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Kashi Vidyapith: राष्ट्रीय कार्यशाला में बोले कुलपति, मनोविज्ञान में ठोस आंकड़ों वाले शोध ही होते हैं प्रभावी
Tue, 09 Sep 2025 03:31 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Sep 2025 03:31 PM IST
सार
रिसर्च मेथोडोलॉजी विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रो. तुषार सिंह ने कहा कि अनुसंधान केवल तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है।
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काशी विद्यापीठ में कार्यशाला में मौजूद लोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सोमवार को रिसर्च मेथोडोलॉजी विषय पर सात दिन की राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि अच्छे शोध के लिए वैज्ञानिक नियमों के बारे में पता होना चाहिए।
सामाजिक विज्ञान और मनोविज्ञान के शोध तभी प्रभावी हो सकते हैं, जब वे ठोस आंकड़ों और सांख्यिकीय विश्लेषण पर आधारित हो। प्रो. त्यागी ने कहा कि यह कार्यशाला न सिर्फ विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शोध की सही दिशा देगी, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाएगी।
कार्यशाला में प्रो. तुषार सिंह ने कहा कि अनुसंधान केवल तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। शोधार्थियों को चाहिए कि वे शोध में नई तकनीक और उपकरणों का प्रयोग करें। एसपीएसएस जैसे सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर के प्रयोग से शोध अधिक सटीक और उपयोगी बनता है।
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मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने कहा कि इस कार्यक्रम में शोधार्थियों को आधुनिक शोध पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी। मनोवैज्ञानिक शोध की प्रामाणिकता तभी सुनिश्चित हो सकेगी, जब शोधकर्ता उचित पद्धति का प्रयोग करें।
विद्यापीठ के 6 कोर्स में 238 अभ्यर्थियों ने लिया दाखिले
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सत्र 2025-26 में सोमवार को पीजी के कोर्सों में 238 अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराई। इसमें एलएलबी, एलएलएम, एमएससी फिजिक्स, पीजीडीसीए, एमए/एमएससी गणित और एमए/ एमएस-एसी सांख्यिकी कोर्स में सीटों का आवंटन किया गया। आज एमए मनोविज्ञान, एमए आईआरपीएम, एमम्यूज समेत 10 से ज्यादा कोर्स में दाखिले के लिए अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग होगी।
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सामाजिक विज्ञान और मनोविज्ञान के शोध तभी प्रभावी हो सकते हैं, जब वे ठोस आंकड़ों और सांख्यिकीय विश्लेषण पर आधारित हो। प्रो. त्यागी ने कहा कि यह कार्यशाला न सिर्फ विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शोध की सही दिशा देगी, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाएगी।
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कार्यशाला में प्रो. तुषार सिंह ने कहा कि अनुसंधान केवल तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। शोधार्थियों को चाहिए कि वे शोध में नई तकनीक और उपकरणों का प्रयोग करें। एसपीएसएस जैसे सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर के प्रयोग से शोध अधिक सटीक और उपयोगी बनता है।
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मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल ने कहा कि इस कार्यक्रम में शोधार्थियों को आधुनिक शोध पद्धतियों की जानकारी दी जाएगी। मनोवैज्ञानिक शोध की प्रामाणिकता तभी सुनिश्चित हो सकेगी, जब शोधकर्ता उचित पद्धति का प्रयोग करें।
विद्यापीठ के 6 कोर्स में 238 अभ्यर्थियों ने लिया दाखिले
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सत्र 2025-26 में सोमवार को पीजी के कोर्सों में 238 अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग कराई। इसमें एलएलबी, एलएलएम, एमएससी फिजिक्स, पीजीडीसीए, एमए/एमएससी गणित और एमए/ एमएस-एसी सांख्यिकी कोर्स में सीटों का आवंटन किया गया। आज एमए मनोविज्ञान, एमए आईआरपीएम, एमम्यूज समेत 10 से ज्यादा कोर्स में दाखिले के लिए अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग होगी।