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वाराणसी में चाय बेचकर घर की आर्थिक स्थिति संभालने में जुटे राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी

Wed, 22 Jul 2020 11:17 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 22 Jul 2020 11:17 AM IST
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National level players engaged in financial situation of home by selling tea in Varanasi
चाय की दुकान पर राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला।

वाराणसी में अखाड़े में पसीना बहाने वाले पहलवान चाय की दुकान पर तपती भट्टी की तपन में पसीना बहा रहे हैं। पितरकुंडा तिराहे पर कुश्ती के सीनियर नेशनल खिलाड़ी और साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) सेंटर के दो खिलाड़ी भाई चाय की दुकान पर चाय बेचकर घर की आर्थिक स्थिति सुधारने में जुटे हैं। लॉकडाउन के बाद से चाय की दुकान से होने वाली आमदनी की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है।

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वर्ष 2015 में आयोजित सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में दांव लगा चुके नेशनल खिलाड़ी रामाकांत नगर कॉलोनी के रहने वाले विकास यादव(23) ने बताया कि पिछले चार महीनों से कोरोना के कारण कोई खेल गतिविधि नहीं हो रही है। अखाड़े और स्टेडियम बंद हैं। ऐसे में घर में थोड़ी बहुत एक्सरसाइज के अलावा और कोई दूसरा काम नहीं बचा।
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घर की आर्थिक स्थिति के लिए पितरकुंडा स्थित चक्रधारी स्कूल के पास चाय की दुकान है। जिसे मेरे पिता मोलई यादव बीते 15 साल से चला रहे थे। जो लॉकडाउन के बाद से बंद चल रही थी। सामान्य दिनों में इसी दुकान से 30 से 40 लीटर तक की दूध की खपत हो जाती थी।

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मगर कोरोना काल में 10 लीटर दूध खपा पाना मुश्किल हो गया है। हालांकि घर चलाने के लिए यही आमदनी का एक मात्र साधन है। जिससे माता पिता, पांच भाई और एक बहन का खर्च चल रहा है।

विकास के अलावा उनके छोटे भाई पवन यादव भी हैं, जो इटावा के साई सेंटर में तीन साल से रह रहे थे। जहां खेल के साथ खाने रहने सुविधा थी। मगर कोरोना के कारण पवन को भी सेंटर छोड़ना पड़ा। अब पवन भी अपने भाई के साथ ही चाय की दुकान पर हाथ बंटाते हैं। जबकि की सभी छोटे भाई और एक बहन पढ़ाई लिखाई करते हैं।

विकास ने बताया कि वो सिगरा स्टेडियम में कुश्ती के प्रशिक्षक गोरख यादव के निगरानी में अभ्यास किया करते थे। जो अब बंद है। वहीं छोटा भाई पवन साई सेंटर में था। जहां उसे सरकार की तरफ सभी सुविधाएं मिलती थीं। अब उसे भी कोई सुविधा नहीं मिल रही।

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