बैंक प्रबंधक हत्याकांडः जब 50 लाख लूटने की थी योजना तो 27 लाख छोड़कर क्यों भागे बदमाश? सरगना अब भी फरार
वाराणसी पुलिस ने बैंक प्रबंधक हत्याकांड का खुलासा तो कर दिया लेकिन यह किसी के गले नहीं उतर रहा है कि जब बदमाशों ने लूट की नीयत से ही हत्या की तो 27 लाख रुपये से भरा दूसरा थैला क्यों छोड़ कर भागे।
विस्तार
वाराणसी के करखियांव स्थित पीएनबी शाखा प्रबंधक की बीते नौ जून को गोली मारकर हत्या और लूट की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, शाखा प्रबंधक फूलचंद राम की हत्या चलती गाड़ी में लूट का विरोध करने पर की गई थी। हत्याकांड में शामिल दो गैंग के 11 बदमाशों ने वारदात को अंजाम देने के लिए बैंक प्रबंधक को सीएसआर फंड ट्रांजेक्शन के नाम पर पैसे को दोगुना करने का लालच दिया था।
पुलिस ने बैंक प्रबंधक हत्याकांड का खुलासा तो कर दिया लेकिन यह किसी के गले नहीं उतर रहा है कि जब बदमाशों ने लूट की नीयत से ही हत्या की तो 27 लाख रुपये से भरा दूसरा थैला क्यों छोड़ कर भागे। क्यों सिर्फ 20 लाख ही लेकर भागे? पुलिस की कहानी में झोल इसलिए भी है कि गिरोह के सभी सदस्यों की कई बार होटलों में बैठक हुई।
ऐसे में आजमगढ़ निवासी मास्टर माइंड आलोक राय के साथ रहने वाले चार युवक भी बैठक में हिस्सा लेते रहे। पुलिस के अनुसार हत्या के बाद सभी भाग निकले। मगर, पकड़े गए अतुल सिंह, मुकेश पाल, सुनील और संजय को उन चारों का नाम व पता मालूम नहीं।
संदहा में रची गई थी हत्या की साजिश
आईजी रेंज एसके भगत ने बताया कि षडयंत्र के तहत रमईपुर पिंडरा के अतुल विश्वकर्मा के यहां सभी की बैठक हुई थी। अतुल सिंह व अतुल विश्वकर्मा के कहने पर ड्राइवर संजय पटेल और प्रबंधक के खास आदमी सुनील ने बैंक मैनेजर को इस योजना में शामिल किया। सीएसआर फंड के माहिर अतुल सिंह ने बताया था कि इस योजना के लिए एक अन्य पार्टी की जरूरत होगी।
मुकेश पाल ने एक अन्य पार्टी को तैयार करने का जिम्मा लिया, इसी कार्य के लिए होटल चंद्रा इन में आठ जून की दोपहर लहरतारा निवासी आदर्श श्रीवास्तव उर्फ शिवा और मास्टर माइंड आलोक राय के साथ बैठक हुई थी। जबकि घटना वाले दिन मुकेश और आलोक के बीच संदहा में अलग से बैठक हुई और लूट के बाद हत्या की योजना बनी थी।
तीन जिलों की टीमों ने आरोपियों को खोजा
इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज पुलिस को खंगालनी पड़ी। आरोपियों की तलाश के लिए बनारस के साथ ही भदोही, गाजीपुर की स्वाट टीमों का सहारा लेना पड़ा। एसपी ग्रामीण अमित वर्मा ने बताया कि आलोक राय इस पूरे गिरोह का सरगना व मास्टर माइंड है। जिसकी साजिश से अतुल सिंह, मुकेश पाल, शिवा, संजय कुमार पटेल, अतुल विश्वकर्मा और सुनील पटेल व चार अज्ञात ने घटना को अंजाम दिया।
कोड में करते थे बात
पुलिस को शुरूआत में यह समझने में बहुत झेलना पड़ा। क्योंकि मोबाइल पर सभी कोड में बात करते थे। एक करोड़ के लिए एक सिक्का, दाना और तरह-तरह के नामों का उपयोग करते थे। यह सब स्वाट की जांच में सामने आया।
गिरफ्तार आरोपियों की संपत्ति की होगी जांच
एडीजी जोन बृजभूषण ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की संपत्ति की भी जांच कराई जाएगी। जांच में अपराध से संपत्ति अर्जित करने की बात सामने आई तो जब्त की जाएगी। पीएनबी के डीजीएम प्रमोद कुमार रंजन ने बताया कि कैशियर राहुल कुमार को निलंबित कर दिया गया है।
लोभ..लालच...हत्या..एक नजर में पूरी साजिश
बैंक प्रबंधक फूलचंद्र राम की हत्या और लूट में शामिल बदमाशों ने फर्जी मैसेज के जरिए उनकी रकम हड़पने की साजिश रची थी। बैंक प्रबंधक को सीएसआर फंड ट्रांजेक्शन कराने का झांसा देकर 50 लाख रुपये लेकर बुलाया गया था। कहा गया था 50 लाख रुपये देने पर एक करोड़ रुपये मिलेंगे। गिरोह के शातिर बैंक प्रबंधक से कैश लेते और उन्हें मोबाइल पर फर्जी मैसेज एक करोड़ खाते में क्रेडिट का भेजते।
जब तब प्रबंधक इसकी तस्दीक करते जब तक आरोपी 50 लाख रुपये लेकर फरार हो जाते। लूट की रकम आपस में सभी बांटते। आरोपियों के बताए हुए पते पर प्रबंधक कैश लेकर पहुंचे और आमने-सामने बातचीत हुई तो प्रबंधक को दाल में कुछ काला लगा और वहीं से उन्होंने बैंक लौटने की जिद की। मामला बिगड़ता देख अपराधियों ने हत्या कर कैश लूट लिया।
सीएसआर फंड ट्रांजेक्शन के मास्टर माइंड सोनभद्र में रेल कर्मी पिंडरा निवासी अतुल सिंह, जालसाजी में बड़ागांव का मुकेश पाल और लूट की वारदात को अंजाम देने वाले आजमगढ़ के आलोक राय ने साजिश की। इसमें बैंक प्रबंधक के करीबी सुनील पटेल और उसका साथी ड्राइवर संजय पटेल को इस पूरी साजिश में शामिल किया।
इन सभी को भी दो-दो लाख रुपये देने का वादा किया गया था। सोनभद्र के रेलकर्मी अतुल सिंह और सुनील पटेल, संजय पटेल व दो अन्य को यह नहीं पता था कि रकम लूटने के बाद बैंक प्रबंधक की हत्या कर दी जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जौनपुर के मड़ियाहू ब्रांच से 41 लाख रुपये अंडर ट्रांजेक्शन के तहत बैंक प्रबंधक ने अपनी करखियांव शाखा के लिए लिया था और बिना किसी सुरक्षा के निकले। इसके बाद इन्हें नौ लाख की और आवश्यकता थी तो करखियांव ब्रांच आए और यहां बैंक में पड़े छह लाख रुपये बगैर किसी वाउचर के कैशियर पर दबाव बनवाकर निकाला। इस दौरान सुनील पटेल बैंक प्रबंधक के साथ ही था।