वाराणसी: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के भूखंड के अधिग्रहण का विरोध, शिक्षकों ने कहा- एक इंच जमीन भी नहीं देंगे
शैक्षिक संघ ने धरना, प्रदर्शन और आमरण अनशन की चेतावनी दी। महासंघ ने कुलपति को ज्ञापन सौंपकर सीएम और राज्यपाल को पत्र भेजा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शुक्रवार को डॉ. गोविंद कुमार मिश्र के नेतृत्व में शैक्षिक महासंघ ने कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपा। कुलपति ने महासंघ के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि संस्कृत के विरोध में किसी प्रकार का कार्य नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय अपनी भूमि का सदुपयोग संस्कृत के उन्नयन एवं विकास के लिए करेगा। इस दौरान डॉ. सुरेश चंद्र उपाध्याय, डॉ. अभिषेक पाठक, अशोक पांडेय, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, डॉ. उदयन मिश्र मौजूद रहे।
वहीं जनसंपर्क अधिकारी शशींद्र मिश्र ने बताया कि जुलाई में ही विश्वविद्यालय में हुई कार्यपरिषद ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को जमीन देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। उक्त भूखंड पर विश्वविद्यालय की ओर से शिक्षा संकाय भवन, गेस्ट हाउस एवं बहुउद्देशीय भवन बनाने का प्रस्ताव है।
शिक्षक अपने व्यवहार से छात्रों में बढ़ाएं सृजनात्मकता
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों को अपने आचरण एवं व्यवहार से छात्रों में क्रियाशीलता और सृजनात्मकता को बढ़ाने की आवश्यकता है। मानव संसाधान विकास केंद्र के सभी कार्यक्रम हमारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वह शुक्रवार को बीएचयू में यूजीसी ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट सेंटर की ओर से संस्कृत विषय में अष्टम पुनश्चर्या पाठ्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे।
अध्यक्षता करते हुए प्रो. विजय कुमार शुक्ल ने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इसी शैक्षणिक सत्र से हिंदू स्टडीज में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ होने जा रहा है, जिससे संस्कृत के अध्येताओं एवं अध्यापकों के लिए नए अवसर की प्राप्ति होगी तथा शास्त्रों का प्रसार होगा। द्विसाप्ताहिक पाठ्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से 57 प्रतिभागी ऑनलाइन प्रतिभाग कर रहे हैं। स्वागत प्रो. प्रवेश कुमार श्रीवास्तव, संचालन डॉ. ठाकुर शिवलोचन शांडिल्य और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मिताली देव ने किया। इस दौरान महामहोपाध्याय प्रो. जयशंकर लाल त्रिपाठी ने संस्कृत वांग्मय में व्याकरणशास्त्र की उपादेयता पर व्याख्यान दिया।