काशी विद्यापीठ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ की ओर से हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद पर चर्चा की। मुख्य वक्ता विवि के अभियंत्रण विभाग के निदेशक प्रो. राकेश कुमार तिवारी ने कहा कि पं. दीनदयाल का एकात्म मानव दर्शन संतुलित जीवन-दृष्टि प्रदान करता है।
पं. दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर हुए कार्यक्रम में प्रो. राकेश ने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सच्ची प्रगति है। अंत्योदय के इस मूलमंत्र पर चलकर ही भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर हो सकता है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का जीवन दर्शन केवल एक राजनीतिक या सामाजिक विचार नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के कल्याण और राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत कुंजी है। जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सशक्त नहीं होगा, तब तक एक आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत की कल्पना अधूरी है। कुलानुशासक डॉ. अंबरीष राय, विभागाध्यक्ष प्रो. भावना वर्मा ने विचार रखे। संचालन उप निदेशक डॉ. ऊर्जस्विता सिंह, धन्यवाद ज्ञापन उप निदेशक प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने किया।