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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Narala Penchala Swami gave up job US paying 2 lakh and 30 acres of land to come Kashi for service

वाराणसी: अमेरिका की 2.30 लाख की नौकरी और 30 एकड़ जमीन छोड़ी, काशी में सेवा के लिए आए नाराला पेंचला स्वामी

Thu, 27 Aug 2026 10:12 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 27 Aug 2026 10:12 PM IST
सार

आंध्र प्रदेश के नाराला पेंचला स्वामी अमेरिका की करीब 2.30 लाख रुपये मासिक नौकरी, 30 एकड़ जमीन और दो मकान छोड़कर काशी आए हैं। घायल मिलने के बाद 15 दिन कबीरचौरा अस्पताल में इलाज हुआ। स्वस्थ होने पर उन्होंने नंगे पैर हनुमान घाट लौटने की इच्छा जताई और बिना पारिश्रमिक सेवा करने की बात कही।

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Narala Penchala Swami gave up job US paying 2 lakh and 30 acres of land to come Kashi for service
समाजसेवी अमन कबीर के साथ नाराला पेंचला स्वामी। - फोटो : संवाद

विस्तार

काशी की आध्यात्मिकता और सेवा भावना की एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। आंध्र प्रदेश के नाराला पेंचला स्वामी अमेरिका में करीब 2.30 लाख रुपये प्रतिमाह की नौकरी, 30 एकड़ जमीन और दो बड़े मकान छोड़कर काशी आए हैं। हनुमान घाट क्षेत्र में घायल और भूखे-प्यासे मिलने के बाद अमन कबीर सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने उनकी मदद की। अब स्वस्थ होने के बाद स्वामी ने बिना किसी पारिश्रमिक के सेवा करने की इच्छा जताई है।

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बताया गया कि नाराला पेंचला स्वामी कुछ दिन पहले हनुमान घाट, सोनारपुरा के पास घायल अवस्था में मिले थे। वह नंगे पैर थे और काफी कमजोर दिखाई दे रहे थे। अचानक एक तल नीचे गिरने से उनकी हालत गंभीर हो गई थी। इसके बाद उन्हें कबीरचौरा अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब 15 दिन इलाज चलने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें छुट्टी दे दी।
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अस्पताल से छुट्टी के बाद जब उनसे पूछा गया कि उन्हें कहां जाना है तो उन्होंने हनुमान घाट पहुंचाने का आग्रह किया। अमन कबीर सेवा न्यास के सदस्य अमन कबीर उन्हें बाइक से हनुमान घाट लेकर पहुंचे। वहां स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि स्वामी का सामान गंगा में प्रवाहित कर दिया गया था। लोगों को लगा था कि उनकी मृत्यु हो चुकी है। केवल आधार कार्ड सुरक्षित बचा था।

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स्वामी को चप्पल देने पर उन्होंने पहनने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि काशी उनके लिए स्वर्ग की नगरी है और यहां वह चप्पल नहीं पहन सकते। इसके बाद वह नंगे पैर ही आगे बढ़ गए।

बातचीत के दौरान उन्हें न्यास के साथ रहकर सेवा कार्य में सहयोग करने और इसके बदले 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रस्ताव दिया गया। इस पर स्वामी ने बताया कि यदि उन्हें नौकरी ही करनी होती तो अमेरिका की नौकरी छोड़कर काशी क्यों आते। उन्होंने कहा कि उनके पास 30 एकड़ जमीन और दो बड़े मकान हैं, जिन्हें छोड़कर उन्होंने काशी को चुना है। स्वास्थ्य ठीक होने के बाद वह बिना किसी पारिश्रमिक के सेवा करना चाहते हैं।

स्वामी की बात सुनकर सेवा न्यास से जुड़े लोग भावुक हो गए। उनका कहना है कि भौतिक सुविधाओं के दौर में त्याग और सेवा की ऐसी भावना काशी की आध्यात्मिक विरासत को जीवंत करती है।

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