UP: मजदूर दिवस पर अपने परिवार से मिला 'मजदूर', तमिलनाडु से पहुंच गए थे काशी; रेल हादसे में कट गया था हाथ
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर थाने के एक गांव में रहने वाले सुरेश बालाचारी रेल हादसे का शिकार हो गए थे। उन्हें घायलावस्था में सुरक्षकर्मियों ने एलबीएस अस्पताल में भर्ती कराया था। हादसे के 10वें दिन जब वे अपने परिवार से मिले तो खुशी के आंसू छलक उठे।
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मजदूर दिवस के दिन काशी में एक श्रमिक अपने परिवार से मिला तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह तमिलनाडु से बनारस आया था, लेकिन एक रेल हादसे का शिकार हो गया जिसमें उसका दाहिना हाथ और बाएं हथेली की तीन ऊंगलियां कट गईं थीं। राजघाट से घायलावस्था में बुजुर्ग सुरेश बालाचारी को रामनगर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे ट्राॅमा सेंटर बीएचयू रेफर किया गया इसके बाद कबीर चाैरा स्थित मंडलीय अस्पताल। अस्पताल के आर्थो वाॅर्ड में बीते 27 अप्रैल को सुरेश बालाचारी की मुलाकात समाजसेवी अमन कबीर से हुई। अमन ने उनके परिवार की जानकारी लेने के बाद चेन्नई स्थित अपने परिचितों और समाजसेवियों से बातचीत की।
48 घंटे की मेहनत के बाद यह पता चला कि सुरेश बालाचारी तिरुवल्लूर थाना क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले हैं। वे यहीं से रेलवे में कारपेंटर का काम करते थे। करीब 15 दिन पहले एक ट्रेन हादसे में उनका दाहिना हाथ और बाएं हथेली की ऊंगलियां कट गईं। एलबीएस से इन्हें 21 अप्रैल को बीएचयू फिर वहां से मंडलीय अस्पताल रेफर किया गया था।
सुरेश ने बताया कि इलाज तो काफी अच्छे से हो गया लेकिन कमजोरी के कारण कुछ समझ नहीं आ रहा था। अमन की सहायता से आज यानी गुरुवार को अपने परिवार से मिलकर खुश हूं। सुरेश को लेने उनका बड़ा बेटा, भांजा और एक अन्य व्यक्ति आया था। बेटे को देखते ही सुरेश के आंसू छलक उठे।
उनके बेटे ईएम बालाचारी ने बताया कि को हम लोग काफी दिनों से तलाश रहे थे। तिरुवल्लूर थाने में गुमशुदगी की दर्ज कराई गई थी लेकिन कोई सूचना नहीं मिली रही थी। एकाएक बनारस से अमन कबीर का फोन आया वीडियो काॅलिंग से हम लोगों ने पिताजी से बातचीत की तो हमें काफी राहत महसूस हुई।
लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के सीएमएस डाॅ. गिरिश द्विवेदी ने बताया कि व्यास नगर स्टेशन के सुरक्षा कर्मचारी उन्हें घायलावस्था में लेकर आए थे। 21 अप्रैल को प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें ट्राॅमा सेंटर रेफर किया गया था। बुजुर्ग कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे।