिक्की माउस ने मुझे इंस्पायर किया तब मेरी उम्र छह साल की थी।
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इसके पूर्व विश्व एकत्व का मूल पर प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. राजेश्वर आचार्य, प्रो. सदानंद शाही ने विचार व्यक्त किए। साहित्य लोकतंत्र एवं राष्ट्रवाद पर ओम थानवी, ब्रदी नारायण ने विचार व्यक्त किए। रविवार को दूसरे दिन के सत्र की शुरूआत बहुभाषी कविता पाठ से हुआ। इसमें बद्री नारायण, राज्य सभा सांसद महुआ माझी, उदय नारायण सिंह ने कविता पाठ किया।

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