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पंचतत्व में विलीन हुए साहित्यकार मनु शर्मा, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

Fri, 10 Nov 2017 10:44 AM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Fri, 10 Nov 2017 10:44 AM IST
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Noted literature padmashri manu sharma funeral in kashi
मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला
सुप्रसिद्ध साहित्यकार पद्मश्री मनु शर्मा का पार्थिव शरीर गुरुवार की सुबह मणिकर्णिका महाश्मशान पर पंचतत्व में विलीन हो गया। राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र और एसएसपी आरके भारद्वाज की मौजूदगी में सशस्त्र जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। मुखाग्नि बड़े पुत्र शरद शर्मा ने दी।
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अंतिम संस्कार के समय घाट पर प्रदेश के विधि, न्याय मंत्री बृजेश पाठक, सैनिक कल्याण, होमगार्ड्स राज्य मंत्री अनिल राजभर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव समेत कई विधायक और विभिन्न दलों के नेताओं के अलावा साहित्य जगत से जुड़े लोग घाट पर मौजूद थे। लंबी बीमारी के बाद 89 वर्ष की अवस्था में मनु शर्मा का निधन बुधवार की सुबह बड़ी पियरी स्थित उनके आवास पर हो गया था।
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मनु शर्मा के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही उनके घर पर लोगों का तांता लगा रहा। सुबह 8:45 बजे फूलों से सजे खुले वाहन पर उनका शव रखकर अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान परिवारीजनों, शुभेच्छुओं के अलावा साहित्य के सफर में उनके साथ रहे लोगों की आंखें नम हो गईं।
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हर-हर महादेव के जयकारे के साथ शवयात्रा कबीर रोड, लोहटिया, मैदागिन, बुलानाला, नीचीबाग से चौक पहुंची। यहां विश्वनाथ मंदिर के शास्त्री अमरकांत और पर्यवेक्षक योगेंद्र गर्ग ने मंगला आरती का चंदन पार्थिव शरीर पर अर्पित किया।

इसके बाद शवयात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंची। यहां डीएम की मौजूदगी में सशस्त्र जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। एसएसपी ने सलामी दी। इस दौरान उनके शव पर पुष्प अर्पित करने वालों का तांता लगा रहा। लोग उनके छोटे पुत्र हेमंत शर्मा के अलावा अन्य परिवारीजनों को ढांढस बंधा रहे थे।

महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, सुरेंद्र नारायण सिंह, नीलरतन पटेल नीलू, एमएलसी लक्ष्मण आचार्य, सपा के पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल, पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी, चंदौली के पूर्व सांसद रामकिशुन यादव, सरयूपारीण ब्राह्मण परिषद के अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्र, दयाशंकर मिश्र दयालु, अशोक तिवारी, अशोक पांडेय के अलावा साहित्यकार डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र, डॉ. गया सिंह, डॉ. पवन कुमार शास्त्री समेत सैकड़ों लोगों ने घाट पर नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। 

‘मैं डायनासोर के जीवाश्म की तरह पढ़ा जाऊंगा...’

Noted literature padmashri manu sharma funeral in kashi
2015 में पद्मश्री से राष्ट्रपति ने किया ता सम्मानित - फोटो : अमर उजाला
‘आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसाें... और परसों नहीं तो बरसों बाद मैं डायनासोर के जीवाश्म की तरह पढ़ा जाऊंगा...।’ यह कहना था कलम के धनी साहित्यकार मनु शर्मा का। उन्हें अपने लेखन पर भरोसा था। विषम से विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी कागज-कलम से नाता नहीं तोड़ा। उन्हें पूरा यकीन था कि उनके लेखन को समझा जाएगा और ऐसी ही हुआ। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान की शुरुआत के साथ ही सफाई नवरत्नों की घोषणा की थी जिनमें से एक मनु शर्मा भी थे। तब मनु शर्मा ने उनसे आग्रह किया था कि उनकी उम्र की सांझ हो रही है।

स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। ऐसे में वे स्वयं साफ-सफाई में सहयोग नहीं कर पाएंगे। तब उनसे कहा गया कि आप प्रेरणास्रोत बने रहें। बाकी काम युवा पीढ़ी कर लेगी। इसके बाद उन्होंने पीएम के स्वच्छता अभियान का ‘नवरत्न’ बनने के लिए हामी भरी थी।  

‘जो बोलते हो उसे ही लिखो... लिखना आ जाएगा’
हिंदी साहित्य में हमेशा खेमेबंदी से दूर रहे मनु शर्मा जीवन पर्यंत खुद की बनाई राह पर चलते रहे। किसी प्रकार के विवाद के फेर में कभी नहीं पड़े। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में समाज का वास्तविक संघर्ष प्रतिबिंबित होता था। उनके भतीजे तुषार ने बताया कि अक्सर नए रचनाकार उनके पास आते थे।

कहते थे कि साहित्य लेखन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं पर क्या लिखें, कैसे लिखें, समझ नहीं आता...। दादा जी कुछ सिखा दीजिए। तब उनका जवाब होता था- ‘जो बोलते हो उसे ही लिखो, लिखना आ जाएगा।’ मनु शर्मा युवा रचनाकारों को हमेशा कर्मपथ पर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया करते थे। उनका कहना था कि साहित्य सृजन के लिए खूब पढ़ना चाहिए। साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए पढ़ना जरूरी है।

 
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