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सिक्किम में स्थापित हो श्रीकाशी विद्वत परिषद का कार्यालय: राज्यपाल
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सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने कहा कि काशी विद्वत परिषद का नाम पूरी दूनिया में हैं। इसका एक कार्यालय सिक्किम में भी स्थापित होना चाहिए। उन्होंने बुधवार को सिगरा स्थित मौलवी बाग में श्रीकाशी विद्वत परिषद के कार्यालय का उद्घाटन के मौके पर ये बातें कहीं। सिक्किम के राज्यपाल ने कहा कि काशी विद्वत परिषद का काम दुनिया देख रही है। विद्वत परिषद ने हमेशा समाज का मार्गदर्शन किया है। धर्म शास्त्रों के निर्णय की बारी आती है तो सभी काशी की ओर देखते हैं। पारंपरिक शास्त्रों के संरक्षण में डिजिटल संसाधनों और इंटरनेशनल स्टूडियो का शुरू होना खुशी की बात है। उन्होंने काशी परिषद के विद्वानों को सिक्किम आमंत्रित किया। इस दौरान बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी, पूर्व मंत्री डाॅ. नीलकंठ तिवारी मौजूद रहे। अध्यक्षता शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने की। महापौर अशोक कुमार तिवारी, पूर्व महापौर रामगोपाल मोहले, महंत शंकरपुरी, परिषद के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय मौजूद रहे।
शास्त्रार्थ की परंपरा को करेंगे पुनर्जीवित
वाराणसी। सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने कहा कि वादे वादे जायते तत्वबोधः इस सिद्धांत को मानते हुए शास्त्रार्थ भारत की प्राचीन अकादमिक परंपरा रही है। यह हार्दिक प्रसन्नता का विषय है कि भारत की इस मौलिक परंपरा को पुनर्जीवित करने का बीड़ा काशी के विद्वत समाज ने उठाया है। बुधवार को सिद्धगिरिबाग स्थित ब्रह्म निवास आश्रम पर पहले पाक्षिक शास्त्रार्थ का उद्घाटन करते हुए उन्होंने ये विचार रखे। अध्यक्षता करते हुए प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि शास्त्रार्थ की परंपरा अब धीरे धीरे खत्म हो रही है। काशी में अब साल में एक बार नागकूप पर शास्त्रार्थ का आयोजन होता है। संचालन प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने किया। ब्यूरो
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शास्त्रार्थ की परंपरा को करेंगे पुनर्जीवित
वाराणसी। सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने कहा कि वादे वादे जायते तत्वबोधः इस सिद्धांत को मानते हुए शास्त्रार्थ भारत की प्राचीन अकादमिक परंपरा रही है। यह हार्दिक प्रसन्नता का विषय है कि भारत की इस मौलिक परंपरा को पुनर्जीवित करने का बीड़ा काशी के विद्वत समाज ने उठाया है। बुधवार को सिद्धगिरिबाग स्थित ब्रह्म निवास आश्रम पर पहले पाक्षिक शास्त्रार्थ का उद्घाटन करते हुए उन्होंने ये विचार रखे। अध्यक्षता करते हुए प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि शास्त्रार्थ की परंपरा अब धीरे धीरे खत्म हो रही है। काशी में अब साल में एक बार नागकूप पर शास्त्रार्थ का आयोजन होता है। संचालन प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने किया। ब्यूरो
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