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शारदीय नवरात्र मेले का शुभारंभ, मां विंध्यवासिनी के दरबार में दो लाख भक्तों ने किया दर्शन 

Wed, 10 Oct 2018 03:17 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Wed, 10 Oct 2018 03:17 PM IST
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Navaratri celebration in vindhyachal at uttar pradesh
विंध्याचल में दर्शन को उमड़े लोग
मां विंध्यवासिनी के जयघोष के साथ विंध्याचल में शारदीय नवरात्र मेले का शुभारंभ हो गया। पहले दिन विंध्याचल स्थित विंध्यवासिनी मंदिर, अष्टभुजा मंदिर, कालीखोह मंदिर में सुबह से ही आस्थावानों की दूर-दूर तक कतार लग गई। मंगलवार की आधी रात के बाद ही बड़ी संख्या में भक्तों ने लंबी कतार में लगने के बाद मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया। पहले दिन करीब दो लाख भक्तों ने दर्शन किया।
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नवरात्र के पहले दिन गंगा स्नान करने के बाद बड़ी संख्या में विंध्यधाम पहुंचे भक्तों ने देवी चरणों में शीश नवाया। मंदिर की छत पर जहां शहनाई एवं नगाड़े की धुन पर लोगों ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराया, वहीं जगह-जगह आसन बांधे साधक मंत्र जाप में तल्लीन दिखाई दिए।

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मां के दर्शन-पूजन के उपरांत भक्तजनों ने मंदिर परिसर में विराजमान देवी-देवताओं के मंदिरों में मत्था टेका। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा, शहनाई एवं मां के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा था। तरह-तरह के पुष्पों, चुनरी तथा रंग-बिरंगे झालरों से की गई मंदिर की सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। धाम पर पहुंचे भक्तों ने मंदिर के गुंबद व हवन कुंड की भी परिक्रमा की।

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इसी क्रम में विंध्य पर्वत पर विराजमान मां अष्टभुजी देवी एवं कालीखोह स्थित महाकाली मंदिर सहित पहाड़ों पर नौ दिनों तक पूजन-अनुष्ठान व हवन-यज्ञ के लिए संत-महात्माओं ने भी अपना डेरा डाल दिया है।

 

देवीधाम में उमड़ी भक्तों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की तरफ से सुरक्षा-व्यवस्था के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। विंध्याचल मंदिर परिसर में मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी की निगरानी में भक्तजन दर्शन-पूजन करते नजर आए।        
 

तीन किमी के दायरे में तीन देवियां

Navaratri celebration in vindhyachal at uttar pradesh
दर्शन करते भक्त - फोटो : amar ujala
मां विंध्यवासिनी विंध्याचल की पहाड़ियों में गंगा की पवित्र धाराओं की कल-कल करती ध्वनि, प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरती है। त्रिकोण यंत्र पर स्थित मां विंध्यवासिनी देवी लोकहिताय, महालक्ष्मी, महाकाली तथा महासरस्वती का रूप धारण करती हैं।

मान्यता है कि सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी विंध्य क्षेत्र का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं होता। यहां पर संकल्प मात्र से उपासकों को सिद्घि प्राप्त होती है। इस कारण यह क्षेत्र सिद्ध पीठ के रूप में विख्यात है।

खास बात यह है कि यहां पर तीन किलोमीटर के दायरे में तीन प्रमुख देवियां विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि तीनों देवियों के दर्शन किए बिना विंध्याचल की यात्रा अधूरी ही मानी जाती है। तीनों के केंद्र में हैं मां विंध्यवासिनी।

यहां निकट ही कालीखोह पहाड़ी पर महाकाली तथा अष्टभुजा पहाड़ी पर अष्टभुजी देवी विराजमान हैं। मान्यता है कि यहां नवरात्र में माता के दर्शन मात्र से ही भक्तों को समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनऱएं पूर्ण होती हैं।            
             

काली खोह पहुंचते रहे भक्त    

Navaratri celebration in vindhyachal at uttar pradesh
अपनी बारी का इंतजार करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala
कालीखोह स्थित मंदिर में विराजमान महाकाली के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने के लिए नवरात्र के पहले दिन भक्तों का तांता लगा रहा। नारियल-चुनरी सहित प्रसाद लेकर देवी मंदिर पहुंचे भक्तों ने भक्ति-भाव से मत्था टेका। तरह-तरह के फूलों से मां काली का किया गया भव्य शृंगार का दर्शन कर भक्त भाव विह्वल हो उठे।

घंटा-घड़ियाल, शंख व माता के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर देवीमय हो रहा था। मां का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर के आसपास लंगूरों एवं बंदरों को चना-गुड़ खिलाकर पुण्य कमाया, वहीं भिक्षुओं को भी दान-दक्षिणा देकर लौटे। वहीं विंध्य पर्वत पर विराजमान मां अष्टभुजी के भव्य स्वरूप का दर्शन पाकर दूरदराज से आए भक्त निहाल हो उठे।

किसी ने पहाड़ के रास्ते तो किसी ने सीढ़ियों से मंदिर पर पहुंचकर मां का दर्शन-पूजन किया। मां का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में जगह-जगह रक्षा बांधकर अपनी मन्नतें मांगी।

मां के दर्शन-पूजन के दौरान निरंतर बज रहे घंटा-घड़ियाल व शंख सहित माता के जयघोष से मंदिर परिसर देवीमय हो रहा था। देवी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़ के मद्देनजर पुलिस व पीएसी के जवानों की भी पहाड़ पर जगह-जगह तैनाती की गई थी।   
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