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Varanasi News: यूपी और ओडिशा के रिश्तों को नई ऊर्जा देकर विदा हुआ ओडिशा परब
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मन मोहक प्रस्तुति---- बनारस के टीएफसी में हुए ओडिशा पर्व के मौके पर ओडिशा के आलोक पंडा एन्ड पार
वाराणसी। बड़ा लालपुर स्थित पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल (टीएफसी) में आयोजित तीन दिवसीय ओडिशा परब का सोमवार को रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ समापन हुआ। तीन दिनों तक काशी में ओडिशा की समृद्ध कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। आयोजन के अंतिम दिन देर शाम तक वरिष्ठ अधिकारी, कलाकार, हस्तशिल्पी, उद्यमी और आयोजन से जुड़े प्रतिनिधि दल सुखद यादों के साथ ओडिशा के लिए रवाना हो गए।
सोमवार को पूरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अविरल धारा बहती रही, जहां कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। अंतिम दिन ओडिशा के विभिन्न जिलों की समृद्ध लोक परंपराओं का शानदार प्रदर्शन किया गया। इसमें बौध जिले का पारंपरिक बौध पातर सौरा, गंजाम का विख्यात पशु मुखा नृत्य, पुरी की धार्मिक धरोहर साही जात्रा व शास्त्रीय गोटीपुआ नृत्य, कालाहांडी का जोशीला घुमुरा, खुर्दा की ऐतिहासिक युद्धकला पाइका अखाड़ा, बोलांगीर का बजासाल, कोरापुट का जनजातीय धेमसा और संबलपुर का ऊर्जावान संबलपुरी नृत्य शामिल रहे। कलाकारों की थाप और लय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ओडिशा पर्यटन निदेशक दीपांकर महापात्रा ने बताया कि तीन दिवसीय इस आयोजन से यूपी और ओडिशा के सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे।
सांस्कृतिक छटा के साथ-साथ इस महोत्सव में व्यावसायिक दृष्टि से भी जबरदस्त उत्साह देखा गया। परिसर में लगे कुल 32 स्टॉलों पर ओडिशा के पारंपरिक हथकरघा उत्पादों, संबलपुरी साड़ियों, धातु व काष्ठ शिल्प, पट्टचित्र और प्रामाणिक व्यंजनों की भारी मांग रही। काशीवासियों ने जमकर खरीदारी की, जिससे तीन दिनों के भीतर इन स्टॉलों पर लाखों रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। स्थानीय लोगों के जबरदस्त समर्थन और उत्साह से ओडिशा से आए उद्यमियों और शिल्पकारों के चेहरे खिल उठे।
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सोमवार को पूरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अविरल धारा बहती रही, जहां कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। अंतिम दिन ओडिशा के विभिन्न जिलों की समृद्ध लोक परंपराओं का शानदार प्रदर्शन किया गया। इसमें बौध जिले का पारंपरिक बौध पातर सौरा, गंजाम का विख्यात पशु मुखा नृत्य, पुरी की धार्मिक धरोहर साही जात्रा व शास्त्रीय गोटीपुआ नृत्य, कालाहांडी का जोशीला घुमुरा, खुर्दा की ऐतिहासिक युद्धकला पाइका अखाड़ा, बोलांगीर का बजासाल, कोरापुट का जनजातीय धेमसा और संबलपुर का ऊर्जावान संबलपुरी नृत्य शामिल रहे। कलाकारों की थाप और लय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ओडिशा पर्यटन निदेशक दीपांकर महापात्रा ने बताया कि तीन दिवसीय इस आयोजन से यूपी और ओडिशा के सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे।
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सांस्कृतिक छटा के साथ-साथ इस महोत्सव में व्यावसायिक दृष्टि से भी जबरदस्त उत्साह देखा गया। परिसर में लगे कुल 32 स्टॉलों पर ओडिशा के पारंपरिक हथकरघा उत्पादों, संबलपुरी साड़ियों, धातु व काष्ठ शिल्प, पट्टचित्र और प्रामाणिक व्यंजनों की भारी मांग रही। काशीवासियों ने जमकर खरीदारी की, जिससे तीन दिनों के भीतर इन स्टॉलों पर लाखों रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। स्थानीय लोगों के जबरदस्त समर्थन और उत्साह से ओडिशा से आए उद्यमियों और शिल्पकारों के चेहरे खिल उठे।
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