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नृत्य में साकार हुए नटराज के भाव
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 28 Apr 2016 01:57 AM IST
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पं. जसराज
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कथक नृत्य की थिरकन से बनारस घराने की खास अदाकारी लोगों के जेहन में उतरी तो बंशी की तान पर मिर्जापुरी कजरी की मिठास छा गई। ख्याल गायकी की खूबियों, बारीकियों ने भी देश, दुनिया के संगीत प्रेमियों का बरबस ध्यान खींचा। इसी अंदाज में बुधवार की सारी रात गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी अविरल बहती रही। मौका था संकट मोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा का।
दुखों से निकालने वाले संकट मोचन हनुमान के दरबार में लगे संगीत कुंभ के बीच सुर, लय, ताल का समन्वय हर किसी के लिए यादगार बन गया है। बुधवार की रात शुरुआत हुई बनारस घराने की कथक नृत्य जोड़ी सौरभ मिश्र और गौरव मिश्र की थिरकन से। युवा नर्तकों ने शिव वंदना से आमद की। पारंपरिक शैली में बंदिश के बोल थे- डमरूपाणि त्रिशूलपाणि हे नटराजन नमो नम:...। इस पर इन्होंने नृत्य के भावों को पिरोया। भाव-भंगिमाओं, इशारों के जरिए नृत्यमय आराधना के दौरान नटराज की मुद्राओं पर खूब तालियां गूंजीं। इसके बाद इस जोड़ी ने पारंपरिक शैली में तीन ताल में घरानेदार आमद, टुकड़ा, तिहाई, तत्कार के बाद गत निकास और चक्करदार की बेहद सधे अंदाज में प्रस्तुति की। अंत में डिमिक डिमिक डमरू बाजे... के बोल पर भावपूर्ण थिरकन से इन्होंने विराम लिया।
तबले पर शुभ महाराज, बोल पढ़ंत पं. रविशंकर मिश्र,सितार पर नीरज मिश्र, सारंगी पर अनीष मिश्र ने संगत की। गायन किया पं. धर्मनाथ मिश्र ने। इनके बाद ख्याल गायक पं. रतन मोहन शर्मा ने मंच संभाला। इन्होंने राग पूरिया की अवतारणा की। पूरिया में अलापचारी के साथ इन्होंने इस राग की सहचरी सोहिनी के भी छाया भावों की स्वरों में अनुभूति कराई। इनके साथ तबले पर पं. राम कुमार मिश्र और हारमोनियम पर पं. दिनकर शर्मा थे। फिर बारी आई बंगलूरू से आए एस आकाश की। आकाश ने बांसुरी पर राग मालकौंस की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के बाद इन्होंने द्रुत लय की बंदिश बजाई। अंत में मिर्जापुरी कजरी की धुन बजाकर इन्होंने विदा ली। तबले पर संगत की पं. कुबेर नाथ मिश्र ने। इनके बाद कौशिकी चक्रवर्ती ने राग जोग में तीन ताल में निबद्ध बंदिश से आगाज किया।
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हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में संकट मोचन का दरबार कला-संगीत का संगम तट बन गया है। परिक्रमा पथ के सामने संगीत समारोह में विश्व भर के नामी कलाकारों का जमघट लगा है तो परिसर के उत्तरी हिस्से में नामचीन चित्रकारों की सजाई कला दीर्घा। बुधवार की रात हनुमान जी के जीवन चरित्र पर आधारित 50 चित्रों की गैलरी का फिर उद्घाटन हुआ। इस गैलरी में बाल हनुमान से लेकर वृद्ध हनुमान तक के चित्रों को उकेरा गया है। सूर्य को निगलते हनुमान और सुरसा के मुंह से निकलते हनुमान भी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। गुरुवार की रात 18 फीट ऊंचे कैनवस पर हनुमानाष्टक के भावों को 20 से अधिक चित्रकार मिलकर रात भर उकेरेंगे।
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दुखों से निकालने वाले संकट मोचन हनुमान के दरबार में लगे संगीत कुंभ के बीच सुर, लय, ताल का समन्वय हर किसी के लिए यादगार बन गया है। बुधवार की रात शुरुआत हुई बनारस घराने की कथक नृत्य जोड़ी सौरभ मिश्र और गौरव मिश्र की थिरकन से। युवा नर्तकों ने शिव वंदना से आमद की। पारंपरिक शैली में बंदिश के बोल थे- डमरूपाणि त्रिशूलपाणि हे नटराजन नमो नम:...। इस पर इन्होंने नृत्य के भावों को पिरोया। भाव-भंगिमाओं, इशारों के जरिए नृत्यमय आराधना के दौरान नटराज की मुद्राओं पर खूब तालियां गूंजीं। इसके बाद इस जोड़ी ने पारंपरिक शैली में तीन ताल में घरानेदार आमद, टुकड़ा, तिहाई, तत्कार के बाद गत निकास और चक्करदार की बेहद सधे अंदाज में प्रस्तुति की। अंत में डिमिक डिमिक डमरू बाजे... के बोल पर भावपूर्ण थिरकन से इन्होंने विराम लिया।
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तबले पर शुभ महाराज, बोल पढ़ंत पं. रविशंकर मिश्र,सितार पर नीरज मिश्र, सारंगी पर अनीष मिश्र ने संगत की। गायन किया पं. धर्मनाथ मिश्र ने। इनके बाद ख्याल गायक पं. रतन मोहन शर्मा ने मंच संभाला। इन्होंने राग पूरिया की अवतारणा की। पूरिया में अलापचारी के साथ इन्होंने इस राग की सहचरी सोहिनी के भी छाया भावों की स्वरों में अनुभूति कराई। इनके साथ तबले पर पं. राम कुमार मिश्र और हारमोनियम पर पं. दिनकर शर्मा थे। फिर बारी आई बंगलूरू से आए एस आकाश की। आकाश ने बांसुरी पर राग मालकौंस की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के बाद इन्होंने द्रुत लय की बंदिश बजाई। अंत में मिर्जापुरी कजरी की धुन बजाकर इन्होंने विदा ली। तबले पर संगत की पं. कुबेर नाथ मिश्र ने। इनके बाद कौशिकी चक्रवर्ती ने राग जोग में तीन ताल में निबद्ध बंदिश से आगाज किया।
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हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में संकट मोचन का दरबार कला-संगीत का संगम तट बन गया है। परिक्रमा पथ के सामने संगीत समारोह में विश्व भर के नामी कलाकारों का जमघट लगा है तो परिसर के उत्तरी हिस्से में नामचीन चित्रकारों की सजाई कला दीर्घा। बुधवार की रात हनुमान जी के जीवन चरित्र पर आधारित 50 चित्रों की गैलरी का फिर उद्घाटन हुआ। इस गैलरी में बाल हनुमान से लेकर वृद्ध हनुमान तक के चित्रों को उकेरा गया है। सूर्य को निगलते हनुमान और सुरसा के मुंह से निकलते हनुमान भी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। गुरुवार की रात 18 फीट ऊंचे कैनवस पर हनुमानाष्टक के भावों को 20 से अधिक चित्रकार मिलकर रात भर उकेरेंगे।