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सुबह-ए-बनारस के बाद नए कार्यक्रम घाट संध्या की शुरूआत
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:12 AM IST
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घाट संध्या की शुरूआत
- फोटो : अमर उजाला
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सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम के 800 दिन पूरे होने के बाद बुधवार से रीवा घाट पर नए कार्यक्रम घाट संध्या की शुरूआत की गई। जिला सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पहले दिन भरतनाट्यम एवं कथक कलाकारों द्वारा मनोहारी कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
कथक नृत्य के कार्यक्रम में डॉ विधि नागर के निर्देशन में रंजना उपाध्याय ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के अंतर्गत तीनताल में उपज ठाट टुकड़े तिहाई की मनोहारी प्रस्तुति की।
कत्थक का समापन दादरा पर आधारित नृत्य से हुआ जिसके बोल थे छोड़ो-छोड़ो बिहारी। तबला संगती रही आनंद मिश्र की और बांसुरी पर थे शनीश गयावली।
कार्यक्रम का शुभारंभ कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने चित्रों के अनावरण द्वारा एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। विशिष्ट अतिथि संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो विश्वंभरनाथ मिश्र ने ऐसे आयोजनों को काशी की गरिमा के अनुकूल बताया। डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया।
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कथक नृत्य के कार्यक्रम में डॉ विधि नागर के निर्देशन में रंजना उपाध्याय ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के अंतर्गत तीनताल में उपज ठाट टुकड़े तिहाई की मनोहारी प्रस्तुति की।
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कत्थक का समापन दादरा पर आधारित नृत्य से हुआ जिसके बोल थे छोड़ो-छोड़ो बिहारी। तबला संगती रही आनंद मिश्र की और बांसुरी पर थे शनीश गयावली।
कार्यक्रम का शुभारंभ कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने चित्रों के अनावरण द्वारा एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। विशिष्ट अतिथि संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो विश्वंभरनाथ मिश्र ने ऐसे आयोजनों को काशी की गरिमा के अनुकूल बताया। डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया।
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