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यूपी में बेटियां न घर पर सुरक्षित है और न ही घर से बाहरः पंखुड़ी पाठक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 03 Jul 2018 12:45 PM IST
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संस्कृति के परिवार वालों से मिलकर न्याय के लिए सरकार को दी चेतावनी
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ में पालीटेक्निक की छात्रा बलिया निवासी संस्कृति राय की हत्या को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। इसको लेकर सोमवार को सपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक सोमवार को संस्कृति के घर पहुंची। संस्कृति के घरवालों से बातचीत की और ढांढस बंधाया।
इस दौरान कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। यहां पर लड़कियां अब सुरक्षित नहीं रह गई हैं। लखनऊ में हत्या के इतने दिन बाद भी पुलिस अभी तक हत्यारों का सुराग नहीं लगा सकी। ऐसे माहौल में भला कौन अभिभावक अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए दूर शहर भेजेगा।
इस दौरान पंखुड़ी ने कहा कि पिछले साल बलिया में अपने घर से सौ कदम पर ही एक बेटी रागिनी दूबे को निर्मम तरीके से गला रेतकर हत्या कर दी गई। अब तो बेटियां न घर पर सुरक्षित है और न तो घर से बाहर। आखिर इस हालात में लोग बेटियों को किस तरीके से बाहर पढ़ने के लिए भेजें।
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जबकि केंद्र सरकार बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का स्लोगन लोगों को सुना रही है। सरकार का कोई व्यक्ति बेटी के दरवाजे पर नहीं आया। यह बड़े ही शर्म की बात है। जिस प्रदेश के सीएम कहें कि बच्चे सरकार की जिम्मेदारी हैं, वहां बेटियों की सुरक्षा भला कैसे होगी।
कहा कि यह सरकार बेटियों की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही थी। लेकिन हर मोर्चे पर विफल रही। पीड़ित परिवार को ढांढस बधाते हुए पाठक ने कहा कि अगर परिवार को न्याय नहीं मिलता है तो प्रदेश स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
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इस दौरान कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। यहां पर लड़कियां अब सुरक्षित नहीं रह गई हैं। लखनऊ में हत्या के इतने दिन बाद भी पुलिस अभी तक हत्यारों का सुराग नहीं लगा सकी। ऐसे माहौल में भला कौन अभिभावक अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए दूर शहर भेजेगा।
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इस दौरान पंखुड़ी ने कहा कि पिछले साल बलिया में अपने घर से सौ कदम पर ही एक बेटी रागिनी दूबे को निर्मम तरीके से गला रेतकर हत्या कर दी गई। अब तो बेटियां न घर पर सुरक्षित है और न तो घर से बाहर। आखिर इस हालात में लोग बेटियों को किस तरीके से बाहर पढ़ने के लिए भेजें।
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जबकि केंद्र सरकार बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का स्लोगन लोगों को सुना रही है। सरकार का कोई व्यक्ति बेटी के दरवाजे पर नहीं आया। यह बड़े ही शर्म की बात है। जिस प्रदेश के सीएम कहें कि बच्चे सरकार की जिम्मेदारी हैं, वहां बेटियों की सुरक्षा भला कैसे होगी।
कहा कि यह सरकार बेटियों की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही थी। लेकिन हर मोर्चे पर विफल रही। पीड़ित परिवार को ढांढस बधाते हुए पाठक ने कहा कि अगर परिवार को न्याय नहीं मिलता है तो प्रदेश स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।