UP: वाराणसी में गंगा बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन पर एनजीटी ने एनएमसीजी से मांगा स्पष्टीकरण, 21 सितंबर को तारीख
Varanasi News: वाराणसी में गंगा बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन पर एनजीटी ने एनएमसीजी से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
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अधिकरण ने कहा कि एनएमसीजी की अपनाई सीमांकन प्रक्रिया गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के प्रावधानों से मेल खाती नहीं दिखती। दरअसल, याचिकाकर्ता के वकील सौरभ तिवारी ने आरोप लगाया था कि यह निर्माण इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों और गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016, का उल्लंघन करता है। एनजीटी के 20 जुलाई के आदेश बुधवार के सार्वजनिक किए आदेश में अधिकरण ने बताया कि एनएमसीजीने 15 जुलाई को हलफनामा दाखिल किया।
इसमें कहा गया कि एनएमसीजी ने उत्तर प्रदेश सरकार से सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से जल-विज्ञान और तकनीकी अध्ययन कराकर हर पांच साल में एक बार और हर 25 साल में एक बार आने वाले समय यानी पुनरावृत्ति अवधि के हिसाब से बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन पूरा करने को कहा था। इसके लिए हलफनामे में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के जुलाई 2025 में जारी तकनीकी दिशानिर्देशों का हवाला दिया गया।
एनजीटी ने एनएमसीजी के बाढ़ क्षेत्र तय करने के पैमानों पर उठाए सवाल
इस पर एनजीटी ने कहा कि 2016 के गंगा पुनर्जीवन आदेश में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की कोई परिभाषा नहीं है। साथ ही 2016 के आदेश के खंड 3(I) के मुताबिक, बाढ़ क्षेत्र का निर्धारण 100 वर्षों में एक बार आने वाली सबसे ऊंची बाढ़ के स्तर के आधार पर होना चाहिए, जिसके आने की वार्षिक संभावना महज एक फीसदी होती है, न कि एनएमसीजी के यूपी सरकार को दिए मानदंडो के अनुसार, इसलिए उसे इसका स्पष्टीकरण देना होगा। एनजीटी ने यह भी कहा कि एनएमसीजी ने सीडब्ल्यूसी के जुलाई 2025 के दिशानिर्देशों का जिक्र, लेकिन दस्तावेज को रिकॉर्ड के तौर पर पेश नहीं किया, इसलिए एनएमसीजी के वकील को इन्हें पेश करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया गया। इसके अलावा, एनजीटी ने अधिवक्ता तिवारी की मामले में जल शक्ति मंत्रालय और सीडब्ल्यूसी को पक्षकार बनाए जाने की अपील भी स्वीकार कर ली।