फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   NGT seeks clarification from NMCG on demarcation of the Ganga floodplains in Varanasi

UP: वाराणसी में गंगा बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन पर एनजीटी ने एनएमसीजी से मांगा स्पष्टीकरण, 21 सितंबर को तारीख

Thu, 23 Jul 2026 02:27 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Thu, 23 Jul 2026 02:27 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में गंगा बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन पर एनजीटी ने एनएमसीजी से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।

विज्ञापन
NGT seeks clarification from NMCG on demarcation of the Ganga floodplains in Varanasi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी ) से वाराणसी में गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) के सीमांकन के लिए अपनाए गए मानदंडों का आधार स्पष्ट करने को कहा है। यह बात एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने वाराणसी के रामघाट में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में एम/एस श्री वारी केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के अवैध निर्माण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कही। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
विज्ञापन


अधिकरण ने कहा कि एनएमसीजी की अपनाई सीमांकन प्रक्रिया गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के प्रावधानों से मेल खाती नहीं दिखती। दरअसल, याचिकाकर्ता के वकील सौरभ तिवारी ने आरोप लगाया था कि यह निर्माण इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों और गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016, का उल्लंघन करता है। एनजीटी के 20 जुलाई के आदेश बुधवार के सार्वजनिक किए आदेश में अधिकरण ने बताया कि एनएमसीजीने 15 जुलाई को हलफनामा दाखिल किया। 
विज्ञापन


इसमें कहा गया कि एनएमसीजी ने उत्तर प्रदेश सरकार से सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से जल-विज्ञान और तकनीकी अध्ययन कराकर हर पांच साल में एक बार और हर 25 साल में एक बार आने वाले समय यानी पुनरावृत्ति अवधि के हिसाब से बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन पूरा करने को कहा था। इसके लिए हलफनामे में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के जुलाई 2025 में जारी तकनीकी दिशानिर्देशों का हवाला दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

एनजीटी ने एनएमसीजी के बाढ़ क्षेत्र तय करने के पैमानों पर उठाए सवाल
इस पर एनजीटी ने कहा कि 2016 के गंगा पुनर्जीवन आदेश में सक्रिय बाढ़ क्षेत्र की कोई परिभाषा नहीं है। साथ ही 2016 के आदेश के खंड 3(I) के मुताबिक, बाढ़ क्षेत्र का निर्धारण 100 वर्षों में एक बार आने वाली सबसे ऊंची बाढ़ के स्तर के आधार पर होना चाहिए, जिसके आने की वार्षिक संभावना महज एक फीसदी होती है, न कि एनएमसीजी के यूपी सरकार को दिए मानदंडो के अनुसार, इसलिए उसे इसका स्पष्टीकरण देना होगा। एनजीटी ने यह भी कहा कि एनएमसीजी ने सीडब्ल्यूसी के जुलाई 2025 के दिशानिर्देशों का जिक्र, लेकिन दस्तावेज को रिकॉर्ड के तौर पर पेश नहीं किया, इसलिए एनएमसीजी के वकील को इन्हें पेश करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया गया। इसके अलावा, एनजीटी ने अधिवक्ता तिवारी की मामले में जल शक्ति मंत्रालय और सीडब्ल्यूसी को पक्षकार बनाए जाने की अपील भी स्वीकार कर ली।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed