पीएम मोदी के वो संदेश: काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण बाद संबोधन में लोगों से मांगे तीन संकल्प, जानें क्या हैं वो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा विश्वनाथ धाम का लोकार्पण के बाद लोगों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ संबोधन की शुरुआत की। संबोधन में लोगों को तीन संदेश दिए और तीन संकल्पों को निभाने की अपील की।
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काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से तीन संकल्प मांगे और इसके जरिए तीन बड़े संदेश भी दिए। पीएम के तीन संकल्पों के मायने हैं।
स्वच्छता: पीएम ने स्वच्छता को अनुशासन बताया। उन्होंने कहा कि भारत कितना भी आगे बढ़ जाए, लेकिन स्वच्छ नहीं रहेगा तो आगे बढ़ना मुश्किल होगा। इस दिशा में हमने बहुत किया, लेकिन हमें अपने प्रयासों को और आगे बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए कर्तव्य की भावना के साथ छोटे से प्रयास से देश को काफी मदद मिलेगी। बनारस में हमें स्वच्छता को नए स्तर पर ले जाना है।
सृजन: पीएम ने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड ने हमें ऐसा तोड़ा कि हम अपनी सृजनता भूल गए। पूरे आत्मविश्वास के साथ सृजन करिए। इनोवेट करिए, इनोवेटिव तरीके से करिए। जो युवा कोरोना के मुश्किल काल में सैकड़ों स्टार्ट अप बना सकता है, वह कुछ भी कर सकता है। हर भारतीय जहां भी है, देश के लिए कुछ ना करने का प्रयास करे। तभी नए मार्ग मिलेंगे।
आत्मनिर्भर भारत के लिए निरंतर प्रयास: लोकल फॉर वोकल की अपील करते हुए पीएम ने कहा कि हम अभी आजादी के अमृत काल में हैं। हमें यह सोचना होगा कि जब भारत सौ साल की आजादी का उत्सव मनाएगा, तब भारत कैसे देश में बनी चीजों पर गर्व करेगा। ऐसी चीजों को ढूंढ़ें, जिसमें किसी भारतीय का पसीना लगा हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को वाराणसी पहुंचे। इसके बाद सीधे वो काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे। काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण करने के लिए क्रूज से ललिता घाट पहुंचकर गंगा में डुबकी लगाने पहुंचे। जहां उन्होंने गंगा स्नान किया और सूर्य नमस्कार किया। डुबकी लगाने के बाद गंगाजल लेकर काशी विश्वनाथ धाम में प्रवेश किया। बाबा विश्वनाथ की पूजा करने के बाद उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया।