काशी विद्यापीठ की कैंटीन में पीएसी का डेरा: छात्रों के धरना प्रदर्शन के बाद भी नहीं हुआ खाली, छात्र परेशान
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रों के लिए कैंटीन की सुविधा लंबे समय से बंद है। कैंटीन और परिसर में पीएसी का कब्जा है। तीन साल से पीएसी को हटाने के लिए छात्र कई बार आंदोलन व धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। बावजूद कोई हल नहीं निकला है। छात्र-छात्राओं को खाने के लिए बाहर भटकना पड़ता है।
2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र देव छात्रावास को खाली कराकर पीएसी को ठहराया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे छात्रावास के बगल की कैंटीन में पीएसी की कंपनी चली गई। कैंटीन परिसर व वहां छात्रावास के कमरे छावनी बन चुके हैं। जनवरी 2020 में छात्रावास व कैंटीन से पीएसी हटाने के लिए छात्रों ने जमकर हंगामा किया था।
छात्रों के आक्रोश को देखकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने 24 घंटे के अंदर खाली कराने का आश्वासन दिया, लेकिन नतीजा सिफर निकला। जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नवरत्न सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीपी को पीएसी हटाने के लिए दो बार पत्र लिखा है और रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है।
नए सत्र में दाखिला पूरा हो चुका है और पठन-पाठन भी शुरू हो गया है। छात्रावास में अब भी पीएसी टिकी हुई है। वहीं, छात्रावास के अभाव में छात्र इधर उधर भटक रहे हैं। - विराट मिश्र
लोकसभा चुनाव के समय छात्रावास खाली था, इसलिए वहां पीएसी ठहराई गई थी। उसी समय से 12 कमरों में पीएसी रह रही है। अब सत्र समाप्त होने को है। मगर पीएसी बनी हुई है। - शशि शेखर
बगल के कमरों में पीएसी के रहने से वे असहज महसूस करते हैं। पढ़ाई नहीं हो पा रही है। प्रशासन चाहता है कि कैंपस में पीएसी बनी रहे तो उसके लिए दूसरा स्थान खोजना चाहिए। - शिवम तिवारी
छात्रसंघ चुनाव के बाद पीएसी को हटाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। छात्रों को परेशानी हो रही है। कैंटीन नहीं खुल पा रही है और कमरों में भी पीएसी का कब्जा है। - अभिषेक सोनकर