जब मड़ई में एनडी तिवारी ने बिताई थी रात, जानिए पूर्वांचल से जुड़ीं कुछ यादें
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बलियाः अपना वजन कराकर गरीबों में बंटवाया था धन
एनडी तिवारी का बलिया के लोगों से खास लगाव था, जिस कारण वह यहां कई बार आए। बात उस समय की है, जब 1994 में वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। बलिया आगमन के दौरा मांझी में उन्होंने एक मड़ई में रात बिताई थी, अपने सहपाठियों के अलावा गरीबों के बीच में जमीन पर बैठकर भोजन किया। इतना ही नहीं, उस दौरान उनका वजन कर उसके बराबर धन गरीबों में वितरित भी किया गया था।
द्वाबा क्षेत्र के दांगड़बाग गांव निवासी पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे काशी नाथ मिश्रा के पुत्र विजय मिश्रा ने एनडी तिवारी के निधन पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि एनडी तिवारी जनपद में कई बार आ चुके हैं। उनके पिता स्व. काशी नाथ मिश्रा के वह अच्छे मित्र थे। इलाहाबाद में पढ़ाई के दौरान से ही उनकी मित्रता थी, जो आगे चलकर भी बरकरार रही।
उन्हें बलिया का लिट्टी चोखा भी काफी प्रिय था। इतने बड़े पद पर होने के बावजूद वह लोगों से सहज भाव से ही मिलते थे। लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते थे और उसपर अमल भी करवाते थे। मांझी आगमन के दौरान ही उन्होंने अपना वजन कराकर धन गरीबों में बंटवाया था।
बनारसः पहली बार हॉट मिक्स प्लांट से बनवाई थी सड़कें
वाराणसी में पिंडरा क्षेत्र में करखियांव और जौनपुर के सतहरिया में औद्योगिक आस्थान की स्थापना उनकी परिकल्पना का ही परिणाम है। तिवारी के नजदीकी रहे लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधान परिषद के पूर्व सदस्य मणिशंकर पांडेय का कहना है कि सामने घाट पर बनने वाला बंधा भी उन्हीं के मुख्यमंत्रित्वकाल में शुरू हुआ था।
उन्होंने बताया कि 1989 में तिवारी ने जौनपुर को इंडिस्ट्रयल जिला घोषित किया था। तय हुआ था कि यहां कारोबार शुरू करने वालों से सात साल तक टैक्स और बैंक से कर्ज लेने वालों से ब्याज नहीं लिया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के पूर्व राष्ट्रीय सचिव रत्नाकर त्रिपाठी उन्हें याद करते हुए बताते हैं कि बतौर मुख्यमंत्री उनसे 30 से अधिक बार मुलाकात हुई थी। वे सभी को महाराज जी कहते थे।
कभी किसी पर गुस्सा करते नहीं देखा। हम लोग गुस्साते थे तो कहते थे दिमाग ठंडा रखो। कार्यकर्ता हो या मंत्री रात बारह बजे भी उसी भाव से मिलते थे। किसी में भेद नहीं करते थे। कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि वह कर्मयोगी थे। उनके कार्यकाल में यूपी का काफी विकास हुआ है। उन्हीं के रुके कार्यों को बाकी की सरकारों ने आगे बढ़ाया।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में एनडी तिवारी के भाई रमेश चंद्र तिवारी प्रोफेसर थे। मुख्यमंत्री रहते हुए वह कई बार उनके घर आए थे। विद्यापीठ के प्रो. सतीश राय बताते हैं कि समाजशास्त्र के प्रोफेसर रहे तिवारी में इस बात का बिल्कुल भी अहम नहीं था कि वह मुख्यमंत्री के भाई है। उनके आवास पर टेलीफोन इसीलिए लगाया गया था क्योंकि उनके भाई एनडी तिवारी को उनसे बात करनी रहती थी।
विद्यापीठ में कांग्रेस के एक अधिवेशन में भी तिवारी ने शिरकत की थी। वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य ने बताया कि तिवारी का जंगमबाड़ी मठ से काफी लगाव था। यहां दर्शन-पूजन के लिए वह प्राय: आते थे।
सोनभद्रः सोनभद्र को भारतभद्र बनाने का देखा था सपना
यही कारण था कि गुरुवार को जब उनके निधन की खबर पहुंची तो तमाम लोगों के जेहन में उनसे जुड़ी पुरानी यादें ताजा हो गईं। लोगों ने कहा कि उस समय की स्लेटी रंग की शेरवानी, सफेद चूड़ीदार पैजामा, सिर पर गांधी टोपी पहले एनडी तिवारी की छवि भुलाए नहीं भूलती।
बनवासी सेवा आश्रम के अध्यक्ष एवं समाजवादी विचारक अजयशेखर एनडी तिवारी के निधन को जिले की अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि वह सोनभद्र को सचमुच का भद्र बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जनपद सृजन से पहले ही यहां का दौरा कर स्थितियां जानी। वह भी उनके साथ थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने खुद निरीक्षण किया।
लोगों से बातचीत की और जाना कि यहां के विकास के लिए क्या हो सकता है? अनियमितताएं भी पकड़ी। यहीं कारण था कि जब वह चार मार्च 1989 को जिले की आधारशिला रखने पहुंचे तो उन्होंने सोनभद्र को पूरे भारत का भद्र बनाने की मंशा खुले मंच से जाहिर की।
शिक्षक भोलानाथ मिश्रा ने कहा कि चार मार्च 1989 को राबट्रसगंज की मंडी समिति में उन्होंने फावड़े से मिट्टी की खुदाई कर मिर्जापुर से अलग सोनभद्र जिले की नींव रखी तो वहां मौजूद हर किसी के जेहन में उनकी अमिट छवि कैद हो गई। इस दौरान उन्होंने राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज के कला शिक्षक विपिन सिन्हा जी द्वारा निर्मित सोनभद्र के पहले मानचित्र का अनावरण किया था।
संबोधन के दौरान उन्होंने सोनभद्र को भारतभद्र बनाने का सपना संजाने और कल-कारखानों के जरिए आधुनिक तीर्थ बनाने का भरोसा दिया था। मंच से ही जिले के पहले एसपी के रूप में रिजवान अहमद और पहले डीएम के रूप में सुरेशचंद्र दीक्षित का परिचय कराया था। जिले के पहले सांसद रामप्यारे पनिका ने जिले के गठन में अहम भूमिका निभाई थी।
पहले एक हेलीकॉफ्टर ने उड़ान भरकर यहां का जायजा लिया। इसके बाद वह स्लेटी रंग के दूसरे हेलीकॉफ्टर से उतरे। कांग्रेस नेता राजेश द्विवेदी ने एनडी तिवारी से जुड़ी यादों को साझा करते हुए बताया कि रामप्यारे पनिका ने जिले के नाम के रूप में सोनभद्र, जवाहरनगर सहित तीन नाम सुझाए थे। उसमें सोनभद्र का नाम सबसे पहले थे, जिस पर पंडित जी ने तत्काल मुहर लगा दी।
पनिका को संसदीय सचिव होने के नाते तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने उन्हें दिल्ली में ही एक आयोजन के सिलसिले में रोक लिया। इस कारण वह जिले के शिलान्यास के समय उपस्थित नहीं हो सके। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के साथ कांग्रेस से अलग होने के समय कांग्रेस तिवारी के जिलाध्यक्ष रहे चुके रमेश देव पांडेय उनकी सादगी को याद करते हुए कहते हैं कि वह इमानदारी, कर्तव्य निष्ठा की मिशाल के साथ सर्वश्रेष्ठ कुशल प्रशासक थे।
उन्होंने जिले का सृजन कर सोनभद्र जनक की भूमिका तो निभाई ही, तिवारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में 1995 में भी यहां आकर सोनभद्र के लिए कुछ करने की इच्छा जताई। आरटीएस क्लब में कार्यकर्ताओं और आम जनता को संबोधित करते समय सोनभद्र के लिए सदैव आवाज उठाते रहने का भी भरोसा दिया था।
मऊः एनडी तिवारी ने की थी जनपद की घोषणा
नारायण दत्त तिवारी ने 19 नवंबर 1988 को मऊ को जनपद बनाने की घोषणा स्वयं यहां आकर की थी। कांग्रेस के कद्दावर नेता कल्पनाथ राय के प्रयास से इंदिरा गांधी की जयंती पर लोगों को नये जनपद की सौगात मिली थी। नारायण दत्त तिवारी लखनऊ से कल्पनाथ के साथ हेलीकॉप्टर से मऊ पहुंचे थे।
जीवनराम हास्टल के मैदान पर बने मंच से नारायण दत्त तिवारी ने मऊ को नया जिला बनाने की घोषणा की थी। उन्होनें कहा था कि आजमगढ़ जिले से अलग किए गए आठ ब्लॉकों और बलिया जिले से एक ब्लॉक रतनपुरा को मिलाकर नौ ब्लॉकों का यह मऊ जिला होगा।
पहले जिलाधिकारी जेएन चैंबर को भी मंच पर बुलाया और जिले के पहले जिलाधिकारी के रूप में उनका परिचय कराया था। समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि मऊ को विकास और योजनाओं के लिए अलग बजट मिलेगा। जनता को अधिकारियों से मिलने दूर नहीं जाना होगा। अधिकारियों के यहां पर बैठने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।
बता दें कि कांग्रेस के कद्दावर नेता चंद्रजीत यादव मऊ को आजमगढ़ जिले से अलग किए जाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन कल्पनाथ राय ने मऊ को नया जिला बनाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। उनके इस प्रयास को नारायण दत्त तिवारी का वरद हस्त मिला और जिला अस्तित्व में आ गया। जनपद सृजन के बाद जीवनराम हॉस्टल के ही कई कमरों को कलेक्ट्रेट का रूप दिया गया।
जनपदवासियों को नारायण दत्त तिवारी से काफी लगाव है। उनके निधन की सूचना मिलते ही लोगों में शोक छा गया और लोगों के जेहन में 19 नवंबर 1988 की वह तस्वीर उभर आई जिसने इस क्षेत्र के लोगों को मऊ जिले की सौगात दी थी।
जौनपुरः पूविवि ने दी थी डीलिट उपाधि
जौनपुर में वैसे तो उनके सैकड़ों लोगों से नजदीकी रिश्ते थे। पूर्व विधायक हरगोबिंद सिंह, पूर्व मंत्री लक्ष्मीशंकर यादव, पूर्व सांसद कमला सिंह, पूर्व विधायक राजदेव सिंह, पूर्व विधायक डा. रामकृष्ण उपाध्याय, अधिवक्ता यतींद्र त्रिपाठी देवेश उपाध्याय, सुरेंद्र त्रिपाठी, डा. मधुकर तिवारी आदि उनके करीबी लोगों में रहे हैं।
कांग्रेस से जुड़े सुरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने उन्हें डीलिट की उपाधि उनके उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहने के दौरान दी थी। इसके लिए राजभवन लखनऊ में समारोह आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि पूविवि की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शाहगंज चीनी मिल बंद होने के बाद उसे अधिग्रहीत कर उन्होंने संचालित कराया।
पूर्व मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्रा जब सांसद थे, उस दौरान सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना नोएडा के तर्ज पर की गई। जिसका श्रेय एनडी तिवारी को जाता है। डा. मधुकर तिवारी ने बताया कि जौनपुर में तिवारी कांग्रेस के गठन के बाद सुजानगंज में वर्ष 1994 में उन्होंने सभा की थी। इसके बाद एक बार 1998 में किसी डिग्री कॉलेज के समारोह में आए थे। उनकी यादें सदैव जीवंत रहेंगी।
आजमगढ़ः पत्नी के नाम विद्यालय की नींव रखने आए थे
डॉ. सुशीला तिवारी ग्रामीण महाविद्यालय का नींव पत्थर रखने के लिए 27 जनवरी 2013 को नारायण दत्त तिवारी आजमगढ़ आए थे। यह उनका जिले में अंतिम दौरा था।
कार्यक्रम मे बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने कहा था कि बड़े गर्व की बात है कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय महात्मा गांधी के नाम पर गरीबों के लिए बाजार लगा रहा है। उन्होंने कहा था अभी जीवन में बहुत कुछ करना है। उन्होंने आजादी के समय के अपने अनुभवों की भी चर्चा भी की थी। 'है आजादी में सुख कितना ये देश प्रेमियों से पूछों' कविता का पाठ भी किया था।
बापू बाजार में पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुंदरलाल, पूर्व मंत्री शम्भू सिंह, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ हसीन खान भी मंच पर मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन प्रभु नारायण प्रेमी ने किया था। पूर्व मंत्री शंभू सिंह ने बताया कि उन्होंने एक बार जनपद दौरे के दौरान बूढ़नपुर तहसील का उद्घाटन भी किया था। उन्होंने बताया कि आज ही के दिन 1925 में उनका जन्म भी हुआ था।