बनारस घराने के ख्याल गायिकी के प्रख्यात कलाकार रहे पद्मभूषण पं. राजन मिश्र को कला साधकों ने सांगीतिक वंदना दी। सुर, लय व ताल के माध्यम से उनकी यादों को साझा किया गया। कलाकारों के साथ विशिष्टजनों ने भी उन्हें नमन करते हुए उनकी गायिकी को याद किया। राजन एंड साजन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (रसिपा), सनबीम शिक्षण समूह और कला प्रकाश की ओर से पं. राजन मिश्र की पांचवीं पुण्यतिथि पर सनबीम स्कूल, लहरतारा में शनिवार को आयोजित श्रद्धांजलि संगीत समारोह में कलाकारों ने संगीतांजलि अर्पित की। उनके पुत्र गायक रितेश मिश्रा, पं. पूरण महाराज, पद्मश्री ऋत्विक सान्याल, नंदकिशोर मिश्रा, कन्हैयालाल मिश्रा, राजेश मिश्रा, भोलानाथ मिश्रा, शिवानी मिश्रा, आर्यन मिश्रा, कान्हा मिश्रा आदि ने पं. राजन मिश्र के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद संगीत संध्या में भोपाल की दिव्या शर्मा ने राग मधुवंती से गायन की शुरुआत की। इसमें विलंबित एकताल की बंदिश के बोल थे— “कैसे जाऊं सखी...”। तीनताल की रचना के बोल थे— “फुलवन सेज बिछाई...”। समापन भजन “साधो ऐसा ही गुरु भावे...” से किया। तबले पर पं. राजेश मिश्रा और हारमोनियम पर पं. पंकज मिश्रा ने संगत की। द्वितीय प्रस्तुति में बनारस घराने के प्रख्यात गायक पं. अनूप मिश्रा ने राग जैत में विलंबित एकताल की बंदिश “आए हो महाराज...” प्रस्तुत की। मध्यलय तीनताल की रचना “कल न परत...” के साथ बनारस घराने की शुद्ध बानगी और चैनदारी सुनाकर सभी को आनंदित किया। गायन में उनके पुत्र आर्यन मिश्रा, तबले पर श्रीकांत मिश्रा और हारमोनियम पर पं. पंकज मिश्रा ने संगत की। अंतिम प्रस्तुति बनारस के ही प्रसिद्ध सितार वादक पं. नरेंद्र मिश्रा की रही। उन्होंने राग चारुकेसी में आलाप, जोड़ और झाला की बेहतरीन प्रस्तुति दी। तबले पर पं. राजेश मिश्रा ने संगत की। स्वागत अशोक कपूर ने किया।