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पद्मविभूषण पंडित शिव कुमार शर्मा को बनारस घराने से था गहरा लगाव

Wed, 11 May 2022 01:45 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 11 May 2022 01:45 AM IST
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Padma Vibhushan Pandit Shiv Kumar Sharma had a deep attachment to the Banaras Gharana
संतूर का पर्याय बन चुके पंडित शिव कुमार शर्मा के जाने से हर संगीत प्रेमी दुखी है। उनके जाने से संतूर के सुर थम गए हैं। संगीत जगत में एक शून्य भी आ गया है। पंडित शर्मा का बनारस घराने से गहरा लगाव था। काशी में विभिन्न कार्यक्रमों में भागीदारी करने के साथ ही उन्होंने संकट मोचन संगीत समारोह में भी कई यादगार प्रस्तुतियां दी थीं।
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अपना मुरीद बनाने की थी बेहतरीन कला : पद्मश्री राजेश्वर आचार्य
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री पंडित राजेश्वर आचार्य ने बताया कि कलाकार चाहे छोटा हो या बड़ा जिससे भी मिलते उसे अपना मुरीद बनाने की कला पंडित शिवनाथ शर्मा में थी। पहली बार शततंत्रीय वीणा को संतूर में तब्दील कर उसे सात समंदर पार तक एक अलग मुकाम दिलाया। बनारस के आयोजनों का निमंत्रण कई बार स्वीकार किया। काशी तो उनका दूसरा घर है। संतूर वादन के साथ ही तबले पर भी उन्हें महारत थी। उनके निधन से संगीत जगत का नक्षत्र अस्त हो गया।
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सगे भाई की तरह थे पंडित शिवकुमार : पद्मभूषण साजन मिश्र
पद्मभूषण पंडित साजन मिश्र ने बताया कि मेरे लिए तो वह सगे भाई की तरह थे। अभी तो राजन भैया के सदमे से निकल ही नहीं पाया था कि इतना बड़ा आघात लगा है। उनके पिता पंडित उमादत्त शर्मा की संगीत की शिक्षा बनारस घराने के पंडित रामदास महाराज के यहां हुई थी। ऐसे कलाकार युगों युगों में जन्म लेते हैं जिनके नाम से संगीत और साज की पहचान होती हो। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि वह उन्हें अपने लोक में स्थान दें और परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
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संगीत जगत की अपूरणीय क्षति : पद्मश्री सोमा घोष
पद्मश्री डॉ. सोमा घोष ने बताया कि संगीत जगत के सूर्य पंडित शिव कुमार मिश्र का निधन अपूरणीय क्षति है। कई बार संगीत आयोजनों में उनसे मुलाकात हुई और उनका सहज व्यवहार ही उनकी अलग पहचान थी। एक कलाकार के तौर पर उन्होंने संगीत के क्षेत्र में जो कुछ भी किया है, उसे कभी भी भूला नहीं जा सकता है। काशी के प्रति उनका प्रेम ही था कि बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत कार्यक्रमों में आने के लिए तैयार हो जाते थे। उनकी कई शानदार प्रस्तुतियां आज भी जेहन से नहीं उतरती।
संतुर साधना के एक युग का समापन
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि शिवकुमार शर्मा के निधन से न सिर्फ काशी के कला साधकों का मन मर्माहत है बल्कि विश्व के अनेक देशों में शास्त्रीय संगीत के सुधि जनों को गहरा सदमा लगा है। तबला वादन की दीक्षा उन्होंने यहां से ली। 1992 से संकट मोचन संगीत समारोह में प्रतिवर्ष आते और महाराज के श्री चरणों में स्वरांजलि प्रस्तुत करते थे। इस बार भी वे आना चाहते थे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से नहीं आ सके। जब भी बुलावा गया, बिना किसी औपचारिकता का इंतजार किए इस तरह चले आए जैसे अपने घर आ रहे हों। उनका जाना बनारस के संगीत जगत को भी अखर गया।

काशी की संगीत परंपरा से था गहरा जुड़ाव
सितार वादक देवब्रत मिश्र का कहना है कि पद्म विभूषण पंडित शिवकुमार शर्मा का जाना दुखद है। उन्होंने वाद्य यंत्र संतूर को शास्त्रीय संगीत में नई ऊंचाई प्रदान की। भारतीय संगीत के वे नक्षत्र के रूप में थे। काशी की संगीत परंपरा से भी उनका गहरा रिश्ता था।
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