एयर स्ट्राइक के बाद फिर सबकी जुबां पर मोदी, भाजपा-अपना दल ‘साथ-साथ’ कर सकते हैं सीटों की घोषणा
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लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा गठबंधन की सीटें तय होने के बाद भाजपा और अपना दल (एस) ने ‘साथ-साथ’ चुनाव लड़ने के संकेत यों ही नहीं दिए हैं। अपना दल (एस) को पता है कि पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक के बाद माहौल बदल चुका है।
देश हित के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra modi) और भाजपा एक बार फिर सबकी जुबां पर आ गई है। ऐसे में रिश्तों में तल्खी रखने से न तो पार्टी का फायदा होगा और न ही पिछड़ों की भलाई के लिए खास किया जा सकेगा।
वहीं भाजपा केंद्र-राज्य सरकार में शामिल अद (एस) को गठबंधन का हिस्सा न बनने से पिछड़ी जातियों में अपनी विरोधी छवि नहीं बनने देना चाहती है। यही कारण है कि बुधवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के लोकसभा चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ अनुप्रिया पटेल(Anupriya patel) और आशीष पटेल की डेढ़ घंटे की बातचीत सकारात्मक रही। यह पहले दौर की वार्ता है।
वार्ता के बीच ही भाजपा नेतृत्व की ओर से संबंधितों को निर्देश दे दिए गए हैं। अगले दौर की बातचीत से पहले अद (एस) को दी जाने वाली संसदीय सीटों, पार्टी को दिए जाने वाले निगमों और प्रदेश मंत्रिमंडल के विस्तार की बात तय हो जाएगी। दोनों दलों के बड़े नेता लोकसभा चुनाव में गठबंधन जारी रखने की घोषणा लखनऊ में कर सकते हैं।
अपना दल से गठबंधन करना भाजपा के लिए था जरूरी
प्रभावशाली पिछड़ी जातियों में गिने जाने वाले पटेल और कुर्मी बिरादरी की पार्टी के तौर पर स्थापित अपना दल (एस) और उनकी नेता अनुप्रिया पटेल (Anupriya patel) के साथ न रहने पर भाजपा को एक दर्जन सीटों पर कड़ी चुनौती का ही सामना नहीं करना पड़ता, छवि भी पिछड़ा विरोधी हो जाती।
भाजपा ने इसीलिए पांच निगमों में अपना दल (एस) के नेताओं को समायोजित करने का आश्वासन दिया है। पार्टी मानती है कि कांग्रेस-अपना दल (एस) का गठबंधन होने पर पूर्वांचल की कुछ सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन अंदर खाने इनकी मदद कर सकता था।
वहीं, अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा माहौल में देश हित सर्वोपरि है। एनडीए और भाजपा को समर्थन जरूरी है। इसीलिए हमने शाह से मुलाकात से पहले ही 28 को लखनऊ में होने वाली बैठक रद्द कर दी।
सुभासपा के अकेले मैदान में उतरने के रास्ते बंद
अपना दल (एस) के साथ गठबंधन आगे बढ़ाकर भाजपा ने सुभासपा के अकेले चुनाव मैदान में उतरने के रास्ते भी बंद कर दिए हैं। पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर पिछड़ों के आरक्षण में बंटवारे को मुद्दा बना चुके हैं। इस बारे में 19 को शाह से उनकी बातचीत हुई थी। शाह ने कहा है कि चुनाव के बाद ही इसे लागू किया जा सकता है। शाह से अगले दौर की बातचीत के लिए मंगलवार को उन्हें दिल्ली बुलाया गया था लेकिन नहीं हो पाई। अब राजभर और शाह की मुलाकात तीन मार्च के बाद हो सकती है।
अब सीमित दबाव डालेगी सुभासपा!
सूत्रों का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद प्रदेश के मतदाताओं की सोच पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद फिर बदल गई है। अब सुभासपा भाजपा पर ‘सीमित दबाव’ ही डाल पाएगी। ऊपर से अब अपना दल (एस) से भाजपा को समर्थन इस सियासी खेल में नया मोड़ ला सकता है।