वन स्टॉप सेंटर: बाल विवाह के बंधन तोड़ अब बिटिया गढ़ेगी भविष्य की नींव
चार जून को चौबेपुर की बेटी की जबरन 18 वर्ष पूरे करने के पांच माह पहले ही शादी कर दी गई। शादी से नाखुश बेटी ने माता-पिता व ससुराल वालों से वक्त मांगा, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। ढाई महीने ससुराल में रहने के बाद संगीता एक दिन वन स्टॉप सेंटर के हेल्पलाइन पर शिकायत की।
विस्तार
वाराणसी के चौबेपुर निवासी एक बिटिया आज बाल विवाह के बंधन को तोड़ नए सिरे से अपने भविष्य की नींव लिखने के रास्ते पर निकल पड़ी। चौबेपुर सखी केंद्र पर रविवार को माता-पिता द्वारा जबरन बाल विवाह के बंधन में बांधी गई बेटी को वन स्टॉप सेंटर ने आजादी दिला दी। चार जून को चौबेपुर की बेटी की जबरन 18 वर्ष पूरे करने के पांच माह पहले ही शादी कर दी गई।
शादी से नाखुश बेटी ने माता-पिता व ससुराल वालों से वक्त मांगा, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। ढाई महीने ससुराल में रहने के बाद संगीता एक दिन वन स्टॉप सेंटर के हेल्पलाइन पर शिकायत की। सेंटर की टीम ने उसे ससुराल वालों के यहां से आजाद करवाकर विवाह को अमान्य घोषित करा दिया।
रविवार को संगीत के ससुराल वालों ने भी दहेज के सामान व नकदी वापसी कर दिया है। जबरन शादी के बंधन से छूटने के बाद बिटिया अपने पैरों पर खड़े होकर अपना भविष्य खुद लिखना चाहती है। रविवार को अपने मायके पहुंची बिटिया का सपना है कि वो अपने पैरों पर खड़े होकर समाज में अपना योगदान दें, वहीं बाल विवाह के खिलाफ लोगों को जागरूक करने का भी काम करेंगी।
वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी रश्मि दुबे ने बताया कि 14 अगस्त को इस मामले कि शिकायत मिलने के बाद से कार्रवाई शुरू की गई। इसके बाद लड़की के माता-पिता के साथ ही उसके ससुराल वालों को सेंटर में बुलाकर बाल विवाह कानून के बारे में समझाया गया।
दोनों पक्षों को अपनी गलती का एहसास हुआ और रिश्ते तोड़ने का मायके और ससुराल वालों ने केंद्र में लिखित समझौता किया, लेकिन उसकी शादी को ‘शून्य’ घोषित करने की कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी करा दी गई है ताकि भविष्य में उसे कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।