UP: राहुल गांधी के बयान पर निगरानी याचिका सत्र न्यायालय में दाखिल, तीन जनवरी को सुनवाई; जानें पूरी बात
यह मामला सितंबर 2024 का है। राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है, क्या सिख पगड़ी पहन सकते हैं, कड़ा रख सकते हैं और गुरुद्वारे जा सकते हैं? उनके इस बयान को भड़काऊ और समाज में विभाजनकारी बताते हुए विरोध हुआ था।
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अमेरिका की यात्रा के दौरान सिख समुदाय पर दिए गए राहुल गांधी के विवादित बयान पर कानूनी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। राहुल के खिलाफ दर्ज मामले में जिला न्यायालय में एक बार फिर निगरानी याचिका दाखिल की गई है। सत्र न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट अगली सुनवाई तीन जनवरी को करेगी।
सितंबर 2024 में राहुल गांधी ने भारत में सिखों पर टिप्पणी कर सवाल उठाए थे। उनके बयान का समर्थन खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने किया तो विवाद और गहरा गया। विरोध में सारनाथ तिलमापुर निवासी नागेश्वर मिश्र ने सारनाथ थाने में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था।
कार्रवाई न होने पर अवर न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ (एमपी/ एमएलए) कोर्ट में प्रकीर्ण वाद प्रस्तुत किया। वाद 28 नवंबर 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ नागेश्वर मिश्र ने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की, जिसे 21 जुलाई 2025 को अपर सत्र न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने स्वीकार कर निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया।
इसके बाद राहुल गांधी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में क्रिमिनल रिविजन दाखिल किया, लेकिन उच्च न्यायालय ने 26 सितंबर 2025 को रिविजन खारिज कर मजिस्ट्रेट कोर्ट को फिर से सुनवाई का आदेश दिया। मजिस्ट्रेट नीरज कुमार त्रिपाठी ने 17 अक्तूबर 2025 को एक बार फिर प्रकीर्ण वाद को खारिज कर दिया, जिसके बाद नागेश्वर मिश्र ने बुधवार को फिर से जिला न्यायालय में निगरानी याचिका दायर की।
ये है पूरा मामला
वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने इस बयान के खिलाफ सारनाथ थाने में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन सफलता न मिलने पर उन्होंने अदालत का रुख किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) ने 28 नवंबर 2024 को यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया कि मामला अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा है और यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की जिसे 21 जुलाई 2025 को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) की अदालत ने स्वीकार कर लिया।
अब इस फैसले के खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है। दलील दी गई है कि वाराणसी अदालत का आदेश गलत, अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर है। लिहाजा जब तक यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है तब वाराणसी अदालत के आदेश पर रोक लगाई जाए।