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परेशानी: वाराणसी में औसतन रोज 200 बाइक, 100 कार जाम में 30 मिनट फंसती हैं, होता है भारी नुकसान

Mon, 16 Feb 2026 01:56 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 16 Feb 2026 01:56 PM IST
सार

वाराणसी जिले में औसतन रोज 200 बाइक, 100 कार 30 मिनट जाम में फंसती हैं। एक बाइक 40 रुपये का पेट्रोल जाम में जला देती है वहीं एक कार में यह नुकसान 80 रुपये तक होता है। 

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On an average 200 bikes and 100 cars stuck in traffic jams for 30 minutes every day in Varanasi
वाराणसी में जाम में फंसी गाड़ियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी शहर में जाम की समस्या डेढ़ दशक से पुरानी है। औसतन 200 बाइक और 100 कार 30 मिनट तक जाम में फंसी रहती हैं। एक बाइक जहां करीब 40 रुपये का पेट्रोल जाम में जला देती है, वहीं एक कार में यह नुकसान 80 रुपये तक पहुंच जाता है।

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सिर्फ एक दिन में ईंधन का यह नुकसान करीब 16 हजार रुपये बैठता है। यही आंकड़ा महीने भर में 4.80 लाख और पूरे साल में करीब 44.80 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। यानी शहर हर साल जाम में खड़े-खड़े लाखों रुपये धुएं में उड़ा रहा है।
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जाम से निजात दिलाने के लिए हर संभव प्रयास पुलिस कर रही है लेकिन निजात नहीं मिल रही। कारण अव्यवस्था, सड़कों पर अतिक्रमण और बेतरतब्बी वाहनों की सड़कों पर पार्किंग है।
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कई बार अफसरों की तरफ से डायवर्जन समेत कई व्यवस्थाएं की गई। लेकिन ट्रैफिक जाम एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो जाता है। खासकर लहरतारा तिराह, लंका चौराहा, पांडेयपुर चौराहा, रथयात्रा और मैदागिन पर सुबह दोपहर और शाम को दो-दो घंटे जाम लगता है।

ये जानकार आश्चर्य होगा कि इस जाम में फंसकर बनारस के लोग एक साल में 44.80 लाख रुपये का इंधन फूंक देते हैं। जबकि इतनी रकम में सभी प्रमुख चौहारों पर सिग्नल लाइट और खाली स्थान पर पार्किंग बन जाए।

एक किमी की दूरी में कहीं भी पार्किंग नहीं

शहर में वाहनों की पार्किंग के लिए एक किमी की दूरी के अंदर एक भी पार्किंग नहीं मिलेगी। जबकि शहर और बाहर से आने वाले वाहनों की संख्या मानक से चार गुना है। जगह न मिलने पर वाहनों को सड़क किनारे या बेतरतीब लगाकर चले जाते हैं।

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उपकरण होगा कारगर
आईआईटी बीएचयू के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. विश्वेश मिश्रा के एक शोध के मुताबिक ट्रैफिक जाम से लोगों को समय ही नहीं ईंधन (पेट्रोल और डीजल) भी ज्यादा खर्च होता है। उन्होंने इस शोध के तहत हर ट्रैफिक सिग्नल पर एक शोर पहचानने वाला उपकरण और एक इमेज प्रोसेसिंग सिस्टम लगाने की बात कही है। ये उपकरण उस सिग्नल के आसपास ट्रैफिक की भीड़ और शोर के स्तर को पहचानेंगे।

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