यूपी: 30 जिलों के लोगों ने एसआईआर को बताया जरूरी, विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा; बीएचयू के प्रोफेसर शामिल
प्रदेश के 30 जिलों के लोगों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को जरूरी बताया है। बीएचयू के प्रोफेसर का कहना है कि एसआईआर आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों को आईना दिखाएगा। इससे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित होगी और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। इस प्रक्रिया को लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
विस्तार
उत्तर प्रदेश में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) पर एक स्वीकार्यता रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। बृहस्पतिवार को केएन उडुप्पा सभागार में एफ्रो एशियन फेलोशिप फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में इसका जिक्र किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने कहा कि ये एसआईआर आगामी चुनाव में आईना दिखाने का काम करेगा, क्योंकि इसमें ज्यादातर युवाओं की राय है कि एसआई आर देशहित में जरूरी है।
लेखिका डॉ. रोमसा शुक्ला ने शोध रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया कि यूपी के 30 जिलों के 8,518 मतदाताओं से 24 सवाल पूछे गए। मई से अगस्त के बीच क्षेत्रीय आधार पर अध्ययन किया गया। प्रो. सुषमा यादव ने कहा कि ऐसे अध्ययन चुनावी प्रक्रिया, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी होते हैं।
हुई चर्चा
संगोष्ठी में दो किताबों का लोकार्पण भी किया गया। पहली किताब ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम फॉर 21 सेंचुरी के लेखक प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल और डॉ. रोमसा शुक्ला हैं। दूसरी ‘आहम अस्मी रोमासा’ के लेखक प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल हैं।
मुख्य अतिथि इतिहास संकलन समिति के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि मताधिकार, जनभागीदारी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हर नागरिक की भूमिका है। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी, प्रो. उमेश कदम, प्रो. एमडी कुतुबुद्दीन और हेरंब वर्मा मौजूद रहे।
संगोष्ठी का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ। इसके बाद प्रमाणपत्र और पुरस्कार वितरण समारोह हुआ। इस दौरान प्रो. केशव मिश्र, प्रो. प्रवेश भारद्वाज, प्रो. अनुराधा सिंह, प्रो. अनूप मिश्र, डॉ. बाला लखेंद्र मौजूद रहे। संचालन डॉ. हरीश पांडेय ने किया।