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स्कूलों में पढ़ाई संग अब सेहत की डोज
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सरकारी स्कूलों में अब नौनिहालों को पढ़ाई संग सेहत की डोज भी मिलेगी। एमडीएम में हरी सब्जी का स्वाद लेने के साथ ही खेतीबाड़ी के गुर भी सीखेंगे। इसके लिए शासन ने 200 स्कूलों में किचन गार्डेन स्थापित करने के लिए 10 लाख रुपये आवंटित कर दिए हैं। स्कूल परिसर में स्थित खाली जगह में सब्जी उगाई जाएगी। पूर्व में 10 स्कूलों में शिक्षकों ने निजी खर्च से यह व्यवस्था शुरू की थी, हालांकि अब सरकार ने इसको आगे बढ़ाने की पहल कर दी है।
जिले में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। जिसमें एक लाख 83 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को सप्ताह में प्रतिदिन अलग-अलग व्यंजन खाने के लिए दिए जाते हैं। शिक्षक, ग्राम प्रधान और एसएमसी के माध्यम से एमडीएम का संचालन होता है, लेकिन अक्सर हरी सब्जी न होने से सोयाबीन आदि ही बनाकर दे दी जाती है। एमडीएम के बजट में कमी लाने और स्कूल को हरा-भरा बनाने के लिए अब किचेन गार्डन बनाया जाएगा। इससे बच्चों को जहां हरी सब्जी स्कूल परिसर में मिलेगी, वहीं खेतीबाड़ी के बारे में भी वह जानकारी हासिल कर सकेंगे। सब्जी की खेती में सिर्फ जैविक खाद का प्रयोग किया जाएगा। पूर्व में चौरी के कंधिया, सम्हई भटानी सहित 10 स्कूलों के शिक्षकों ने अपने वेतन से ही किचन गार्डेन स्थापित किया था, लेकिन अब शासन ने 200 स्कूलों को पांच-पांच हजार रुपये की दर से 10 लाख रुपये आवंटित किया है। इससे नए सत्र में बच्चों को मध्याह्न भोजन में हरी सब्जियां मिलनी शुरू हो जाएंगी। उधर, शिक्षकों संग रसोइयों की मेहनत से स्कूल के किचन गार्डन में सरपुतिया, तरोई, बोड़ा, भिंडी, बैगन और हरी मिर्च संग अन्य सब्जी का उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा मूली, मेथी, सेम, टमाटर, गोभी, पालक, लौकी, करेला की खेती भी होगी। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह का कहना है कि जिले के 200 स्कूलों में किचन गार्डेन की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये आवंटित किए जा चुके हैं। एसएमएसी और हेडमास्टर के खाते में ये रकम भेजी जाएगी।
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जिले में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। जिसमें एक लाख 83 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को सप्ताह में प्रतिदिन अलग-अलग व्यंजन खाने के लिए दिए जाते हैं। शिक्षक, ग्राम प्रधान और एसएमसी के माध्यम से एमडीएम का संचालन होता है, लेकिन अक्सर हरी सब्जी न होने से सोयाबीन आदि ही बनाकर दे दी जाती है। एमडीएम के बजट में कमी लाने और स्कूल को हरा-भरा बनाने के लिए अब किचेन गार्डन बनाया जाएगा। इससे बच्चों को जहां हरी सब्जी स्कूल परिसर में मिलेगी, वहीं खेतीबाड़ी के बारे में भी वह जानकारी हासिल कर सकेंगे। सब्जी की खेती में सिर्फ जैविक खाद का प्रयोग किया जाएगा। पूर्व में चौरी के कंधिया, सम्हई भटानी सहित 10 स्कूलों के शिक्षकों ने अपने वेतन से ही किचन गार्डेन स्थापित किया था, लेकिन अब शासन ने 200 स्कूलों को पांच-पांच हजार रुपये की दर से 10 लाख रुपये आवंटित किया है। इससे नए सत्र में बच्चों को मध्याह्न भोजन में हरी सब्जियां मिलनी शुरू हो जाएंगी। उधर, शिक्षकों संग रसोइयों की मेहनत से स्कूल के किचन गार्डन में सरपुतिया, तरोई, बोड़ा, भिंडी, बैगन और हरी मिर्च संग अन्य सब्जी का उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा मूली, मेथी, सेम, टमाटर, गोभी, पालक, लौकी, करेला की खेती भी होगी। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह का कहना है कि जिले के 200 स्कूलों में किचन गार्डेन की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये आवंटित किए जा चुके हैं। एसएमएसी और हेडमास्टर के खाते में ये रकम भेजी जाएगी।
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