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‘अपनों’ पे करम, ये ठीक नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 18 Apr 2016 01:01 AM IST
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वरुणा कॉरिडोर में बाधक बने अवैध निर्माणों के विरुद्ध वीडीए की कार्रवाई कमिश्नर के सख्त निर्देश के बावजूद जोर नहीं पकड़ पा रही है। बुद्ध विहार कॉलोनी में इक्का-दुक्का अवैध निर्माणों पर शिकंजा कसने के बाद रविवार को वीडीए ने फिर दो निर्माण स्थलों से सटरिंग हटवाई लेकिन ठीक नदी किनारे कराए गए अवैध निर्माणों (जिनमें होटल और बहुमंजिला भवन शामिल हैं) पर अब तक कोई कार्रवाई न होने से खुद वीडीए सवालों के घेरे में है। कार्रवाई में भेदभाव से बुद्ध विहार कॉलोनी के लोगों में खासी नाराजगी है।
उनका कहना है कि जब उनका मकान दायरे में आ सकता है तो नदी से सटकर बने बड़े-बड़े भवनों, होटलों को कार्रवाई के दायरे के बाहर क्यों रखा जा रहा है। कॉलोनी के लोगाें ने वीडीए पर आरोप लगाया कि बड़े लोगों को छूट दे दी गई है और कमजोर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। कालोनी के दीपांकर पांडेय ने कहा कि पहले हमारा निर्माण वीडीए की नजर में अवैध नहीं था। बीस साल पहले वीडीए ने ही उसे स्वीकृत किया था तो अब वह कैसे अवैध हो गया। कालोनी के एक अन्य बाशिंदे ने कहा कि वीडीए अपनी इस स्वीकृत कॉलोनी में नक्शे के हिसाब से बताए कि कहां-कितना अवैध निर्माण है, कॉलोनी के लोग खुद उन निर्माणों को तोड़ेंगे।
कार्रवाई एकतरफा नहीं होनी चाहिए। पहले नदी से सटकर बनाए गए अवैध निर्माणों को तोड़ा जाए। सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को कार्रवाई के नाम पर परेशान किया गया या उनके निर्माण तोड़े गए तो इसे बरदाश्त नहीं किया जाएगा। बता दें कि वरुणा नदी क्षेत्र में दो सौ से अधिक अवैध निर्माण कराए गए हैं लेकिन अब तक वीडीए ने महज छह भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया है। इसमें भी सिर्फ एक भवन के कुछ हिस्से तोड़े गए हैं। बाकी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के बजाए वीडीए किसी तरह खानापूर्ति कर इस मसले की लीपापोती के प्रयास में है।
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जिन लोगों ने नक्शा स्वीकृत कराके निर्माण कराया है। उनका निर्माण नहीं तोड़ा जा रहा है। जिन्होंने बगैर नक्शा पास कराए निर्माण कराया है उन्हीं का तोड़ा जा रहा है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
एमपी सिंह, वीडीए सचिव
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उनका कहना है कि जब उनका मकान दायरे में आ सकता है तो नदी से सटकर बने बड़े-बड़े भवनों, होटलों को कार्रवाई के दायरे के बाहर क्यों रखा जा रहा है। कॉलोनी के लोगाें ने वीडीए पर आरोप लगाया कि बड़े लोगों को छूट दे दी गई है और कमजोर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। कालोनी के दीपांकर पांडेय ने कहा कि पहले हमारा निर्माण वीडीए की नजर में अवैध नहीं था। बीस साल पहले वीडीए ने ही उसे स्वीकृत किया था तो अब वह कैसे अवैध हो गया। कालोनी के एक अन्य बाशिंदे ने कहा कि वीडीए अपनी इस स्वीकृत कॉलोनी में नक्शे के हिसाब से बताए कि कहां-कितना अवैध निर्माण है, कॉलोनी के लोग खुद उन निर्माणों को तोड़ेंगे।
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कार्रवाई एकतरफा नहीं होनी चाहिए। पहले नदी से सटकर बनाए गए अवैध निर्माणों को तोड़ा जाए। सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों को कार्रवाई के नाम पर परेशान किया गया या उनके निर्माण तोड़े गए तो इसे बरदाश्त नहीं किया जाएगा। बता दें कि वरुणा नदी क्षेत्र में दो सौ से अधिक अवैध निर्माण कराए गए हैं लेकिन अब तक वीडीए ने महज छह भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया है। इसमें भी सिर्फ एक भवन के कुछ हिस्से तोड़े गए हैं। बाकी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के बजाए वीडीए किसी तरह खानापूर्ति कर इस मसले की लीपापोती के प्रयास में है।
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जिन लोगों ने नक्शा स्वीकृत कराके निर्माण कराया है। उनका निर्माण नहीं तोड़ा जा रहा है। जिन्होंने बगैर नक्शा पास कराए निर्माण कराया है उन्हीं का तोड़ा जा रहा है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
एमपी सिंह, वीडीए सचिव