{"_id":"5c46e6efbdec22737548a38f","slug":"nri-said-that-foreign-countries-see-india-as-labour-market","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"प्रवासियों का छलका दर्द, बोले- भारत को इस नजर से देखते हैं अन्य देश ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रवासियों का छलका दर्द, बोले- भारत को इस नजर से देखते हैं अन्य देश
Wed, 23 Jan 2019 10:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा
गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 23 Jan 2019 10:16 AM IST
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प्रवासी भारतीय दिवस
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काशी आए प्रवासियों का दर्द यह है कि भारत को अब भी दूसरे देश एक लेबर मंडी के रूप में ही देखते हैं। वे चाहते हैं कि दूसरे देशों का नजरिया बदले। खासकर उनके लिए जो यूपी, बिहार के साथ पूर्वांचल के लाखों लोग अपनी बेहतरी के लिए दूसरे देशों में जाकर बसे हैं।
भारत के लोगों के दिमाग और श्रम का इस्तेमाल दूसरे देश बखूबी कर रहे हैं। इसके एवज में जो पैसा उन्हें मिलता है, वह उस देश के हिसाब से काफी कम होता है। यूएस, मॉरीशस, मलयेशिया से आए प्रवासियों में हरसिमरत कौर, धनंजय, हरि कुमार आदि ने कहा कि दूसरे देशों में हर क्षेत्र में भारतीय आगे हैं।
वहां कई अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने में भारतीयों के दिमाग का इस्तेमाल किया गया है। दूसरे देशों की जीडीपी को बढ़ाने में भी प्रवासी भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है। रक्षा क्षेत्रों में हो रहे अनुसंधान के क्षेत्र में भी भारतीय अन्य देशों की अपेक्षा आगे हैं। ऐसे लोगों को उचित प्लेटफार्म की आवश्यकता है।
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दूसरे देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को एकजुट करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। आज भी कई प्रवासी ऐसे हैं जो अपनी माटी को प्रणाम करना चाहते हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए बेहतर नीति बनाना चाहिए ताकि उन्हें और सुविधाएं अपने मातृभूमि वाले देश में मिल सके।
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भारत के लोगों के दिमाग और श्रम का इस्तेमाल दूसरे देश बखूबी कर रहे हैं। इसके एवज में जो पैसा उन्हें मिलता है, वह उस देश के हिसाब से काफी कम होता है। यूएस, मॉरीशस, मलयेशिया से आए प्रवासियों में हरसिमरत कौर, धनंजय, हरि कुमार आदि ने कहा कि दूसरे देशों में हर क्षेत्र में भारतीय आगे हैं।
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वहां कई अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने में भारतीयों के दिमाग का इस्तेमाल किया गया है। दूसरे देशों की जीडीपी को बढ़ाने में भी प्रवासी भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है। रक्षा क्षेत्रों में हो रहे अनुसंधान के क्षेत्र में भी भारतीय अन्य देशों की अपेक्षा आगे हैं। ऐसे लोगों को उचित प्लेटफार्म की आवश्यकता है।
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दूसरे देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को एकजुट करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। आज भी कई प्रवासी ऐसे हैं जो अपनी माटी को प्रणाम करना चाहते हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए बेहतर नीति बनाना चाहिए ताकि उन्हें और सुविधाएं अपने मातृभूमि वाले देश में मिल सके।
गांधी के साथ ही इन दिनों मोदी की चर्चा
पीएम मोदी
दूसरे देशों में आज भी महात्मा गांधी का बहुत सम्मान है। अहिंसा के पुजारी ने जिस प्रकार देश को आजाद कराया। उनके कार्यों की चर्चा बहुत होती है। उनके बारे में हमारे पूर्वज भी बताते थे। किस प्रकार से उन्होंने संघर्ष कर भारतमाता के सम्मान की रक्षा की।
उसी राह पर इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चल रहे हैं। दूसरे देशों में गांधी के बाद इस समय नरेंद्र मोदी की चर्चा होती है। उनके विदेश दौरों में भारतवंशी उन्हें देखने और बातचीत के लिए उमड़ते हैं।
उसी राह पर इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चल रहे हैं। दूसरे देशों में गांधी के बाद इस समय नरेंद्र मोदी की चर्चा होती है। उनके विदेश दौरों में भारतवंशी उन्हें देखने और बातचीत के लिए उमड़ते हैं।