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पीएम मोदी की योजना की रफ्तार उनके ही संसदीय क्षेत्र में धीमी, जानिए क्यों

Thu, 08 Jun 2017 10:56 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 08 Jun 2017 10:56 AM IST
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pm modi dream project speed is slow in varanasi
रामनगर में निर्माणाधीन टर्मिनल - फोटो : अमर उजाला
पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के रामनगर स्थित राल्हूपुर में तैयार हो रहे मल्टी मॉडल टर्मिनल को जिउनाथपुर रेल लाइन से जोड़ने में फंसा जमीन अधिग्रहण का पेंच जिलाधिकारी भी दूर नही कर पा रहे हैं। अभी तक यह समस्या दूर नही हो सकी है। इसकी वजह से प्रधानमंत्री के इस योजना की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
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वाराणसी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईडब्ल्यूएआई(इनलैंड वाटरवेज अथारिटी ऑफ इंडिया)के साथ जलपरिवहन को लेकर लगभग डेढ़ घंटे तक बैठक की थी।
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इस दौरान गंगा में 1620 किलोमीटर  लंबे इलाहाबाद से हल्दिया के बीच विकसित किए जा रहे जलमार्ग के अंतर्गत वाराणसी में आ रही समस्याओं पर चर्चा हुई थी। इसमें कछुआ सेंक्चुअरी और जमीन अधिग्रहण का मुद्दा प्रमुख था।
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कछुआ सेंक्चुअरी की समस्या तो काफी हद तक समाप्त हो गई। जबकि बैठक में जमीन अधिग्रहण का मुद्दा जल्द दूर करने के दावे के बावजूद जिलाधिकारी अभी तक यह मुद्दा नही सुलझा सके हैं। आलम यह है कि यह योजना प्रभावित हो रही है।

बता दें कि राल्हूपुर से जिउनाथपुर को रेल लाइन से जोड़ने के लिए लगभग 30 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। लगभग 22 हेक्टेयर जमीन का ज्यादातर हिस्सा अधिग्रहीत हो चुका है और कुछ प्रक्रिया में है। जबकि एक भूस्वामी का आठ हेक्टेयर का पेंच अभी भी जस का तस अटका हुआ है।

यह जमीन न मिलने की वजह से बिजली की कनेक्टिविटी भी टर्मिनल को नहीं मिल पाई है। जलपरिवहन के क्षेत्रीय निदेशक एके मिश्रा ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वह लगातार प्रशासन के संपर्क में बने हुए हैं। 
 

कछुआ सेंक्चुअरी में प्रवेश की अनुमति मिलने पर जताया हर्ष

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multi modal terminal - फोटो : अमर उजाला
कछुआ सेंक्चुअरी में बड़े जलपोतों को शर्तों के साथ आने-जाने की अनुमति पर नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ से हरी झंडी मिलने पर वरिष्ठ अधिकारियों ने हर्ष जताया। सदस्य वित्त आईडब्ल्यूएआई और गंगा में जलपरिवहन के योजना निदेशक प्रवीर पांडेय तथा मुख्य इंजीनियर रविकांत ने इसे विकासोन्मुख फैसला बताया। बता दें कि कछुआ सेंक्चुअरी में जलपोतों को प्रवेश मिले इसके लिए आईडब्ल्यूएआई को दो साल से ज्यादा इंतजार करना पड़ा।
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