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रोशनी की उम्मीद थी, जिंदगी में ही अंधेरा छा गया, पीड़ितों की कहानी सुनकर भर जाएंगी आंखें

Sat, 16 Jun 2018 02:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 16 Jun 2018 02:05 PM IST
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Painful story of patient who lost his eye sight
घटना के बाद खाली पड़ा काउंटर - फोटो : अमर उजाला
बनारस के मारवाड़ी अस्पताल में आंखों में रोशनी की उम्मीद लेकर आए छह लोग गहरे सदमे में हैं। गलत ढंग से ऑपरेशन के कारण आंखों की रोशनी जाने से किसी को घर चलाने की चिंता सता रही है तो और किसी को फिक्र है कि अब तो उसकी पूरी जिंदगी ही अंधेरे में गुम हो जाएगी।
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चंदौली निवसी त्रिवेणी ऑटो चलाकर अपने पांच बच्चों और पत्नी की परवरिश करते हैं। उनकी बड़ी चिंता बच्चों की शिक्षा और लालन-पालन की है। आंखों में कुछ समय से दिक्कत हो रही थी। हमने यहां दिखाया। डॉक्टर ने मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने को बोला।
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12 को जब ऑपरेशन के बाद पट्टी खुली तो आंखों के आगे अंधेरा ही अंधेरा था। डॉक्टरों ने आश्वासन दिया था कि 24 घंटे में सही हो जाएगा लेकिन 72 घंटे बीत चुके हैं। अब तो कुछ भी दिखाई ही नहीं दे रहा है।
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बिहार के बक्सर जिले के यज्ञ नारायण ने बताया कि हमने यहां इसलिए आंख बनवाने की सोची थी कि यहां कुछ भगवान तो कुछ धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों की कृपा होगी। ऑपरेशन के बाद तो बस अंधेरा ही अंधेरा छा गया है।

वहीं मिर्जापुर की पार्वती देवी, जौनपुर की वंदना, नवाबगंज की अख्तरी बेगम और कोनिया की मालती देवी के परिजनों के आंखों के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। सभी का कहना था कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है।

आगे का इलाज भी कराएगा अस्पताल

Painful story of patient who lost his eye sight
पूछताछ करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
पीड़ितों के परिजनों के हंगामे पर पहुंची पुलिस ने पीड़ितों और उनके परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने पीड़ितों और पुलिस को आश्वासन दिया कि वह पीड़ितों का पूरा इलाज अपने खर्चे पर कराएंगे। शुक्रवार की शाम को प्रबंधक के कमरे में इसके लिए घंटों बातचीत हुई।

फिर से इलाज के आश्वासन पर परिजन शांत हो गए परिजनों का कहना था कि जब हंगामा शुरू हुआ तो डॉक्टर और स्टाफ मौके से फरार हो गए। मरीजों की ड्रेसिंग भी प्रभावित हुई। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने दूसरे चिकित्सक और कर्मियों को बुलाकर दवा और ड्रेसिंग का प्रबंध किया।

इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के सदस्य रवि अग्रवाल ने बताया कि ओटी को बंद कर दिया गया है। उनकी प्राथमिकता है कि मरीज जल्द से जल्द ठीक हो जाएं।

मरीजों की जांच कराई जा रही है और शनिवार को रिपोर्ट आने के बाद आगे इलाज किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन अपने पूरे खर्चे पर मरीजों का इलाज कराएगा और इसमें कोई लापरवाही नहीं होगी।

शिकायत पर देते ध्यान तो नहीं होती घटना

Painful story of patient who lost his eye sight
पीड़ित मरीज - फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने छह महीने पहले अगर ध्यान दिया होता तो हादसा नहीं होता। मारवाड़ी अस्पताल में अप्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ को नियुक्त करने की शिकायत सीएम से लेकर डीएम तक छह महीने पहले ही की गई थी।

शिकायती पत्र की प्रति स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव और कमिश्नर को भी भेजी गई थी। इनमें से किसी भी अधिकारी ने शिकायत पर ध्यान नहीं दिया।

शिकायकर्ता विष्णु पचेरीवाल ने जनवरी में भेजे गए शिकायती पत्र में लिखा था कि मारवाड़ी हिंदू अस्पताल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ व कंपाउंडर मानक के अनुरूप नहीं हैं। हालत यह है कि बिना डिप्लोमा के नर्सिंग स्टाफ मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

डॉक्टर के नाम पर कर्मचारी मरीजों का इलाज करते हैं और दवा लिखते हैं। राजातालाब में भी मारवाड़ी अस्पताल के नाम पर आंख का अस्पताल चलाया जा रहा है। वहां पर कर्मचारी ही मरीजों का इलाज करते हैं और दवा भी लिखते हैं। 

अव्यवस्था पर नहीं दिया आरटीआई का जवाब

Painful story of patient who lost his eye sight
पूरा स्टाफ हुआ फरार - फोटो : अमर उजाला
श्री राम लक्ष्मीनारायण मारवाड़ी हिंदू अस्पताल में व्याप्त विसंगतियों के मामले में भी विष्णु पेचरीवाल को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से आरटीआई का जवाब नहीं दिया गया।

पेचरीवाल ने मार्च में जनसूचना के तहत छह बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी में मारवाड़ी अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया था। शिकायतकर्ता ने अस्पताल में संचालित ऑपरेशन थिएटर, प्रसूति केंद्र और अन्य सभी वार्ड में सेवाओं के लिए तैनात प्रशिक्षित कर्मियों की सूची मांगी थी।

इसके अलावा शिकायत के संदर्भ में भी कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि अभी तक इस इस मामले में उन्हें जनसूचना का जवाब नहीं मिला है। 
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