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Ashtami Puja: नवरात्र की महाअष्टमी पर होगी अन्नपूर्णा की परिक्रमा, संधि पूजन पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग

Sun, 02 Oct 2022 09:38 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 02 Oct 2022 09:38 PM IST
सार

महाअष्टमी पर मां दुर्गा हर प्रकार से जीवन में मंगल की कर्ता हैं। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अष्टमी के दिन कन्या पूजन का महत्व है और अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने से हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। 

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Navratri 2022 Ashtami Puja parikrma of maa Annapurna Sarvartha Siddhi Yoga is built on Sandhi Puja
वाराणसी में रविवार को लक्सा स्थित अकाल बोधन समिति में दुर्गा पूजा के मौके पर मां दुर्गा की आरती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां अन्नपूर्णा की परिक्रमा का विधान है। अष्टमी और नवमी की संधि पूजन पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। महाअष्टमी पर मां दुर्गा हर प्रकार से जीवन में मंगल की कर्ता हैं। महाअष्टमी का व्रत तीन अक्तूबर को मनाया जाएगा और अन्नपूर्णा परिक्रमा करने का मुहूर्त 6:32 लेकिन शाम चार बजे तक है।

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तीन अक्तूबर को संधिपूजन के लिए दिन में 3:36 से 4:24 के बाद पूजन का मुहूर्त है। मध्यरात्रि में 2:21 बजे से सर्वार्थ सिद्धि का योग है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अष्टमी के दिन कन्या पूजन का महत्व है और अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने से हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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अष्टमी के दिन नारियल खाना निषेध

निर्णय सिंधु के अनुसार व्रतियों को अष्टमी के दिन नारियल और नवमी के दिन गोल लौकी खाने का निषेध है। महानवमी चार अक्तूबर को पड़ रही हैं। नवमी तिथि तीन अक्तूबर की शाम को 4:03 मिनट पर शुरू होगी और चार अक्तूबर को दोपहर 1:32 मिनट पर समाप्त होगी। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:38 मिनट पर शुरू होगा और 5:27 मिनट पर समाप्त होगा।

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Navratri 2022 Ashtami Puja parikrma of maa Annapurna Sarvartha Siddhi Yoga is built on Sandhi Puja
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व - फोटो : अमर उजाला

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 मिनट से दोपहर 12:33 मिनट तक चलेगा। नवमी में हवन करने वालों के लिए दिन में 1:32 मिनट तक हवन करने का मुहूर्त है। हवन के लिए नवमी तिथि ही सर्वोत्तम है। निर्णय सिंधु के अनुसार नवरात्र व्रत का पारण पांच अक्तूबर को प्रात: काल 8:07 बजे तक किया जाएगा।

विजयादशमी पर शमी पूजन और अपराजिता पूजन का विधान

विजयादशमी के लिए अपराह्न व्यापिनी ग्राही का सिद्धांत है। इसलिए विजयादशमी भी चार अक्तूबर को 1:32 बजे के बाद मनाई जाएगी। विजयादशमी स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है और इसमें शमी पूजन और अपराजिता पूजन का विधान है। शस्त्र पूजन का मुहूर्त चार अक्तूबर को दोपहर में 1:58 बजे से लेकर 2:44 बजे तक है। माता जी का गमन चार अक्तूबर को तीसरे चरण में रात्रि में 10 बजे होगा।

अष्टमी व्रत का पारण चार अक्तूबर को


नवमी व्रत का पारण पांच अक्तूबर को सुबह 8:07 बजे से पहले
विजयादशमी मुहूर्त चार अक्तूबर को दोपहर 1:32 बजे के बाद
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