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यह है हाल: ...तो पुरानी किताबों से पढ़ेंगे नौनिहाल, 95 फीसदी विद्यालयों में नहीं पहुंचीं पाठ्यक्रम की किताबें

Sat, 30 Mar 2024 05:58 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 30 Mar 2024 05:58 PM IST
सार

New Session of School: वाराणसी में स्कूल प्रबंधकों ने इस समस्या के बाबत बताया है कि बच्चों को अपने से ऊपर की कक्षा के छात्रों से किताबें मांग कर पढ़नी होंगी। वहीं, आराजीलाइन और सेवापुरी ब्लॉक के कुछ विद्यालयों तक ही किताबें पहुंचने का दावा किया जा रहा है, जबकि अन्य विद्यालयों को अब तक किताबों का इंतजार है।

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new session Course books did not reach 95 percent schools in varanasi
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को मंगनी की पुरानी किताबों से पढ़ाई शुरू करनी पड़ेगी। नया सत्र शुरू होने में महज एक दिन का समय बचा है, जबकि अब तक जिले के लगभग 95 फीसदी विद्यालयों में पाठ्यक्रम की किताबें नहीं पहुंची हैं। यूनिफॉर्म और जूता-मोजा आदि का पैसा भी बच्चों को नहीं मिल पाया है। ऐसे में एक अप्रैल से शुरू होने जा रहे नए शैक्षणिक सत्र में बच्चों को बिना किताब, यूनिफॉर्म और जूते-मोजे के स्कूल जाना पड़ेगा।

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जिले में 1143 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें दो लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने तक किताबें निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा यूनिफॉर्म और जूता-मोजा आदि के लिए 1200 रुपये डीबीटी के माध्यम से सीधे प्रत्येक बच्चे के बैंक एकाउंट में भेजा जाता है। इससे उन बच्चों के अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का भार कम हो जाता है। दो दिन बाद एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है। 
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उसमें भी 31 मार्च को रविवार का अवकाश है, मगर जिले के 95 फीसदी विद्यालयों पर अब तक किताबें ही नहीं पहुंचीं हैं। आराजीलाइन और सेवापुरी ब्लॉक के कुछ विद्यालयों तक ही किताबें पहुंचने का दावा किया जा रहा है, जबकि अन्य विद्यालयों को अब तक किताबों का इंतजार है। शिक्षकों का कहना है कि जब तक नई किताबें नहीं मिल जातीं, तब तक बच्चों को अपने से ऊपर की कक्षा के विद्यार्थियों से पुरानी किताबें मांग कर काम चलाना पड़ेगा। नई किताबें आएंगी तो बच्चों में बांटी जाएंगी।
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बोले अधिकारी
95 फीसदी किताबें बीआरसी तक पहुंच गई हैं। राजातालाब और सेवापुरी क्षेत्र के कुछ विद्यालयों में भी बांटी गई हैं। अन्य जगहों पर बांटी जा रही हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह तक हर जगह किताबें वितरित कर दी जाएंगी। यूनिफॉर्म और जूता-मोजा का पैसा बच्चों के खाते में सीधे निदेशालय स्तर से भेजा जाता है।
- डॉ. अरविंद पाठक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

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