गीता प्रेस के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका के निधन पर पीएम मोदी-सीएम योगी ने जताया शोक
गीता प्रेस के अध्यक्ष और कल्याण पत्रिका के संपादन राधेश्याम खेमका ने प्रकाशन के माध्यम से सनातन धर्म की ध्वजा को घर-घर तक पहुंचाया। बच्चों में संस्कार का सृजन, सनातन धर्म के मूल्यों का ज्ञान और संस्कृति के प्रति लगाव व देशप्रेम की भावना को पुस्तकों के माध्यम से जगाया था। उनकी मृत्यु पर पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शोक व्यक्त किया है।
पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि गीता प्रेस के अध्यक्ष और सनातन साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने वाले राधेश्याम खेमका के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। खेमका जीवनपर्यंत विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया कि मुख्यमंत्री ने गोबिन्द भवन-कार्यालय, कोलकाता के अध्यक्ष व गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित अध्यात्म जगत की प्रसिद्ध पत्रिका "कल्याण" के संपादक राधेश्याम खेमका के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
परिवार के अखिलेश खेमका ने बताया कि ताऊ जी ने 1972 में नवंबर व दिसंबर माह के कल्याण का संपादन किया था। उसके बाद वर्ष 1983 के मार्च अंक से कल्याण के संपादक थे। उनके जीजिविषा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 86 वर्ष की उम्र में भी अप्रैल 2021 तक के अंकों का उन्होंने संपादन किया है। उनके संपादन में कल्याण के 38 वार्षिक विशेषांक, 460 संपादित अंक प्रकाशित हुए। इस दौरान कल्याण की 9 करोड़ 54 लाख 46 हजार प्रतियां प्रकाशित हुईं। कल्याण में पुराणों एवं लुप्त हो रहे संस्कारों एवं कर्मकांड की पुस्तकों का प्रामाणिक संस्करण उनके संपादकत्व में प्रकाशित हुए।
जीवनभर किया गंगाजल का सेवन
राधेश्याम खेमका बचपन से ही धार्मिक विचार के थे। बचपन से ही वे अपने पिता के साथ माघ मेले में काशी में पूरे एक महीने का कल्पवास रखते थे। पिछले कई दशकों से वे सिर्फ गंगा जल ही पीते थे। कहीं यात्रा में भी जाना हुआ तो वे आवश्यकतानुसार गंगाजल लेकर ही चलते थे। वे धर्म सम्राट स्वामी कृपात्री महाराज के कृपा पात्र थे।
ऐसे हुई कल्याण की शुरुआत
लालमणि तिवारी ने बताया कि दिल्ली में अप्रैल 1926 में आयोजित मारवाड़ी अग्रवाल सभा के आठवें अधिवेशन में घनश्यामदास बिड़ला ने एक पत्रिका निकालने की सलाह दी। गीताप्रेस के संस्थापक सेठजी जयदयाल गोयनका की सहमति से 22 अप्रैल 1926 को पत्रिका का नाम कल्याण निश्चित हुआ। इसी वर्ष भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार के संपादकत्व में कल्याण का प्रथम साधारण अंक मुंबई से प्रकाशित हुआ। दूसरे वर्ष कल्याण का प्रथम विशेषांक भगवन्नामांक गोरखपुर से प्रकाशित हुआ।
संत समाज ने जताया शोक
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म का प्रकाश घर-घर तक पहुंचाने वाला दीपक शांत हो गया। राधेध्याम खेमका के निधन से समाज की अपूरणीय क्षति हुई है। भगवान उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
राधेश्याम खेमका की मृदुल वाणी एवं सारगर्भित प्रवचन सनातन धर्मावलंबियों के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य करती रही है। वह विचार से मनीषी, आचार से तपस्वी, कर्मों से धर्मनिष्ठï और जीवन निष्ठïा में वैरागी थे। - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
सनातन धर्म केप्रति समर्पण और धर्मग्रंथों के माध्यम से समाज व धर्म की सेवा की जो अविरल धारा उन्होंने बहाई थी, वह चिरकाल तक उनको सभी के मन में जीवित रखेगी। -
संतोष दास, महामंडलेश्वर
प्रभु के श्रीचरणों में परमपद पाने के लिए महाप्रयाण के बाद भी उनके कृत्य, धार्मिक निष्ठा, सनातनी समर्पण, गो-सेवा, संस्कृत उन्नयन के कार्य से वह सदैव सभी के दिलों में जीवित रहेंगे।-
महंत बालक दास, पातालपुरी मठ
सनातन धर्म का गूढ़ और प्रामाणिक ज्ञान गीता प्रेस की पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने घर-घर तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया था। उनकेसंपादन में प्रकाशित होने वाली पुस्तकें हर सनातन धर्मी को सीख देती है। -
साध्वी गीतांबा तीर्थ, देवी उपासिका