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नए सत्र से आरटीई के तहत अभिभावकों को देना होगा शुल्क, स्कूलों ने लिया फैसला
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हर साल हजाराें अभिभावक अपने नौनिहाल के बेहतर भविष्य के लिए आरटीई के तहत निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने के लिए दौड़ लगाते है। लेकिन इस साल अभिभावकों का ये सपना शासन की लेटलटिफी की वजह से टूट जाएगा। शासन की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति न मिलने का खामीयाजा गरीब अभिभावकों को उठाना पड़ेगा। क्योंकि इस साल न तो निजी विद्यालय आरटीई के तहत नए बच्चों का प्रवेश लेंगे न ही आरटीई के तहत पढ़ने वाले पुराने छात्रों को निशुल्क शिक्षा देंगे। रविवार को लोहता के भट्ठी स्थित ड्रीम लाइट पब्लिक स्कूल में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के की हुई बैठक में स्कूल संचालकों ने प्रस्ताव पारित कर आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों से शुल्क लेने का फैसला किया है।
एसोसिएशन की बैठक में अध्यक्ष रामआसरे पटेल ने कहा कि स्कूल प्रबंधन अधिनियम का ईमानदारी से पालन कर रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा। पिछले तीन वर्षों से स्कूलों की प्रतिपूर्ति शुल्क नहीं देने के अलावा फीस भी नियमानुसार नहीं बढ़ाई गई है। वहीं बैठक में वंशलाल पटेल ने कहा कि इसको लेकर शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त व अन्य अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत की जा चुकी है। लेकिन फीस प्रतिपूर्ति के लिए शासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए।
शासन के फेर में फंसा बच्चों का भविष्य
एक ओर जहां आरटीई के लिए सत्र 2022-23 में आवेदन का प्रथम चरण कि प्रक्रिया पुरी हो गई है। वहीं शासन के बजट के अभाव में बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। एक ओर बेसिक शिक्षा विभाग 30 मार्च को लॉटरी निकलने की तैयारी कर रहा है। वहीं प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के इस फैसले ने अभिभावकों की अपने लाडले के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अंतर्गत आने वाले 100 से ज्यादा स्कूलों ने प्रवेश देने से मना कर दिया है। एसोसिएशन के लाल बहादुर प्रजापति ने कहा कि बैठक में सर्वसम्मति से इस सत्र में अभिभावक से सहयोग के रूप में विद्यालय की फीस लेने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान इंद्रजीत सिंह, प्रदीप गुप्ता, रामकरन पटेल, विनोद सिंह, गुड्डू वर्मा, रंजीत पटेल, घनश्याम प्रजापति, प्रदीप गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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एसोसिएशन की बैठक में अध्यक्ष रामआसरे पटेल ने कहा कि स्कूल प्रबंधन अधिनियम का ईमानदारी से पालन कर रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा। पिछले तीन वर्षों से स्कूलों की प्रतिपूर्ति शुल्क नहीं देने के अलावा फीस भी नियमानुसार नहीं बढ़ाई गई है। वहीं बैठक में वंशलाल पटेल ने कहा कि इसको लेकर शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त व अन्य अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत की जा चुकी है। लेकिन फीस प्रतिपूर्ति के लिए शासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए।
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शासन के फेर में फंसा बच्चों का भविष्य
एक ओर जहां आरटीई के लिए सत्र 2022-23 में आवेदन का प्रथम चरण कि प्रक्रिया पुरी हो गई है। वहीं शासन के बजट के अभाव में बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। एक ओर बेसिक शिक्षा विभाग 30 मार्च को लॉटरी निकलने की तैयारी कर रहा है। वहीं प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के इस फैसले ने अभिभावकों की अपने लाडले के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अंतर्गत आने वाले 100 से ज्यादा स्कूलों ने प्रवेश देने से मना कर दिया है। एसोसिएशन के लाल बहादुर प्रजापति ने कहा कि बैठक में सर्वसम्मति से इस सत्र में अभिभावक से सहयोग के रूप में विद्यालय की फीस लेने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान इंद्रजीत सिंह, प्रदीप गुप्ता, रामकरन पटेल, विनोद सिंह, गुड्डू वर्मा, रंजीत पटेल, घनश्याम प्रजापति, प्रदीप गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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