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सीएम योगी का 15 जून तक का अल्टीमेटमः वाराणसी में न गिट्टी न ठेकेदार, गड्ढे कैसे पटेंगे सरकार

ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 23 May 2017 02:19 PM IST
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बदहाल सड़क से होकर गुजरते राहगीर।
बदहाल सड़क से होकर गुजरते राहगीर। - फोटो : Amar Ujala

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सड़कों के गड्ढामुक्त अभियान को निर्धारित 15 जून तक पूरा करने के लिए रोजाना 17 किलोमीटर सड़क दुरुस्त कराने का लक्ष्य तय करने वाला पीडब्ल्यूडी अब तक साढ़े नौ किलोमीटर के औसत तक भी नहीं पहुंच पाया है।
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अभियान शुरू हुए 17 दिन हो गए और अब तक सिर्फ 160 किलोमीटर सड़क गड्ढामुक्त की गई है। अब 24 दिन बाकी हैं और बनाने के लिए बची है 546 किलोमीटर सड़क। तय समयावधि में काम पूरा करने के लिए अब रोजाना कम से कम करीब 23 किलोमीटर सड़क बनानी होगी।


तय समय पर सड़कों को गड्ढामुक्त करने के दावे पर विभागीय अभियंता कायम हैं लेकिन न सड़क बनाने के लिए गिट्टी उपलब्‍ध हो पा रही है न ठेकेदार। अवैध खनन और ओवरलोडिंग बंद होने के बाद से निर्माण सामग्री की बढ़ी कीमतें दोहरी चुनौती खड़ी कर रही हैं।

शासन के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी ने जिले की 706 किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त करने की कार्ययोजना बनाई है। तय समय काम पूरा करने के तमाम दावों के बावजूद विभाग अब तक मात्र 22.66 प्रतिशत सड़कें दुरुस्त कर पाया है।

विभागीय सूत्रों की मानें तो अधिकारी दावे चाहे जो करें लेकिन सड़क मरम्मत की राह में दोहरी चुनौतियां सामने हैं। अवैध खनन और ओवरलोडिंग बंद होने से बाजार में गिट्टी के दाम में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। दूसरे, बाजार में गिट्टी की किल्लत से भी जूझना पड़ रहा है।

पूर्वांचल के बड़े सप्लायर और ठेकेदारों की मानें तो शासन स्तर से निर्माण सामग्री के दाम में 16 प्रतिशत रेट रिवाइज किया गया है लेकिन गिट्टी की कीमत दोगुनी होने से रेट रिवाइज का भी कोई असर नहीं है। 40 हजार रुपये प्रति ट्रक गिट्टी रेट रिवाइज होने पर 46 हजार 400 रुपये की हो रही है जबकि बाजार में इसका मौजूदा दाम लगभग 80 हजार है।

ऐसी स्थिति में सड़कों की मरम्मत के लिए ई टेंडरिंग से बड़ेे ठेेकेदार किनारा किए हुए हैं, क्योंकि गिट्टी के दाम में उलटफेर से उन्हें नुकसान की आशंका है। बाजार में पहले पांच सौ ट्रक गिट्टी औसतन रोजाना डाला खदान से आया करती थीं लेकिन मौजूदा समय अवैध खनन बंद होने से हालात ऐसे हैं कि 100 गाड़ी भेजने पर मात्र पांच ट्रक गिट्टी मिल रही हैं।

कुछ ऐसी ही स्थिति बालू की भी है। दूसरे प्रांतों से बालू-गिट्टी की आवक है लेकिन सप्‍लायरों की मानें तो उसे मंगाने में लागत और अधिक आ रही है।  पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं का कहना है कि ओवरलोडिंग पर रोक का सरकार का निर्णय उचित है और इससे सड़कों की दशा बेहतर होगी।

ओवरलोडिंग से पीडब्ल्यूडी की ही सड़कें अधिक खराब होती थीं। गिट्टी और बालू की किल्लत के बारे में शासन को अवगत कराया गया है। जो संसाधन उपलब्ध हैं, उनसेे तय समय पर काम पूरा कराया जाएगा।

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