हद है: 16 साल पुरानी गाड़ियों में घूम रहे साहब, परिवहन विभाग के रिकॉर्ड से नंबर गायब; डेटा भी नहीं मिल रहा
Varanasi: वाराणसी में स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों के वाहनों की हालत काफी खस्ता है। इसके साथ ही एंबुलेंस का बीमा, फिटनेस और पॉल्यूशन सभी खत्म हो चुके हैं। मजे की बात यह है कि इन वाहनों की जानकारी परिवहन विभाग के पास भी उपलब्ध नहीं है।
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दूसरों का इलाज करने वाले स्वास्थ्य विभाग को खुद इलाज की ज़रूरत है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की गाड़ियां सड़क पर बिना मानक के चल रही हैं। इतना ही नहीं, सीएमओ कार्यालय में मरीजों की सुविधा के लिए खड़ी एंबुलेंस का बीमा, फिटनेस और पॉल्यूशन तक समाप्त हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग में तैनात एसीएमओ से लेकर एसआईसी तक की गाड़ियां बिना मानक के सड़क पर दौड़ रही हैं। इनमें कई ऐसी भी हैं, जिनका डेटा परिवहन विभाग के पास भी उपलब्ध नहीं है।
200 से अधिक प्राइवेट एंबुलेंस मानकों के विपरीत दौड़ रहीं : स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त डेटा के अनुसार, शहर में हेल्पलाइन नं. 108 की 28 एंबुलेंस और 102 की 38 एंबुलेंस चल रही हैं। इसके अलावा 200 से अधिक प्राइवेट एंबुलेंस भी दौड़ रही हैं। इन एंबुलेंस के लिए भी कोई मानक तय नहीं है। इनमें न तो मरीजों के लिए फर्स्ट एड बॉक्स होता है, न मेडिकल टीम और न ही किराए का कोई मानक। आए दिन मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच किराए को लेकर विवाद होता रहता है।
केस 1 : कबीरचौरा स्थित जिला महिला अस्पताल की एसआईसी की गाड़ी, जिसका नंबर यूपी 32 एफजी 3444 है। परिवहन विभाग के एप पर चेक करने पर पाया गया कि इस गाड़ी की जानकारी ही विभाग के पास नहीं है। अस्पताल में ही एक अन्य वाहन (नं. यूपी 32 बीजी 3411), जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ है, उसका फिटनेस 2 मई 2009 यानी आज से 16 साल पहले ही समाप्त हो चुका है।
केस 2 : मंडलीय अस्पताल के एसआईसी की कार, जिसका नंबर यूपी 32 ईजी 2660 है। इसका प्रदूषण सर्टिफिकेट 25 मई 2023 को एक्सपायर हो चुका है। अस्पताल में आने वाली एंबुलेंस यूपी 32 ईजी 4948 का बीमा 29 मई 2025 को समाप्त हो चुका है। बीते छह महीने से गाड़ी बिना बीमा के सड़क पर दौड़ रही है। इसका प्रदूषण सर्टिफिकेट भी 3 दिसंबर 2025 को एक्सपायर हो चुका है।
केस 3 : दुर्गाकुंड स्थित सीएमओ कार्यालय में एसीएमओ की गाड़ी यूपी 32 बीजी 3705 का बीमा 24 नवंबर 2009 को समाप्त हो चुका है। 16 वर्षों से यह गाड़ी अधिकारियों को लाने और ले जाने का काम कर रही है। इसका फिटनेस भी तीन माह पहले नवंबर में समाप्त हो चुका है। परिसर में खड़ी पांच एंबुलेंस का प्रदूषण सर्टिफिकेट भी समाप्त हो चुका है।
सरकारी गाड़ियों का इंश्योरेंस नहीं होता है। फिटनेस और अन्य खामियों को लेकर विभाग से जानकारी ली जाएगी। - सुधांशु रंजन, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन)