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गुप्त नवरात्रि में पूजन से शांत होते हैं नवग्रह, बरसेगी मां की कृपा
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गुप्त नवरात्रि में व्रत और पूजन करने मात्र से समस्त नवग्रह की शांति होती है। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा गुप्त नवरात्रि का आरंभ हो रहा है। यह 30 जून से आठ जुलाई तक जप, तप और अनुष्ठान के माध्यम से साधक माता शक्ति की आराधना करेंगे। गुप्त नवरात्रि का पालन करने मात्र से ही सभी ग्रह अनुकूल हो जाते हैं क्योंकि नवरात्रि में प्रत्येक दिन से एक-एक ग्रह की शांति हो जाती है।
ज्योतिष मर्मज्ञ श्रीनाथ प्रपन्नाचार्य ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के नौ दिन में आपको मां दुर्गा के विशेष मंत्र का जाप पूजा के समय करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के समय में मां दुर्गा को शृंगार सामग्री अर्पित करने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है और सुखमय जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साधक को प्रात: काल में स्नान के बाद मां दुर्गा की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए और माता के मंत्रों का जाप करना चाहिए। माता की पूजा के बाद विधेहि देवि कल्याणं विधेहि विपुलां श्रिय:। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।। का जाप करें। धन-दौलत में वृद्धि के लिए माता लक्ष्मी की कमल पर विराजमान धन वर्षा करने वाली मूर्ति या तस्वीर को घर लाना चाहिए. इसके अलावा माता लक्ष्मी के प्रतीक चिह्न को भी पूजा स्थान, तिजोरी या घर में ला सकते हैं.। विशेष गुप्त नवरात्रि का पूजन बहुत शुद्धता से और गोपनीय रहकर ही करना चाहिए।
जीवन में सुख, समृद्धि, धन, यश की प्राप्ति करना चाहते हैं तो गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के मंत्र ते सम्मता जनपदेषु धनानि तेषां तेषां यशांसि न च सीदति धर्मवर्ग:। धन्यास्त एव निभृतात्मजभृत्यदारा येषां सदाभ्युदयदा भवती प्रसन्ना।
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यदि आप अपने कार्यक्षेत्र में सफलता और उन्नति चाहते हैं तो पूजा के समय मां दुर्गा के मंत्र देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।
आपको अपने घर एवं परिवार में सुख और समृद्धि को बढ़ाना है, कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर कर सफलता प्राप्त करनी है, तो पूजा के समय मां दुर्गा के विशेष मंत्र का जाप करें। सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वित:। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:॥
ज्योतिषाचार्य के अनुसार नवरात्र में व्रत-पूजा की तरह ही भोग का भी बहुत महत्व होता है। मां के नौ रूपों को कौन-से नौ भोग लगाने चाहिए।
प्रतिपदा- रोगमुक्त रहने के लिए मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी सफेद चीजों का भोग लगाएं
द्वितीया- लंबी उम्र के लिए मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं।
तृतीया- दुख से मुक्ति के लिए मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं।
चतुर्थी- तेज़ बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं.
पंचमी- स्वस्थ शरीर के लिए मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं.
षष्ठी- आकर्षक व्यक्तित्व और सुंदरता पाने के लिए मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं
सप्तमी- शोक व संकटों से बचने के लिए मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करें
अष्टमी- संतान संबंधी समस्या से छुटकारा पाने के लिए मां महागौरी को नारियल का भोग लगाएं
नवमी- सुख-समृद्धि के लिए मां सिद्धिदात्री को हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगाएं
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ज्योतिष मर्मज्ञ श्रीनाथ प्रपन्नाचार्य ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के नौ दिन में आपको मां दुर्गा के विशेष मंत्र का जाप पूजा के समय करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के समय में मां दुर्गा को शृंगार सामग्री अर्पित करने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है और सुखमय जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साधक को प्रात: काल में स्नान के बाद मां दुर्गा की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए और माता के मंत्रों का जाप करना चाहिए। माता की पूजा के बाद विधेहि देवि कल्याणं विधेहि विपुलां श्रिय:। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।। का जाप करें। धन-दौलत में वृद्धि के लिए माता लक्ष्मी की कमल पर विराजमान धन वर्षा करने वाली मूर्ति या तस्वीर को घर लाना चाहिए. इसके अलावा माता लक्ष्मी के प्रतीक चिह्न को भी पूजा स्थान, तिजोरी या घर में ला सकते हैं.। विशेष गुप्त नवरात्रि का पूजन बहुत शुद्धता से और गोपनीय रहकर ही करना चाहिए।
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जीवन में सुख, समृद्धि, धन, यश की प्राप्ति करना चाहते हैं तो गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के मंत्र ते सम्मता जनपदेषु धनानि तेषां तेषां यशांसि न च सीदति धर्मवर्ग:। धन्यास्त एव निभृतात्मजभृत्यदारा येषां सदाभ्युदयदा भवती प्रसन्ना।
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यदि आप अपने कार्यक्षेत्र में सफलता और उन्नति चाहते हैं तो पूजा के समय मां दुर्गा के मंत्र देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।
आपको अपने घर एवं परिवार में सुख और समृद्धि को बढ़ाना है, कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर कर सफलता प्राप्त करनी है, तो पूजा के समय मां दुर्गा के विशेष मंत्र का जाप करें। सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वित:। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:॥
ज्योतिषाचार्य के अनुसार नवरात्र में व्रत-पूजा की तरह ही भोग का भी बहुत महत्व होता है। मां के नौ रूपों को कौन-से नौ भोग लगाने चाहिए।
प्रतिपदा- रोगमुक्त रहने के लिए मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी सफेद चीजों का भोग लगाएं
द्वितीया- लंबी उम्र के लिए मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं।
तृतीया- दुख से मुक्ति के लिए मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं।
चतुर्थी- तेज़ बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं.
पंचमी- स्वस्थ शरीर के लिए मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं.
षष्ठी- आकर्षक व्यक्तित्व और सुंदरता पाने के लिए मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं
सप्तमी- शोक व संकटों से बचने के लिए मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करें
अष्टमी- संतान संबंधी समस्या से छुटकारा पाने के लिए मां महागौरी को नारियल का भोग लगाएं
नवमी- सुख-समृद्धि के लिए मां सिद्धिदात्री को हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगाएं