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वाराणसी में बहुमंजिले व्यावसायिक भवनों के सामने ‘नो पार्किंग जोन’

Tue, 29 Aug 2017 04:09 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 29 Aug 2017 04:09 PM IST
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no parking zone in varanasi  multi storey commercial building
पार्किंग - फोटो : अमर उजाला
विकास प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने कहा कि वीडीए की सीमा में आने वाले अवैध निर्माण 15 दिन में चिह्नित कर ध्वस्त करें।
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साथ ही बहुमंजिले व्यावसायिक भवनों के मुख्य गेट के सामने की सड़क को ‘नो पार्किंग जोन’ घोषित करें और वहां इसका बोर्ड लगाएं। इसके बाद भी वाहन खड़े होते हैं तो भवन स्वामियों के साथ ही वाहन स्वामियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करें। 
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कमिश्नर सोमवार को मंडलायुक्त सभागार में वीडीए बोर्ड बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने निर्देशित किया कि शहर के बहुमंजिले व्यावसायिक एवं आवासीय भवनों के बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था की जाए।
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उन्होंने गंगा किनारे 200 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों की आवश्यकता एवं नियमानुसार मरम्मत के लिए अनुमति देने को कहा। शहर के सभी पार्कों के सुंदरीकरण एवं उनमें पौधे लगाने के निर्देश दिए। कहा कि जिन भवनों का मानचित्र प्राधिकरण ने स्वीकृत कर दिया है, उसे वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।

साथ ही, जो अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाएं, उनकी सूची भी अपलोड की जाए। कमिश्नर ने निर्माणाधीन भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाने की हिदायत दी। कहा कि विकास प्राधिकरण अपनी अनुपयोगी संपत्ति को चिह्नित कर उसे उपयोग में लाए। जहां अतिक्रमण हो, वहां अभियान चलाकर भूमि या भवन खाली कराए जाएं। 

वीडीए के खाली प्लॉटों पर कमिश्नर ने जताई नाराजगी

no parking zone in varanasi  multi storey commercial building
नितिन रमेश गोकर्ण - फोटो : amar ujala
वीडीए के आवासीय प्लॉटों के खाली होने पर मंडलायुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होेंने कहा कि इसका प्रचार-प्रसार कर हर हाल में बिक्री सुनिश्चित कराएं। उन्होंने वीडीए सचिव विशाल सिंह को निर्देश दिया कि  मानचित्र स्वीकृत किए जाने की प्रक्रिया को सरल बनाएं और आवेदन को तीन दिन के अंदर निस्तारित करें।

भवन निर्माण के लिए आवेदनकर्ताओं से आग्रह किया कि यदि निर्धारित अवधि में मानचित्र प्रकरण निस्तारित न हो तो आवेदक इसकी शिकायत सचिव से करें। उन्होंने सचिव को निर्देशित किया कि शिकायत मिलने पर जिस पटल पर प्रकरण लंबित हो, उस पटल सहायक के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही विकास कार्यों के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाएं।
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